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हर साल 5 लाख सड़क हादसे, 2 लाख मौतें… यह युद्ध से भी ज्यादा भयानक- बोले नितिन गडकरी, अब गाड़ियों में सेफ्टी के लिए बदलेंगे नियम

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हर साल 5 लाख सड़क हादसे, 2 लाख मौतें… यह युद्ध से भी ज्यादा भयानक- बोले नितिन गडकरी, अब गाड़ियों में सेफ्टी के लिए बदलेंगे नियम

नई दिल्ली: केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने देश में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त की है।

नई दिल्ली में आयोजित ‘तीसरे नेशनल कॉन्क्लेव ऑन रोड सेफ्टी’ को संबोधित करते हुए उन्होंने बताया कि भारत में सड़क हादसे किसी युद्ध से भी ज्यादा जानें ले रहे हैं। उन्होंने साफ किया कि अब समय आ गया है जब केवल कानून नहीं, बल्कि लोगों के व्यवहार (Behavioural Change) में बदलाव लाना सबसे बड़ी चुनौती है।

नितिन गडकरी ने मंच से जो आंकड़े साझा किए, वे डराने वाले हैं। आंकड़ों के मुताबिक, हर साल 5 लाख हादसे होते हैं। जिनमें करीब 2 लाख के करीब लोग अपनी जान गंवाते हैं। अधिकतर दुर्घटनाएं ओवरस्पीडिंग की वजह से हैं। तेज रफ्तार की वजह से 1.20 लाख मौते होती हैं। हेलमेट न पहनने से 54,000 और सीट बेल्ट न लगाने से 14,000 से ज्यादा लोगों की मौत होती है।

मंत्री ने बताया कि इन हादसों में सबसे दुखद पहलू यह है कि हर साल 18 साल से कम उम्र के 10,000 से ज्यादा बच्चों की मौत हो जाती है। इसके अलावा, इन दुर्घटनाओं की वजह से भारत की GDP को करीब 3 प्रतिशत के बराबर आर्थिक नुकसान होता है, जो किसी भी देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा झटका है।

*अब गाड़ियों में सुरक्षा के ‘ग्लोबल स्टैंडर्ड’*

गडकरी ने ऑटोमोबाइल सेक्टर में किए जा रहे बदलावों पर भी जोर दिया। अब भारत में गाड़ियों के सेफ्टी स्टैंडर्ड वैश्विक स्तर के बनाए जा रहे हैं। भारी वाहनों (ट्रकों और बसों) के लिए ऐसी नई टेक्नोलॉजी लाई जा रही है, जो इमरजेंसी की स्थिति में खुद-ब-खुद ब्रेक लगा सके। नशे में गाड़ी चलाना, गलत साइड ड्राइविंग और मोबाइल के इस्तेमाल पर अब सख्ती और बढ़ाई जाएगीगडकरी ने कहा कि हमने सड़कें शानदार बना दी हैं, गाड़ियों में फीचर्स दे दिए हैं, लेकिन जब तक लोग नियमों का पालन करना अपनी जिम्मेदारी नहीं समझेंगे, तब तक सुधार मुश्किल है। ट्रैफिक कानूनों को लागू करना और लोगों के व्यवहार में बदलाव लाना वर्तमान में नीति बनाने वालों के लिए सबसे बड़ी बुनियादी चुनौती है।