1074 नव आरक्षक सायबर वॉरियर के तौर पर करेंगे काम, थानों की सायबर हेल्प डेस्क पर हो सकते हैं तैनात

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1074 नव आरक्षक सायबर वॉरियर के तौर पर करेंगे काम, थानों की सायबर हेल्प डेस्क पर हो सकते हैं तैनात

भोपाल: राज्य में प्रशिक्षण ले रहे 4000 से अधिक ट्रेनी पुलिस कांस्टेबलों में से 1074 को सायबर वॉरियर के रूप में काम करने के लिए योग्य पाया गया है। ट्रैनिंग पूरी होने के बाद ये चयनित जवान प्रदेश भर में साइबर अपराधों की जांच और शुरूआती कार्रवाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
पुलिस आरक्षक ट्रैनिंग में पहली बार इस तरह की ट्रैनिंग और कोर्स करवाएं गए हैं, इसके बाद इनका चयन किया गया है। ट्रैनिंग पूरी होने के बाद इन्हें थानों की साबयर हेल्प डेस्क पर तैनात किए जाने की कवायद चल रही है, ताकि सायबर संबंधी अपराधों में पीड़ित को तत्काल सहायता मिल सके।
प्रदेश के नौ पुलिस ट्रेनिंग स्कूलों में वर्तमान में चार हजार के लगभग नव आरक्षक प्रशिक्षण ले रहे हैं। पहली बार इन ट्रेनी कांस्टेबलों के लिए 20 दिन का विशेष सायबर क्राइम कोर्स तैयार किया गया था, जिसका उद्देश्य उन्हें आधुनिक अपराधों की चुनौतियों के अनुरूप प्रशिक्षित करना है। अब तक पुलिस बल का बड़ा हिस्सा सायबर अपराधों की जांच में दक्ष नहीं था और उन्हें विशेषज्ञों की मदद लेनी पड़ती थी, लेकिन इस नई पहल से थानों के स्तर पर ही प्रशिक्षित कर्मी उपलब्ध हो सकेंगे।
इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत कांस्टेबलों को सायबर अपराध की मूल समझ से लेकर तकनीकी और कानूनी पहलुओं तक की जानकारी दी गई। उन्हें फर्स्ट रिस्पॉन्डर के तौर पर काम करने, आईटी एक्ट की बारीकियों को समझने, डिजिटल साक्ष्य जुटाने और सुरक्षित रखने की प्रक्रिया सिखाई गई। साथ ही आईपी ट्रैकिंग, बैंकिंग सिस्टम, पेमेंट गेटवे, यूपीआई और नेट बैंकिंग से जुड़े फ्रॉड की जांच की तकनीकें भी बताई गई। ।
प्रशिक्षण में सरकारी पोर्टलों जैसे संचार साथी और वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े सिस्टम की जानकारी भी शामिल रही। प्रैक्टिकल और फील्ड वर्क के दौरान ट्रेनी को वास्तविक सायबर मामलों के सिमुलेशन के जरिए जांच की प्रक्रिया समझाई गई, जबकि अंत में केस डायरी तैयार करने और अदालत में साक्ष्य प्रस्तुत करने की प्रक्रिया का भी प्रशिक्षण दिया गया।
अफसरों का मानना है कि सायबर वॉरियर के चयन के लिए आयोजित परीक्षा काफी प्रतिस्पर्धी रही और कम्प्यूटर जागरूकता एवं सायबर सुरक्षा कोर्स पूरा करने के बाद ही अभ्यर्थियों का मूल्यांकन किया गया। ऐसा माना जा रहा है कि चयन मानकों में थोड़ी और छूट दी जाती, तो लगभग 2500 अभ्यर्थी इस श्रेणी के लिए योग्य हो सकते थे।