01 year, 156 cases and two witnesses: सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार, चंदननगर TI को हटाया

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01 year, 156 cases and two witnesses: सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार, चंदननगर TI को हटाया

INDORE: चंदननगर थाने में दर्ज मामलों में एक ही पैटर्न पर पॉकेट गवाहों का इस्तेमाल सामने आने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने थाना प्रभारी इंद्रमणि पटेल को पद से हटाने के निर्देश दिए। अदालत ने माना कि यह सामान्य जांच प्रक्रिया नहीं बल्कि पद के दुरुपयोग का मामला है। सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद इंदौर पुलिस आयुक्त ने TI को लाइन अटैच कर दिया।

▪️हर कार्यवाही में यही दो लोग कैसे मौजूद..

सुप्रीम कोर्ट में कानून के छात्र असद अली वारसी ने चंदननगर थाने के 156 प्रकरणों का रिकॉर्ड पेश किया। यह सभी मामले 23 अक्टूबर 2023 से 23 अक्टूबर 2024 के बीच दर्ज हुए थे। इन प्रकरणों में जुआ, NDPS Act, शराब तस्करी और हथियार जब्ती जैसे गंभीर अपराध शामिल थे। रिकॉर्ड में यह सामने आया कि इन मामलों में सलमान पुत्र जुल्फिकार कुरैशी और आमिर पुत्र उस्मान रंगरेज को गवाह बनाया गया। कुल 165 से अधिक मामलों में इन्हीं दोनों की गवाही दर्ज थी। अदालत के सामने सवाल यही था कि हर कार्रवाई के वक्त यही दो लोग कैसे मौजूद रहते थे।

▪️जांच की चूक नहीं, जिम्मेदारी की विफलता 

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्ला ने इस पैटर्न पर कड़ी आपत्ति जताई। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि NDPS जैसे कठोर कानून में इस तरह के गवाहों का लगातार इस्तेमाल गंभीर मामला है। न्यायमूर्ति ने TI से कहा कि तुम दुर्भाग्य से उस कुर्सी पर बैठे हो, यह टिप्पणी सीधे पद के दुरुपयोग पर थी।

अदालत ने यह भी कहा कि थाना प्रभारी केवल औपचारिक अधिकारी नहीं होता, बल्कि थाने में दर्ज हर प्रकरण की जिम्मेदारी उसी की होती है।

TI की दलील नहीं चली

थाना इंचार्ज इंद्रमणि पटेल ने कोर्ट में कहा कि प्रकरण उनके द्वारा दर्ज नहीं किए गए और विवेचकों की लापरवाही है। Supreme Court ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि एसएचओ होने के नाते जवाबदेही से बचा नहीं जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी नोट किया कि आपत्तियां सामने आने के बाद भी चंदननगर थाने में जुआ और एनडीपीएस एक्ट के दो नए मामले दर्ज किए गए और उनमें भी वही पॉकेट गवाह शामिल थे। इसी बिंदु पर अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए TI को हटाने का निर्देश दिया।

निर्देश के बाद तत्काल कार्रवाई

मंगलवार देर शाम पुलिस आयुक्त संतोष कुमार सिंह ने Supreme Court के आदेश का हवाला देते हुए टी इंद्रमणि पटेल को लाइन अटैच करने का आदेश जारी किया। आदेश के साथ ही उन्हें तत्काल प्रभाव से थाने से हटा दिया गया।

यह मामला केवल एक अधिकारी को हटाने तक सीमित नहीं है। एनडीपीएस जैसे कानून में पॉकेट गवाहों के आधार पर दर्ज मामलों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि कितने लोगों के खिलाफ कार्रवाई हुई और कितनों के साथ न्यायिक प्रक्रिया क नाम पर अन्याय हुआ।