
Bhagirathpura Contaminated Water Incident: इंदौर जैसी त्रासदी फिर ना हो दोबारा,पानी की मुख्य और सीवर लाइन के बीच 3 मीटर की दूरी जरूरी
🔺कीर्ति राणा
इंदौर। भागीरथपुरा में दूषित जल से हुई अकाल मौतों जैसी त्रासदी इंदौर सहित अन्यत्र कहीं ना हो इसके स्थायी प्रबंध के लिए होल्कर साइंस कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ राम श्रीवास्तव ने कुछ सुझाव दिए हैं।उनका कहना है भागीरथपुरा कांड में पानी की मुख्य पाईप लाइन और सीवर लाइन पास-पास होना मुख्य कारण सामने आया है। इंदौर प्रशासन को पूरे शहर की वॉटर और सीवर लाइन का गहन सर्वे कराना चाहिए ताकि ऐसी गलती कहीं और नजर आए तो उसकी रोकथाम की जा सके। डॉ श्रीवास्तव का सुझाव है कि पानी की मुख्य लाइन और सीवर लाइन के बीच कम से कम दस फीट (तीन मीटर) की दूरी रखना जरूरी है, ऐसा करने पर यदि किन्हीं कारणों से दोनों लाइनों में यकायक लीकेज की स्थिति बन भी जाए या यह त्रुटि तत्काल पकड़ में नहीं आए तब भी जनहानि-अकाल मौत जैसे हालात तो नहीं बनेंगे।

भागीरथपुरा त्रासदी में अब तक जो तथ्य सामने आए हैं उसके आधार पर कहा जा सकता है बहुत पहले से सीवेज के पानी की नर्मदा जल में आना और उस पर त्वरित कार्यवाही नहीं होना निश्चित ही लापरवाही का प्रमाण है।
🔹सीवेज लाइन बिछाने वाले विभाग और नर्मदा पाईप लाइन डालने वाले विभाग अलग अलग होते हैं उनमें कोआर्डिनेशन की कमी रहती है।इस कारण सीवेज लाईन ऊपर बिछा दी गई है और पीने के पानी की मेन लाईन अधिकांश जगह नीचे रहती है।
डॉ श्रीवास्तव का कहना है चौबीस घंटे पेयजल की सप्लाय हो और हर घर-हर नल पर मीटर वाली व्यवस्था हो तो ऐसी अप्रिय स्थिति में भी पानी जहरीला होने जैसे हालात नहीं बनेंगे। पीने का पानी दो दिन में एक दिन एक घंटे के लिए दिया जाता है,बाकी समय पाइप लाईन खाली रहती है।इससे निगेटिव प्रेशर पैदा होता है जो बाहर प्रदूषित मिट्टी में फैली गंदगी को भीतर खींच लेता है।
अगर स्थानीय रहवासियों को शुद्ध पेयजल वितरित करना है तो भूमिगत पाइप लाईनों को खाली नहीं रखना चाहिए।अर्थात पानी की सप्लाय चौबीसों घण्टे करना होगी । सीवेज और पीने के पानी की लाइनों के बीच न्यूनतम दूरी आमतौर पर क्षैतिज रूप से 10 फीट होती है, कुछ नियमों के अनुसार ऊर्ध्वाधर रूप से 18 इंच की दूरी (सीवर के ऊपर पानी की लाइन) आवश्यक होती है, लेकिन यह स्थानीय नियमों, मिट्टी की स्थितियों और पाइपों के एक दूसरे को पार करने या समानांतर चलने के आधार पर भिन्न हो सकती है; विशिष्ट नियमों के लिए हमेशा अपने स्थानीय स्वास्थ्य या सार्वजनिक निर्माण विभाग से परामर्श लें, क्योंकि मानक भूजल प्रदूषण कोरोकने को सुनिश्चित करते हैं ।
प्रमुख पृथक्करण मानक:
•क्षैतिज पृथक्करण: एक सामान्य मानक के अनुसार, पानी की मुख्य पाइपलाइन और सीवर लाइनों के बीच की दूरी 10 फीट (3 मीटर) होती है, जिसे किनारे से किनारे तक मापा जाता है।
•ऊर्ध्वाधर पृथक्करण (क्रॉसिंग): जब पाइप एक दूसरे को काटते हैं, तो सीवर पाइप का ऊपरी सिरा (क्राउन) पानी की लाइन के निचले सिरे (इनवर्ट) से कम से कम 18 इंच नीचे होना चाहिए।
•समानांतर लाइनें: समानांतर लाइनों के लिए, कुछ नियमों के तहत कम से कम 4 फीट क्षैतिज और 2 फीट ऊर्ध्वाधर (सीवर के ऊपर पानी) की अनुमति दी जा सकती है, जिसमें 150पीएसआई रेटेड पाइप जैसी विशिष्ट पाइप सामग्री की आवश्यकताएं शामिल हैं।
•वैकल्पिक तरीके: यदि मानक पृथक्करण संभव नहीं है, तो विकल्पों में सीवर पाइप को कंक्रीट में बंद करना या क्रॉसिंग के चारों ओर एक निर्दिष्ट दूरी के लिए सीलबंद आवरण का उपयोग करना शामिल है।
🔹महत्वपूर्ण विचारणीय बिंदु:
स्थानीय नियम-नियम और कानून स्थान (राज्य, काउंटी, शहर) के अनुसार और निजी बनाम सार्वजनिक प्रणालियों के लिए काफी भिन्न होते हैं।
मिट्टी और परिस्थितियाँ-मिट्टी का प्रकार, जलस्तर की गहराई और भूमि की ढलान आवश्यक दूरी को प्रभावित कर सकती हैं।
सेप्टिक सिस्टम-इनके लिए सख्त नियम होते हैं, जिनमें अक्सर कुओं से 50-100 फीट या उससे अधिक की दूरी की आवश्यकता होती है। सीवेज लाइन में लीकेज मुख्य रूप से पुरानी पाइपलाइनों, खराब स्थापना और बाहरी दबावों के कारण होता है। ये समस्याएं विशेष रूप से भारत जैसे क्षेत्रों में आम हैं, जहां हालिया इंदौर घटना में सीवेज का पीने के पानी में मिलना इसी का उदाहरण है।
🔹मुख्य कारण

खराब स्थापना-अनुचित जोड़, अपर्याप्त सपोर्ट या गलत ढलान से पाइप फट जाते हैं।
पेड़ों की जड़ें-जड़ें नमी की तलाश में पाइपों में घुसकर दरारें पैदा करती हैं।
जंग या क्षरण-पुरानी मटेरियल (जैसे कास्ट आयरन) मिट्टी की अम्लता या रसायनों से खराब हो जाती है।
🔹अन्य कारक
रुकावटें-ग्रीस, कचरा जमा होने से दबाव बढ़ता है, जो लीक का कारण बनता है।
मिट्टी का हिलना-बारिश, सूखा या निर्माण से पाइप टूट सकते हैं।
उम्रदराज इंफ्रास्ट्रक्चर-पुरानी सीवेज सिस्टम पहनाव से लीक हो जाती हैं।
पोर्सलीन (या विट्रिफाइड क्ले) सीवेज पाइप मजबूत और रासायनिक प्रतिरोधी होते हैं, लेकिन लंबे समय तक सुरक्षित रहने की उनकी क्षमता सीमित है। ये आमतौर पर 50-100 वर्ष तक चल सकते हैं, पर जड़ों, मिट्टी हलचल और क्षरण से प्रभावित होते हैं।
🔹मजबूती के गुण
टिकाऊ सामग्री-उच्च दबाव सहन करने वाले, जंग मुक्त और एसिड प्रतिरोधी।
उपयोगी जीवन-औसतन 60 वर्ष, मिट्टी के पाइपों के समान।
कम रखरखाव-चिकनी सतह से रुकावट कम।
🔹कमजोरियां
भंगुरता-प्रभाव से आसानी से टूट सकते हैं।
जड़ घुसपैठ-जोड़ों से जड़ें अंदर घुस सकती हैं।
पुरानी लाइनों में लीक-इंदौर जैसी समस्याएं इसी से जुड़ी हैं।
पोर्सलीन (विट्रिफाइड क्ले) पाइपों की विफलता मुख्य रूप से उनकी भंगुर प्रकृति और पर्यावरणीय कारकों से होती है। ये पाइप मजबूत होते हैं लेकिन लंबे समय में कई समस्याओं का शिकार हो जाते हैं।
🔹प्रमुख विफलता कारण
जड़ों की घुसपैठ : पेड़-पौधों की जड़ें जोड़ों से अंदर घुसकर पाइप तोड़ देती हैं। मिट्टी का दबाव : भूस्खलन या मिट्टी हिलने से क्रैक पड़ जाते हैं। जोड़ों की कमजोरी-पुराने जोड़ ढीले होकर लीकेज का कारण बनते हैं। भंगुर टूटना : भारी भार या प्रभाव से आसानी से फट जाते हैं। क्षरण : अम्लीय मिट्टी या रसायनों से सतह खराब होती है।
उम्र-50+ वर्ष बाद सामान्य घिसाव से विफल।
नियमित निरीक्षण से इनकी आयु बढ़ाई जा सकती है।
यहां जहरीला पानी मौत का कारण लेकिन कई देश सीवेज के पानी को रीसाईकिल कर के पीने योग्य बना रहे
कैसी बिडम्बना है कि दुनिया में ऐसे कई देश हैं जो सीवेज के पानी को रीसाईकिल करके पीने के काम में ले रहे हैं और हम उससे लोगों की हत्या कर रहे हैं।

सिंगापुर, नामीबिया, ऑस्ट्रेलिया, इज़राइल, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त राज्य अमेरिका (विशेष रूप से कैलिफ़ोर्निया और टेक्सास)जैसे देश जल संकट से निपटने के लिए पीने के पानी का रीसाइक्लिंग करके (पुनर्चक्रित) उपयोग में अग्रणी हैं। ये देश सिंगापुर के न्यू वॉटर जैसे उन्नत उपचार संयंत्रों का उपयोग करके अपशिष्ट जल को सुरक्षित और उच्च गुणवत्ता वाले पेयजल में परिवर्तित करते हैं। पीने योग्य पुन: उपयोग के रूप में जानी जाने वाली यह प्रक्रिया भूजल, जलाशयों को भरती है या सीधे पेयजल आपूर्ति में प्रवेश करती है। नामीबिया 1960 के दशक से इस क्षेत्र में अग्रणी रहा है।
🔹प्रमुख उदाहरण
सिंगापुर-एक वैश्विक अग्रणी देश, जो उन्नत निस्पंदन और यूवी कीटाणुशोधन का उपयोग करके उच्च गुणवत्ता वाले उपचारित पुनर्चक्रित जल (एनईवाटर) का उत्पादन करता है, जो इसकी मांग के महत्वपूर्ण हिस्से को पूरा करता है।
नामीबिया (विंडहोक)-यह देश पीने योग्य पानी के सीधे पुन: उपयोग में अग्रणी है और अपनी शुष्क परिस्थितियों के कारण उपचारित अपशिष्ट जल से राजधानी के पानी का एक बड़ा हिस्सा प्रदान करता है।
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