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पिछले पांच सालों में कांग्रेस के सात में से चार विधायकों – इमरान मसूद, मसूद अख्तर, अदिति सिंह और राकेश सिंह – ने पार्टी छोड दी। पांचवें विधायक सुहैल अख्तर अंसारी पिछले कई हफ्ते से पार्टी से दूरी बना कर चुप्पी साधे हुए हैं। केवल दो विधायक – अजय कुमार लल्लू और अनुराधा मिश्रा – ही कांग्रेस में बचे हुए हैं। लल्लू तो प्रदेश अध्यक्ष भी हैं। चुनाव घोषणा के बाद आर पी एन सिंह और प्रियंका मौर्य ने भी कांग्रेस को अलविदा कह दिया। मौर्य तो कांग्रेस की बहुप्रचारित ‘लड़की हूं लड सकती हूं’ अभियान की पोस्टर गर्ल थी।
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस तीन दशकों से अधिक समय से सत्ता से बाहर है। इस लंबी अवधि में हाईकमान ने पार्टी की ओर कोई ध्यान नहीं दिया। नतीजा यह हुआ कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस आधार खोती गई। संगठन भी नाम का ही बचा है।
प्रियंका गांधी अब मानतीं है कि 2017 में सपा के साथ चुनाव लडना भूल थी। बहरहाल, दो विधायकों के सहारे उत्तर प्रदेश की 403 सीटों पर उम्मीदवारों को खड़ा करना, बूथ स्तर पर दल की उपस्थिति दर्ज कराना और राज्य भर में पार्टी को चुनावों के समय खड़ा करना सच में एक बड़ी चुनौती है।