
पढ़ना जारी रखें
इन्हीं आस्थाओं और मान्यताओं को लेकर यहां पर भक्त उमड़ पड़ते हैं और घंटों इंतजार कर अपना रुपया सोना-चांदी तथा स्वर्ण आभूषण यहां जमा करते हैं। दीपावली के मौके पर इस मंदिर की सजावट आंखें चौंधियाने वाली होती है। हां प्रतिवर्ष सजावट के लिए करोड़ों रुपए नकदी और कई किलो सोना सजावट में इस्तेमाल होता है।
*आभूषणों और नकदी का हिसाब*
इस मंदिर को लेकर मान्यता है कि धनतेरस से लेकर दीपावली के बीच माता महालक्ष्मी के चरणों में और उनके दरबार में जो कुछ चढ़ाया जाता है, उसमें बरकत रहती है। इसलिए भक्त अपना सोना-चांदी लेकर पहुंचते हैं और उसे माता के चरणों में चढ़ाते हैं। ऐसा करने से उनके यहाँ सालभर सुख-समृद्धि रहती है। दीपावली पर्व समाप्त हो जाने पर भक्तों को उनका सोना-चांदी और रुपया वापस कर दिया जाता है। जो भक्त यहां स्वर्ण आभूषण और नकदी लेकर आते हैं, बकायदा उसका हिसाब-किताब रखा जाता है। इसके लिए उनके पहचान पत्र और अन्य दस्तावेज जमा कराए जाते हें.और लौटाते समय पुनः कागजी कार्यवाही पूरी होती है।
*प्रशासन के पुख्ता इंतजाम*
जिला प्रशासन का इस मंदिर की व्यवस्थाओं को अपने कमांड में रखता है। एसडीएम और तहसीलदार यहां व्यवस्थाओं पर नजर लगाए रखते हैं। जिसका मुख्य कारण यह मंदिर ‘कोर्ट ऑफ वार्ड्स’ के अधीन है और ऐसे मंदिरों की व्यवस्था जिला प्रशासन देखता है। इस दौरान यह मंदिर सीसीटीवी कैमरों और पुलिस के सख्त पहरे में रहता है। मंदिर की नोटों से सजावट का सिलसिला शुरू हो चुका है। पिछले वर्षों से यहां कोरोना महामारी के चलते भक्तों का मंदिर परिसर में आना निषेध हैं, वे बाहर से ही दर्शन कर सकेंगे।
