
इस ‘जहरीली हवा’ और ‘जहरीले पानी’ के लिए हम ही जिम्मेदार हैं…
कौशल किशोर चतुर्वेदी
मध्य प्रदेश में लगातार बिगड़ती वायु गुणवत्ता को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने सख्त रुख अपनाया है। राजधानी भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, सागर, उज्जैन, देवास और सिंगरौली जैसे प्रदेश के आठ प्रमुख शहरों में जहरीली हवा और बढ़ते प्रदूषण पर चिंता जताते हुए एनजीटी की सेंट्रल जोन बेंच ने राज्य सरकार, नगर निगम और प्रदूषण नियंत्रण मंडल को नोटिस जारी किया है। चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं।
इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल से अब तक 18 लोगों की मौतों और 3200 से अधिक लोगों के बीमार होने के मामले को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने बेहद गंभीरता से लिया है। इस मामले का संज्ञान लेने के लिए दायर जनहित याचिकाओं पर 6 जनवरी 2026 को सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने सरकार और जिम्मेदारों अधिकारियों पर कड़ी टिप्पणी की।खंडपीठ ने राज्य सरकार द्वारा गत दो जनवरी को प्रस्तुत की गई स्टेटस रिपोर्ट पर भी सवाल उठाए और नई और विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए। कोर्ट ने आदेश दिया कि मुख्य सचिव अगली सुनवाई में 15 जनवरी को वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित होकर पक्ष रखें। सरकार बताए कि राज्य स्तर पर क्या कार्रवाई की जा रही है, ताकि दूसरी जगहों पर ऐसी घटनाएं न हों। कोर्ट ने यह भी कहा कि आवश्यकता पड़ी तो दोषी अधिकारियों पर आपराधिक कार्रवाई करेंगे।
यह दोनों ही मामले एक दिन की त्वरित परिणति नहीं हैं। इंदौर जैसे स्वच्छतम शहर में लोग सालों से शिकायत कर रहे थे और नगर निगम प्रशासन के सिर पर जूँ तक नहीं रेंग रही थी। तब क्या इस शिकायत की गूंज इंदौर में सत्तापक्ष, विपक्ष और समाज के अन्य ठेकेदारों तक नहीं पहुँची थी? और इससे भी ज्यादा दु:ख की बात यह है कि समाज का तथाकथित बुद्धिजीवी, जागरूक और समाजसेवी वर्ग तब कहां था? जब कोई घटना घट जाती है तब सरकार राहत कार्यों में जुट जाती है और विपक्ष जागकर आलोचना के कीर्तिमान रचने लगता है। तब माननीय न्यायालय भी दरवाजा खटखटाने पर या स्वयं संज्ञान लेकर सरकारों को उनके नकारेपन का अहसास कराता है। जिम्मेदारों पर कार्यवाही भी हो जाए, तब भी स्थितियाँ सुधरेंगी इसकी कोई गारंटी नहीं है। वजह साफ है कि
मामला रफा दफा हुआ और उसके बाद फिर सभी गहरी निद्रा में सो जाएँगे। और तब फिर कोई घटना घटेगी और फिर सभी की तंद्रा टूटेगी और सभी अपने आप को समाज का सर्वाधिक सजग प्रहरी साबित करने में जुट जायेंगे। ऐसी घटनाओं के बहाने सभी, लोकतंत्र के निर्माता, देश के सामान्य नागरिक और बिना स्तंभ का टैग लगाए जीवनयापन कर रहे और हर घटना में पीड़ित बन रहे मतदाताओं की मजबूरी और अपनी-अपनी मजबूती का परचम फहराते नजर आते हैं।
इसी का एक उदाहरण यह है कि पर्यावरणविद् और याचिकाकर्ता राशिद नूर खान की याचिका पर सुनवाई करते हुए एनजीटी ने कहा कि स्वच्छ हवा में सांस लेना नागरिकों का मौलिक अधिकार है, लेकिन मध्य प्रदेश में इसका लगातार उल्लंघन हो रहा है।
एनजीटी ने पाया कि भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, सागर, उज्जैन, देवास और सिंगरौली पिछले पांच वर्षों से राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों ( एनएएक्यूएस) को पूरा करने में विफल रहे हैं। इन शहरों को ‘नॉन-अटेनमेंट सिटी’ की श्रेणी में रखा गया है।
ट्रिब्यूनल ने यह भी टिप्पणी की कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिल्ली-एनसीआर में लागू ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (जीआरएपी) और एयर-शेड आधारित नीति के बावजूद मध्य प्रदेश में अब तक कोई प्रभावी राज्य स्तरीय तंत्र लागू नहीं किया गया, जिससे प्रदूषण की स्थिति और गंभीर हो गई है। मध्य प्रदेश में पराली जलाने के मामलों ने पंजाब और हरियाणा को भी पीछे छोड़ दिया है। सीहोर, रायसेन और विदिशा में ही 31 हजार से अधिक मामले दर्ज हुए। स्मार्ट सिटी और मेट्रो प्रोजेक्ट्स के निर्माण कार्यों में धूल नियंत्रण के नियमों की अनदेखी, बिना पीयूसी सर्टिफिकेट के दौड़ते डीजल ऑटो और 15 साल पुराने वाहन, खुले में कचरा जलाना, लैंडफिल में आग, पटाखों का उपयोग और औद्योगिक गतिविधियां आदि बहुत सारी वजह हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए एनजीटी ने एक उच्च स्तरीय ज्वाइंट कमेटी का गठन किया है। इसमें पर्यावरण, नगरीय प्रशासन और परिवहन विभाग के प्रमुख सचिव, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य, इप्को प्रतिनिधि और सीपीसीबी के पूर्व अतिरिक्त निदेशक डॉ. रवि प्रकाश मिश्रा शामिल हैं। समिति को छह सप्ताह में स्थिति का आकलन कर एक्शन टेकन रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मंडल को नोडल एजेंसी बनाया गया है। मामले की अगली सुनवाई 18 मार्च को होगी, जबकि मुख्य सचिव से लेकर नगर निगम और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करना होगा।
इंदौर में दूषित पेयजल से 18 लोगों की मौत के बाद भोपाल में भी हड़कंप मचा है। मजे की बात यह है कि भोपाल और इंदौर दोनों शहरों का वाटर डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम लगभग एक जैसा है। तो अब भोपाल में भी इंदौर जैसी घटना की पुनरावृत्ति की आशंका जताई जा रही है। इंदौर के मामले में भी माननीय न्यायालय सख्त रवैया अपना रहा है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इंदौर जल-प्रदूषण कांड के बाद किए गए वाटर ऑडिट के निष्कर्ष सार्वजनिक करते हुए कहा कि भाजपा सरकार के “स्वच्छता” और “विकसित भारत” के दावे जमीनी हकीकत में पूरी तरह विफल साबित हुए हैं।
मूल बात यह है कि जब राजा भागीरथ अपनी तपस्या के बल पर पवित्रता की पर्याय गंगा को धरती पर ला सकते हैं। जनता का जीवन सर्वोपरि है, तो क्या हम सब मिलकर भागीरथपुरा जैसी त्रासदी से निपटने में भी सक्षम नहीं है। अगर नगर निगम और सरकार दूषित जल की शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं कर रही थी तो क्या भागीरथपुरा के लोग मिलकर सरकार को मजबूर करने की स्थिति में नहीं थे की गंदा पानी एक दिन भी नहीं पीयेंगे और जब तक सरकार समस्या का हल नहीं करती तब तक अन्न जल ग्रहण नहीं करेंगे। अन्ना की तरह आंदोलन करने की ताकत क्या विपक्ष और समाज में नहीं रही है। सबसे बड़ी बात यही है कि हम खुद मुर्दा बनकर अपने ही घरों को श्मशान में बदल रहे हैं। और लोकतंत्र के स्तंभ हमारी दुर्दशा पर अपनी वीरता का प्रदर्शन करते हैं और कुछ समय बाद फिर सब कुछ शांत हो जाता है। और हम फिर अगली घटना तक गहरे मौन में चले जाते हैं। वास्तव में इस ‘जहरीली हवा’ और ‘जहरीले पानी’ के लिए हम ही जिम्मेदार हैं… न सरकार जिम्मेदार है और ना ही विपक्ष, असल दोषी हम ही हैं, हम ही हैं, हम ही हैं। मूल में जाएंगे तो जहरीली हवा की वजह भी हम हैं और जहरीले पानी की वजह भी हम ही हैं…।
लेखक के बारे में –
कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।
वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।




