देवगढ़ के 82 बच्चे साल भर स्कूल और पढ़ाई से रहे दूर, अब कई हुए परीक्षा से वंचित

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देवगढ़ के 82 बच्चे साल भर स्कूल और पढ़ाई से रहे दूर, अब कई हुए परीक्षा से वंचित

बड़वानी : प्रदेश भर में शुक्रवार से कक्षा 5 की परीक्षाएं शुरू हो गयीं, लेकिन बड़वानी जिले के पाटी विकासखंड अंतर्गत देवगढ़ ग्राम पंचायत के खेड़ी फलिया में हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। इस दूरस्थ आदिवासी बस्ती के 82 बच्चे पूरे शैक्षणिक सत्र में स्कूल पहुंचने के जोखिम भरे रास्ते के चलते न तो स्कूल जा सके और न ही उनमें से कुछ पांचवी की परीक्षा दे सके।

जिला मुख्यालय से करीब 55 किलोमीटर दूर स्थित खेड़ी फलिया में लगभग 40 परिवार निवास करते हैं। यहां 6 से 14 वर्ष आयु वर्ग के 82 बच्चे हैं, लेकिन बस्ती में कोई प्राथमिक विद्यालय नहीं है। स्कूल बैग और किताबों की जगह ये बच्चे दिनभर जंगल में मवेशी चराने, खेती-किसानी में हाथ बंटाने या गिल्ली-डंडा और कंचे जैसे पारंपरिक खेल खेलने में समय बिताते हैं।

ग्रामीण मोहन और किराशा बताते हैं कि नजदीकी प्राथमिक स्कूल करीब 4 किलोमीटर दूर है, रास्ता घने जंगल और नाले से होकर गुजरता है। बरसात के मौसम में यह मार्ग और भी दुर्गम हो जाता है। जंगली जानवरों का भय और सुनसान रास्ता होने के कारण अभिभावक छोटे बच्चों को भेजने से कतराते हैं।

कई बच्चे कभी स्कूल में नामांकित ही नहीं हुए, जबकि कुछ ने दूरी और असुरक्षित रास्ते के कारण धीरे-धीरे पढ़ाई छोड़ दी। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने जनप्रतिनिधियों और शिक्षा विभाग से कई बार गांव में प्राथमिक स्कूल खोलने की मांग की, लेकिन अब तक न सर्वे हुआ और न ही कोई ठोस कदम उठाया गया। ग्रामीणों का कहना है कि यदि फलिया में ही स्कूल खुल जाए तो बच्चे नियमित रूप से पढ़ाई करेंगे।

उन्होंने बताया कि कुछ बच्चे कक्षा 5 में पंजीकृत थे ,लेकिन साल भर स्कूल न जाने के चलते कुछ भी तैयारी नहीं हो सकी और वे कल शुरू हुई परीक्षा में शामिल नहीं हुए।

पाटी विकासखंड के बीआरसी दिनेश चौहान ने ग्रामीणों की बात का समर्थन करते हुए बताया कि 18 फरवरी को इस संबंध में एक रिपोर्ट जिला परियोजना समन्वयक, सर्व शिक्षा अभियान बड़वानी को भेजी गई है। रिपोर्ट में 6 से 14 वर्ष आयु वर्ग के 82 बच्चों के शिक्षा से वंचित होने का उल्लेख है। एक अन्य अधिकारी में बताया कि बच्चों को बोकराटा स्थित आश्रम स्कूल में रहने का विकल्प दिया गया था, लेकिन अभिभावकों ने सुरक्षा कारणों और स्थानीय स्तर पर स्कूल की मांग को प्राथमिकता देते हुए इसे स्वीकार नहीं किया।

प्रभारी जिला परियोजना समन्वयक एवं प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी अशरफ खान ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में है। कई बच्चे स्कूल में नामांकित हैं, लेकिन दूरी और असुरक्षित मार्ग के कारण नियमित रूप से नहीं पहुंच पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वार्षिक कार्ययोजना में विद्यार्थियों के लिए परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने का प्रस्ताव शामिल किया जा रहा है। साथ ही, जिले के दो-तीन अन्य स्थानों पर भी ऐसी स्थिति होने की जानकारी मिली है।

पूरे शैक्षणिक सत्र के नुकसान के बाद अब ग्रामीण प्रशासन से शीघ्र हस्तक्षेप की उम्मीद लगाए बैठे हैं, ताकि खेड़ी फलिया के 82 बच्चों को भी शिक्षा का अधिकार मिल सके और वे दोबारा कक्षाओं तक पहुंच सकें।