
घड़ा पूरी तरह भर गया है !
डाॅ. मुरलीधर चाँदनीवाला
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घड़ा पूरी तरह भर गया है शहंशाह!
आदेश करें कि इसे कहाँ फोड़ूँ।
इसकी जमा पूँजी
किसके दरवाजे पर रखकर आऊँ,
कि आपकी शान बनी रहे
और आपके पीछे चली आ रही
भीड़ मायूस न हो।
श्वानों की तरह
भौंकने लगे हैं कुलगुरु,
खल-अमात्य
घंटा बजा रहे हैं गली-गली,
धराशायी है काशी में
माता की पूजित प्रतिमा,
विवेकानंद के शक्तिशाली विचारों का


तन गया है कोई नया मकबरा,
छलनी हो चुका महात्मा के
सपनों का भारत।
घड़ा पूरी तरह भर गया है,
जाँचने वालों ने जाँच कर लिख दिया है
कि यह आपने नहीं भरा।
इसे कहाँ फोड़ूँ, किसके माथे फोड़ूँ,
जो आदेश करें शहंशाह!





