Kissa-A-IAS: UPSC Topper IAS Ishita Kishore: पिता की शहादत, मां के संघर्ष और बेटी के संकल्प की प्रेरक कहानी 

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Kissa-A-IAS: UPSC Topper IAS Ishita Kishore: पिता की शहादत, मां के संघर्ष और बेटी के संकल्प की प्रेरक कहानी 

सुरेश तिवारी

यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा केवल ज्ञान की परीक्षा नहीं होती। यह धैर्य, आत्मबल, अनुशासन और जीवन की सबसे कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ते रहने की परीक्षा होती है। हर साल लाखों युवा UPSC सिविल सेवा परीक्षा में बैठते हैं, लेकिन इतिहास में अपना नाम वही दर्ज कर पाते हैं जो हालातों से हार नहीं मानते। ऐसी ही एक कहानी है IAS इशिता किशोर की, जिन्होंने न केवल UPSC 2022 में ऑल इंडिया रैंक 1 हासिल की, बल्कि यह साबित किया कि अगर इरादे मजबूत हों तो पिता की शहादत का दर्द भी सफलता की नींव बन सकता है।

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*● जब बचपन ने बहुत जल्दी जिम्मेदारी सिखा दी*

इशिता किशोर का जन्म एक अनुशासित और राष्ट्रसेवा को सर्वोपरि मानने वाले परिवार में हुआ। उनके पिता भारतीय वायुसेना में विंग कमांडर के पद पर तैनात थे। देश की सेवा करते हुए वे ऑन ड्यूटी शहीद हो गए। यह वह क्षण था जिसने इशिता के जीवन की दिशा बदल दी। जिस उम्र में बच्चे सुरक्षित भविष्य का सपना देखते हैं, उस उम्र में इशिता ने जीवन की सबसे कठोर सच्चाई देखी।

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पिता के जाने के बाद घर की जिम्मेदारी मां के कंधों पर आ गई। मां एक शिक्षिका थीं। सीमित संसाधन, भावनात्मक आघात और सामाजिक चुनौतियों के बीच उन्होंने अपनी बेटी को कभी यह महसूस नहीं होने दिया कि वह कमजोर है। मां ने पढ़ाई को ही सबसे बड़ा हथियार बनाया और यही संस्कार इशिता किशोर के जीवन का आधार बने।

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*● संघर्षों के बीच शिक्षा का मजबूत आधार*

इशिता ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा दिल्ली के एयरफोर्स बाल भारती स्कूल से पूरी की। पढ़ाई के साथ-साथ वे खेलकूद में भी सक्रिय रहीं। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर फुटबॉल खेला और सुब्रतो कप जैसी प्रतिष्ठित प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया। यह अनुभव उनके व्यक्तित्व में टीम वर्क, अनुशासन और नेतृत्व क्षमता का विकास करता गया।

इसके बाद उन्होंने देश के प्रतिष्ठित श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से अर्थशास्त्र में स्नातक की पढ़ाई की। कॉलेज के दिनों में भी वे केवल किताबी छात्र नहीं रहीं, बल्कि सामाजिक मुद्दों, समसामयिक घटनाओं और सार्वजनिक जीवन को समझने में रुचि रखती थीं। यही रुचि धीरे-धीरे उन्हें भारतीय प्रशासनिक सेवा की ओर ले जाने लगी।

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*● कॉर्पोरेट करियर और भीतर का असंतोष*

पढ़ाई पूरी करने के बाद इशिता किशोर ने एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में नौकरी शुरू की। अच्छी सैलरी, सुरक्षित भविष्य और आरामदायक जीवन सब कुछ उनके पास था। लेकिन भीतर कहीं एक खालीपन था। पिता की शहादत और मां के संघर्ष ने उनके भीतर यह भावना जगा दी थी कि जीवन केवल व्यक्तिगत सफलता के लिए नहीं है।

उन्होंने महसूस किया कि नीति निर्माण और प्रशासन के जरिए समाज के लिए कुछ बड़ा किया जा सकता है। यही सोच उन्हें UPSC की कठिन और लंबी तैयारी की राह पर ले आई।

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*● असफलताएं, जो रास्ता दिखाती हैं*

इशिता किशोर की UPSC यात्रा में सफलता पहली ही कोशिश में नहीं मिली। शुरुआती दो प्रयासों में वे प्रीलिम्स भी पार नहीं कर सकीं। यह वह दौर था जब कई उम्मीदवार तैयारी छोड़ देते हैं। लेकिन इशिता ने इन असफलताओं को अपनी कमजोरी नहीं बल्कि सीख का माध्यम बनाया।

उन्होंने उत्तर लेखन, सीमित स्रोतों से रिवीजन और आत्ममूल्यांकन पर विशेष ध्यान दिया। यही रणनीति आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी ताकत बनी।

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*● तीसरा प्रयास और ऐतिहासिक सफलता*

तीसरे प्रयास में इशिता किशोर ने पूरी रणनीति और आत्मविश्वास के साथ UPSC परीक्षा दी। मुख्य परीक्षा में उनके उत्तरों में स्पष्टता, संतुलन और संवेदनशीलता साफ झलकती थी। राजनीति विज्ञान और अंतरराष्ट्रीय संबंध उनके वैकल्पिक विषय थे।

साक्षात्कार में भी उनका दृष्टिकोण, परिपक्वता और जीवन अनुभव निर्णायक साबित हुआ। परिणाम आया और उन्होंने UPSC 2022 AIR 1 हासिल कर इतिहास रच दिया।

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*● IAS बनने के बाद प्रशासनिक यात्रा की शुरुआत*

UPSC में टॉप करने के बाद इशिता किशोर का चयन भारतीय प्रशासनिक सेवा में हुआ। इसके बाद उन्होंने लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी, मसूरी में IAS आधारभूत प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें भारतीय संविधान, प्रशासनिक कानून, नीति निर्माण, वित्तीय प्रबंधन और जनसेवा आधारित प्रशासन का व्यावहारिक दृष्टिकोण सिखाया जा रहा है। यह प्रशिक्षण उन्हें भविष्य की प्रशासनिक जिम्मेदारियों के लिए तैयार करने की प्रक्रिया का अहम चरण है।

इशिता को अपना गृह राज्य उत्तर प्रदेश कैडर आवंटित हुआ। ट्रेनिंग पूरी करने के बाद सबसे पहले उन्हें जौनपुर का सहायक कलेक्टर बनाया गया। वर्तमान में वे बरेली में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट है।

*मां के संघर्ष और त्याग की भी कहानी*

IAS इशिता किशोर की इस सफलता के पीछे सबसे बड़ा योगदान उनकी मां का है। जिन्होंने हर परिस्थिति में बेटी का हौसला बनाए रखा। यह कहानी एक IAS अधिकारी के साथ-साथ एक मां के संघर्ष और त्याग की भी कहानी है।

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*● आज की इशिता और कल के सपने*

IAS बनने के बाद भी इशिता किशोर प्रशासन को सेवा का माध्यम मानती हैं। वे शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक समानता जैसे क्षेत्रों में प्रभावी बदलाव लाने की इच्छा रखती हैं।

*● युवाओं के लिए संदेश*

IAS इशिता किशोर की सक्सेस स्टोरी युवाओं को सिखाती है कि असफलता अंत नहीं होती। निरंतरता, धैर्य और आत्मविश्वास ही UPSC जैसी परीक्षा में सफलता की असली कुंजी हैं।

IAS इशिता किशोर की कहानी पिता की शहादत से शुरू होकर UPSC रैंक 1 तक पहुंचने की प्रेरक यात्रा है। यह कहानी हर उस युवा के लिए संदेश है जो कठिन हालातों में भी अपने सपनों को जिंदा रखता है।