26th Day of ASI Survey : सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश के बाद भी भोजशाला में खुदाई पर मुस्लिम पक्ष को आपत्ति! 

मुस्लिम प्रतिनिधि अब्दुल समद ने ASI के सामने सवाल उठाया!

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26th Day of ASI Survey : सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश के बाद भी भोजशाला में खुदाई पर मुस्लिम पक्ष को आपत्ति! 

Dhar : भोजशाला में आज मंगलवार को 26वें दिन भी एएसआई की टीम का सर्वे जारी रहा। आधुनिक उपकरणों के साथ टीम सुबह 8 बजे भोजशाला परिसर पहुंची। टीम के साथ 28 मजदूर भी शामिल हुए। सर्वे टीम के साथ याचिकाकर्ता आशीष गोयल एवं गोपाल शर्मा तथा मुस्लिम पक्ष के अब्दुल समद भोजशाला में दाखिल हुए। सुरक्षा की दृष्टि से भोजशाला परिसर के आसपास पुलिस बल तैनात है। मंगलवार होने से हिंदू श्रद्धालु भोजशाला के पूजा अर्चना के बाद हनुमान चालीसा का पाठ भी किया। इस दौरान बड़ी संख्या में हिंदू श्रद्धालु के साथ महिलाएं मौजूद रही।

सर्वे को लेकर हिंदुओं में उत्साह 

हिंदू पक्ष के प्रतिनिधि गोपाल शर्मा ने कहा कि आज मंगलवार सत्याग्रह का दिन था। एएसआई का जो सर्वे चल रहा है, उसे लेकर हिंदुओं में उत्साह है और इसलिए आज संख्या अधिक थी। सत्याग्रह पूर्ण हुआ, सर्वे चल रहा है। सभी तरह के अंश निकलते हैं। क्या निकला है यह तो सर्वे टीम बताएगी कि क्या निकला है और कब की है। क्योंकि, रोज ही कुछ न कुछ तो निकल रहा है वह तो सर्वे टीम बता पाएगी। उन्होंने कहा कि भोजशाला में स्थाई क्लिनिक बनाया जाना चाहिए। क्योंकि, यहां अधिक संख्या में मजदूर है और सर्वेयर भी है। गर्मी का समय है, इसलिए स्वास्थ्य की चिंता को लेकर स्थाई क्लिनिक की मांग की गई है। किसी को चोट भी लग सकती है इसलिए व्यवस्था की जाए।

अदालत के निर्देश के बावजूद खुदाई क्यों 

कमाल मौलाना वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष अब्दुल समद ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि उच्च न्यायालय ने जो आदेश दिया था, उसके बाद जो उच्चतम न्यायालय ने आदेश दिया, उसके तहत जो भी कार्य चल रहा है। एएसआई उसमें पूरा टाइम दे रहा है। अधिकारी उपस्थित होकर अपने तरीके से व्यू निकल रहे हैं। लेकिन, हमारे पिछले 5 दिनों से जो एक आपत्ति थी खुदाई और स्ट्रेचिंग को लेकर कि आप लोग इसको धीरे-धीरे खोदते-खोदते करीब करीब 1 फीट नीचे उतर गए हैं, तो यह क्या खुदाई में नहीं आता। हमने उनसे पूछा गया था उसका हमें उत्तर अभी तक नहीं मिला। यह एक बहुत बड़ा प्रश्न है अगर उनमें से कुछ चीज निकल रही है स्ट्रेचिंग में तो आप लोग क्या उसको यह दर्शाएंगे कि हमने स्मारक में खुदाई की या मानव में स्ट्रेचिंग किया।

स्मारक में किसी तरह का बदलाव नहीं किया, एक फर्श में एक तरह का बड़ा बदलाव आया है। स्ट्रेचिंग के बाद हमारे समाज की और हमारी तरफ से सबसे बड़ी आपत्ति थी, उसका अभी तक कोई निराकरण नहीं हुआ.पिछले 5 दिन पहले हमने लिखित में भी दे दी थी मौखिक में भी बता दिया था। दो अधिकारी हमारे बीच नहीं है। आलोक सर नहीं है, हो सकता है वह आ जाए उसके बाद कोई निराकरण होगा। यही निवेदन आज भी रहेगा। जहां तक एक मूर्ति की बात है तो ऐसा कुछ भी नहीं है। एक बाय डेढ़ का एक पत्थर निकला था, जिसमें आकृति नुमा बौद्ध धर्म का कुछ बना था। यहां जो भी समाज के हमारे पुराने पेटीशनर थे 2011 में जो पिटीशन लगी थी 2013 में भी लगी थी उनकी तरफ से भी उनका हवाला दिया गया था।     यहां पर जो भी स्ट्रक्चर बना है, उसके लिए कहीं न कहीं रॉ मैटेरियल लाया गया है। बौद्ध धर्म बहुत पुराना है और जो भी धर्म रहा है मुस्लिम धर्म बाद में आया। 1300 ई में आया है। बाबा कमाल आए उसके बाद से यहां पर हमारे धर्म का  फैलाव हुआ है। यहां पर गाइडेंस और शिक्षाएं दी। हमारी आपत्ति यही है कि जब खुदाई बंद है, तो उच्चतम न्यायालय ने गाइडेंस दे रखा है तो आप उसे हिसाब से काम करिए। उससे हम संतुष्ट थे। लेकिन, पिछले 5 दिन से आप जो स्ट्रेचिंग कर रहे हैं, उसमें जो निकल रहा है, उसे क्या दर्शाएंगे यह बहुत बड़ा प्रश्न है।