POCSO: नाबालिग बेटी से रेप करने वाले पिता को अंतिम सांस तक जेल, कोर्ट ने कहा- अपनों से हारी थी, मगर बिखरी नहीं, उसने न्याय का दरवाजा खटखटाया

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 POCSO: नाबालिग बेटी से रेप करने वाले पिता को अंतिम सांस तक जेल,  कोर्ट ने कहा- अपनों से हारी थी, मगर बिखरी नहीं,उसने न्याय का दरवाजा खटखटाया !

मध्यप्रदेश के गुना में कोर्ट ने अपनी ही नाबालिग बेटी के साथ बार-बार दुष्कर्म करने वाले पिता को “मरते दम तक जेल” की सजा सुनाई है। माँ के मुकरने के बावजूद बेटी के साहस और DNA रिपोर्ट के आधार पर अदालत ने यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया

गुना: रिश्तों को शर्मसार करने वाले एक मामले में गुना की विशेष पॉक्सो अदालत ने कड़ा फैसला सुनाया है। अपनी 12 वर्षीय नाबालिग बेटी के साथ दरिंदगी करने वाले एक कलयुगी पिता को अदालत ने अंतिम सांस तक जेल में रहने की सजा दी है। विशेष न्यायाधीश सोनाली शर्मा ने फैसले के दौरान भावुक टिप्पणी करते हुए पीड़िता को ‘आज की निर्भया’ बताया, जिसने अपनों के खिलाफ जाकर सत्य की लड़ाई लड़ी। आगे कहा कि पिता के विश्वासघात ने बेटी की खुशियाँ बुझा दी थीं, लेकिन उसके साहस ने न्याय के दरवाजे खोल दिए।

गुना जिले से न्याय की एक ऐसी मिसाल सामने आई है, जहाँ एक नाबालिग बेटी ने समाज और परिवार के दबाव को दरकिनार कर अपने ही दरिंदे पिता को सलाखों के पीछे पहुँचाया। मामला जिले के म्याना इलाके का है, जहाँ 2024 में एक 12 साल की मासूम ने अपने पिता के खिलाफ थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। पीड़िता ने बताया कि वह कुल आठ भाई-बहन हैं। उसका सबसे बड़ा भाई वर्तमान में जेल में है, जबकि उससे छोटा एक और भाई है। वह स्वयं परिवार में तीसरे नंबर पर है। उसके बाद तीन छोटी बहनें और दो छोटे भाई हैं। उसने यह भी जानकारी दी कि उसके पिता शराब के आदी हैं

पीड़िता के अनुसार, गर्मियों के दौरान शराबी पिता और मां के बीच झगड़ा हुआ था, इसके बाद मां घर छोड़कर चली गई। इसी का फायदा उठाकर पिता ने मासूम बेटी को हवस का शिकार बनाया। चिल्लाने पर मुंह दबाया। धमकी और डर के साये में यह सिलसिला 5-6 महीनों तक चलता रहा। जब माँ वापस लौटी, तो पीड़िता ने अपनी आपबीती सुनाई, लेकिन दरिंदगी की हद तब पार हो गई जब एक खेत में मजदूरी के दौरान पिता ने फिर से बेटी के साथ गलत काम किया और विरोध करने पर उसे बुरी तरह पीटा।नाबालिग ने बताया कि जब उसकी मां मामा के घर से वापस आई, तब उसने पिता की सारी करतूत उन्हें बताई। इस पर मां ने उसे दिलासा दिया कि अगर पिता ने दोबारा ऐसी कोई हरकत की, तो वे पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराएंगे।

मामले में नाबालिग अपनी माँ के साथ थाने पहुँची थी, और पिता के खिलाफ FIR दर्ज कराई। पुलिस ने दुष्कर्म और POCSO Act के तहत मामला दर्ज कर आरोपी पिता को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने कोर्ट में चालान पेश किया।

माँ के मुकरने पर भी नहीं डरी बेटी

इस केस की सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि सुनवाई के दौरान पीड़िता की माँ अपने बयानों से मुकर गई। माँ ने अपनी बेटी पर भी दबाव बनाया कि वह पिता को बचा ले, लेकिन पीड़िता अपने बयान पर अडिग रही। उसने चतुराई से जज और वकीलों से कहा कि उसकी माँ को यह बताया जाए कि उसने पिता के पक्ष में गवाही दी है, ताकि घर पर उसे प्रताड़ित न किया जाए। अभियोजन की ओर से ADPO ममता दीक्षित ने पैरवी की, जहाँ DNA रिपोर्ट ने आरोपी के खिलाफ सबसे पुख्ता सबूत पेश किया।

कोर्ट ने सुनाया फैसला

गुना की विशेष अदालत ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए न केवल कठोर सजा सुनाई, बल्कि समाज और रिश्तों के गिरते स्तर पर एक गहरी टिप्पणी भी की।पॉक्सो (POCSO) मामलों की विशेष न्यायाधीश सोनाली शर्मा ने फैसला सुनाते हुए आरोपी पिता को दोषी करार दिया और आदेश दिया कि अपराधी अपनी आखिरी सांस तक जेल की सलाखों के पीछे ही रहेगा। माँ के मुकरने के बाद वैज्ञानिक साक्ष्यों (DNA) ने साबित किया कि आरोपी ही असली गुनहगार है।

न्यायाधीश की  टिप्पणी

फैसला सुनाते समय न्यायाधीश ने पीड़िता के साहस की सराहना करते हुए कहा:

“एक बेटी का बचपन बार-बार भरोसे के टूटने से सिसकता रहा। पिता के विश्वासघात ने उसकी हर खुशी को बुझा दिया था। वह टूटी थी, अपनों से हारी थी, पर बिखरी नहीं और जब उसने सच की रोशनी और अटल साहस से न्याय के दरवाजे को खटखटाया, तब न्यायालय ने एक और निर्भया को इंसाफ दिलाया।”

कोर्ट ने केवल सजा ही नहीं सुनाई, बल्कि पीड़िता के भविष्य और पुनर्वास को ध्यान में रखते हुए 5 लाख रुपये की प्रतिकर राशि (Compensation) भी स्वीकृत की है।

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