
MP News: नये वाहन, फर्नीचर खरीदी के प्रस्ताव नहीं दे सकेंगे विभाग, तृतीय अनुपूरक के लिए विभागों से वित्त विभाग ने मांगे प्रस्ताव
भोपाल: वित्त विभाग ने सभी सरकारी विभागों से तृतीय अनुपूरक के लिए आईएफएमआईएस के जरिए आनलाईन प्रस्ताव मांगे है। वाहन खरीदी, फर्नीचर, कार्यालय उपकरण, एसी खरीदी के प्रस्ताव विभाग नहीं भेज सकेंगे। ऐसे नवीन मदों के प्रस्ताव भी वित्त नहीं लेगा जिनमें राज्य के वित्तीय संसाधनों से अतिरिक्त मांग की जा रही हो।
वित्त विभाग ने सभी विभागों के एसीएस, पीएस और सचिवों को निर्देश जारी कर कहा है कि तृतीय अनुपूरक अनुमान के प्रस्ताव प्रशासकीय विभाग से सक्षम प्रशासकीय अनुमोदन प्राप्त करने के उपरांत आईएफएमआईएस में प्रविष्टि कर ई आफिस के माध्यम से आनलाईन वित्त विभाग को 23 जनवरी तक भिजवा दें। केवल आनलाईन प्रस्ताव ही मान्य किए जाएंगे। अनुपूरक अनुमान से संबंधित संक्षेपिका हिंदी में निर्धारित प्रपत्र में जानकारी, विभाग के सभी बीसीओ के एकजाई प्रस्ताव के साथ भेजना होगा। प्रपत्र और संक्षेपिका प्रस्ताव ई आफिस में जोड़े जाएं। जिन मदों के लिए अतिरिक्त केन्द्रीय सहायता प्राप्त होंनी है उनकी संक्षेपिका, केन्द्रीय सहायता की राशि जो राज्य को ऋण और अनुदान के रुप में प्राप्त होगी उनका उल्लेख आवश्यक रुप से किया जाए। इसी प्रकार यदि कोई व्यय जिसके लिए राशि की मांग की जा रही है उसे यदि स्वीकृत बजट की बचत से लेखों में समायोजित होंना है तो उसके संबंध में अनुदान संख्या शीर्ष सहित पूरा विवरण देना होगा।
*ये प्रस्ताव मांगे-*
जिनके लिए राज्य की आकस्मिता निधि से अग्रिम स्वीकृत किया गया हो। जिनके लिए वित्त विभाग ने सहमति दी हो। जिनके लिए भारत सरकार, अन्य एजेंसी से वित्तीय सहायता, केन्द्रांश स्वीकृत किया गया हो तथा जो विद्यमान मदों से विमुक्त नहीं की हा सकती हो और जिसके लिए अतिरिक्त संसाधन की व्यवस्था प्रशासकीय विभाग अन्य प्रचलित योजनाओं में उपलब्ध राशि में से कटौती कर बचत राशि से नहीं कर पाएंगे। विशेष पूंजीगत सहायता योजना के तहत जिन विभागो द्वारा भारत सरकार को प्रस्ताव प्रेषित अथवा प्रेषित किये जाने वाले प्रस्ताव अंतर्गत यदि पृथक बजट लाईन खोलने की आवश्यकता है तो प्रतीक प्रावधान से पृथक बजट लाईन खोले जाने हेतु प्रस्ताव दिए जा सकेंगे। विशेष सहायता योजना में भारत सरकार द्वारा स्वीकृति प्राप्त कामों में यदि अतिरिक्त बजट की आवश्यकता हो तथा अन्य योजनाओं की बचत से पूर्ति की जाना संभव न हो तो उनके प्रस्ताव मंगाए गए है।





