उत्सव से ज्यादा आफत है बर्फबारी

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उत्सव से ज्यादा आफत है बर्फबारी

शिमला से संजीव शर्मा की विशेष रिपोर्ट

शिमला: इन दिनों टीवी और अखबारों के समाचारों में आप हिमाचल, उत्तराखंड या कश्मीर में हो रही बर्फबारी का मज़ा ले रहे पर्यटकों को देख रहे होंगे। वे कैसे एक दूसरे पर बर्फ फेंक रहे हैं, नाच रहें हैं और उत्सव मना रहे हैं। आप का मन भी मचल रहा होगा कि काश हम भी जल्दी से वहां पहुंच जाए और खूब बर्फ के गोले बनाकर खेले..लेकिन यह टीवी पर देखने में ही अच्छा लगता है क्योंकि पहाड़ों पर बर्फबारी अवसर या उत्सव भर नहीं लाती बल्कि आफत तथा आपदा भी लाती है।

पहाड़ी इलाकों में सर्दियों में बर्फबारी हमेशा एक जादुई दृश्य रचती है। आसमान से गिरती सफेद रुई जैसी बर्फ, पेड़ों पर जमी बर्फ की चमकदार परत, और चारों ओर फैली सफेद चादर जैसी बर्फ… ऐसा लगता है मानो प्रकृति ने खुद एक श्वेत कथा रच दी हो लेकिन इस मनभावन सुंदरता के पीछे कई कड़वी कहानियां छिपी होती हैं, जो यहां रहने वाले या फिर इस बर्फबारी को भुगतने वाले ही समझ पाते हैं। पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी के दौरान और उसके बाद कई चुनौतियां आती हैं, जैसे फिसलन भरी सड़कें, ठंड से स्वास्थ्य जोखिम, बिजली-पानी की कटौती, खाने पीने की दिक्कत,रोजगार और यात्रा में बाधाएं।

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सबसे पहली और बड़ी आफत आती है सड़कों पर। बर्फबारी के बाद सड़कें पूरी तरह से ब्लॉक हो जाती हैं। वाहन फिसलने लगते हैं, यातायात थम जाता है, और लोग घंटों और कई बार तो दिनों तक फंसे रहते हैं। कल्पना कीजिए, आप सपरिवार किसी पहाड़ी स्थल पर बर्फबारी का मज़ा लेकर शहर लौट रहे हों और बीच रास्ते में जमा बर्फ आपका रास्ता रोक दे। आपके पास महज एक दो बॉटल पानी और कुछ स्नैक्स है..घंटे/आधे घंटे के उत्साह के बाद न पानी बचता है और न ही खाना। फिर बच्चे रोने लगते हैं, भूख बढ़ जाती है एवं ठंड से आप कांपने लगते हैं। आखिर जाम में फंसी गाड़ी में कितनी देर तक हीटर/ब्लोअर चलाएंगे। आपको भी आगे के सफर के लिए ईंधन की चिंता सताने लगेगी। ऐसी सूरत में आप खुद को असहाय महसूस करने लगते हैं।

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यह न केवल यात्रा की समस्या है, बल्कि एक भावनात्मक बोझ है – घर की याद, अपनों की चिंता और अनिश्चितता का डर। पहाड़ों पर अक्सर पर्यटक उत्साह में आते हैं, लेकिन आमतौर पर परेशान होकर वापस जाते हैं। वहीं, स्थानीय लोग तो रोज़ी रोटी के संकट से जूझने लगते हैं। बर्फ उनकी आजीविका को भी प्रभावित करती है। दुकानें बंद, व्यापार ठप, और रोजगार की कमी – यह सब मिलकर एक निराशा की लहर पैदा करता है।

दूसरा बड़ा संकट यह आता है कि बर्फबारी से बिजली और पानी की किल्लत होने लगती है। बर्फ से बिजली के तार टूट जाते हैं, ट्रांसफॉर्मर फेल हो जाते हैं और घंटों (दूरदराज़ के इलाकों में कई दिनों तक)अंधेरा छा जाता है। रातें ठंडी और लंबी हो जाती हैं, न हीटर और न ही गर्म पानी.. सब्ज़ी नहीं,सामान नहीं,दूध नहीं,ब्रेड नहीं…अलाव के लिए लकड़ी/कोयला भी कब तक चलेगा। स्थानीय लोगों की आंखों में यह डर साफ दिखने लगता है कि क्या कल सुबह तक बिजली आएगी? क्या पानी की सप्लाई बहाल होगी?

पहाड़ों में रहने वाले लोग प्रकृति के साथ जीते हैं, लेकिन जब वही प्रकृति क्रूर हो जाती है, तो अवसर वास्तव में आपदा बन जाता है। मरीज अस्पताल तक पहुंचने में संघर्ष करते हैं, और कभी-कभी तो जीवन की कीमत भी चुकानी पड़ जाती है। भावनात्मक रूप से देखें तो यह बर्फबारी एकाकीपन और अलगाव बढ़ाती है। परिवार बिखर जाते हैं, क्योंकि कुछ लोग शहरों में फंस जाते हैं। फोन नेटवर्क कमजोर हो जाता है, और अपनों से संपर्क टूट जाता है। ये सब मिलकर एक गहरी उदासी पैदा करते हैं।

पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी की परेशानियां हमें याद दिलाती हैं कि प्रकृति की सुंदरता हमेशा मीठी नहीं होती इसलिए बचाव एवं सावधानी ही एकमात्र रास्ता है। सबसे पहले ऐसे किसी भी इलाके में जाने के पहले मौसम अपडेट चेक करें और बर्फबारी का अलर्ट देखकर अनावश्यक यात्रा टाल दें । इसी तरह, गाड़ी में स्नो चेन जरूर रखें और फिसलन वाली सड़कों पर लगाएं। बिना चेन के ड्राइविंग से बचें। इसके बाद भी, धीरे-धीरे ड्राइव करें, अचानक ब्रेक या शार्प टर्न से बचें। यदि पैदल चल रहे हैं तो फुटपाथ पर चलें । पैदल चलते समय सड़क पर ग्रिप वाले जूते पहने क्योंकि इस दौरान सड़क पर ब्लैक आइस का खतरा सबसे ज्यादा होता है। काली बर्फ दिखाई नहीं देती लेकिन आपकी हड्डी टूटने जैसा दर्द देने वाली होती है।

इसी तरह घर में दरवाजे-खिड़कियां अच्छे से बंद रखें। थर्मल कपड़े, वूलन ब्लैंकेट और सुरक्षित हीटर का इस्तेमाल करें। टॉर्च, कैंडल, पावर बैंक, अतिरिक्त बैटरी साथ रखें। पानी की बोतलें पहले से भरकर रखें क्योंकि नलों के पाइप का पानी जम जाता है। खाने-पीने का स्टॉक तो कम से कम 4-5 दिनों के लिए कर ही ले।

इस सबसे बढ़कर सबसे पहले स्वास्थ्य और व्यक्तिगत सुरक्षा का खास ध्यान रखें मसलन लेयर में कपड़े पहनें जैसे थर्मल, वूलन स्वेटर, जैकेट, दस्ताने, टोपी, मफलर और वाटरप्रूफ जूते भी । ठंड में गुनगुना पानी पीते रहें। ठंड लगने पर तुरंत गर्म जगह पर जाएं। कंपकंपी, सुन्न होना, थकान जैसे लक्षण दिखें तो डॉक्टर से संपर्क करें। इन सभी सावधानी एवं उपायों के बाद ही बर्फबारी का आप उत्सव की तरह इसका आनंद ले सकते हैं वरना आफत भुगतने के लिए तैयार रहें।