टैक्स वसूली करने वाले साहब का इस्तीफ़ा!

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टैक्स वसूली करने वाले साहब का इस्तीफ़ा!

मुकेश नेमा

और फिर जमीन डोली।हिमालय थर्राया। उनचास पवन एक साथ चले। इन्द्र का सिंहासन डोलने लगा। इन्द्र चिंतित हुए। समझ गए कोई मृत्यु लोक निवासी नर अचानक पुण्य कमा चुका और अब उनके सिंहासन पर काबिज होने की फिराक मे है। चिंतित इन्द्र ने अपने महामंत्री से जानना चाहा ,ये महाशय कौन है। और इस आकस्मिक विपदा का कारण क्या है ?

महामंत्री ने अपने विशेष सुरक्षा सलाहकार को फोन लगाया। सलाहकार ने अपने धुरंधरो से जानकारी एकत्र की। तदुपरांत इन्द्र उचित माध्यम से सूचित हुए कि कि धरती के एक टैक्स वसूली करने वाले साहब ने फूट फूट कर रोते हुए अपनी पत्नी को सूचित किया है कि वे इस्तीफ़ा दे चुके। और आपके सिंहासन का हिलना इसी घटना का साइड इफ़ेक्ट है।

इन्द्र चकराए। महाभाग। ये कैसी विचित्र बात कर रहे है आप ? कोई सरकारी बाबू नौकरी करो छोड़े,इससे मेरे राज पाट का क्या लेना देना ?

महामंत्री विनीत भाव से बोले अब। देवराज। बात आश्चर्यजनक किंतु सत्य है। एक बडे सरकारी नौकर ने अपनी अत्यंत नमकीन सी नौकरी छोड़ी है। और उस मालिक के अपमान का हवाला देकर छोड़ी है जिसका उसने नमक खाया है।

इन्द्र और चकित हुए। ये तो सत्य है। ऐसी स्वादिष्ट नौकरी कोई सरकारी आदमी त्याग दे ,और ऐसे विचित्र कारण ये त्याग दे ,ये पहले कभी सुना नहीं मैंने भी। क्या से बंदा भी नमक का दरोग़ा था ?

महामंत्री ने कहा। जी महाराज। याद कीजिए प्रेमचंद की कहानी मे बंशीधर नाम का एक नमक का दरोगा था। उससे भी आपके सिंहासन को खतरा हुआ था। चूँकि बाद मे वो उस चतुर सेठ की नौकरी कर पुनः मुख्यधारा मे लौट गया था। इसलिए बात वहीं खत्म हो गई थी।

इन्द्र सोच में पड़े। ये सरकारी नौकर अपने मालिक के अपमान से इतना चिंतित हुआ तो हुआ क्यों ? जहाँ तक मुझे पता है पृथ्वी पर सरकारी नौकरी मिलना बहुत मुश्किल है और एक बार किसी को सरकारी नौकरी मिल जाए तो उसे उसकी तमाम काहिली के बावजूद निकाला जाना भी लगभग नामुमकिन है। ऐसे मे सरकारी नौकर खुद राजा होता है। वो क्यों सरकार के मान अपमान को लेकर अपनी नौकरी को लात मारेगा ?

महामंत्री बोले। फिलहाल तो वो कैमरे के सामने फूट फूट कर रोया है। उसके आंसुओं को देखकर खुद उसकी अपनी पत्नी भी चकित है। मुमकिन है ये बंदा नमकीन नौकरी से बोर हो गया हो और अब अपने सेठ से कोई बड़ी मीठी नौकरी पाने के चक्कर मे हो।

इन्द्र सहमत हुए महामंत्री के तर्क से। मुझे भी ऐसा ही लगता है। वरना रोने का वीडियो कौन बनवाता है ? पर ये उनचास पवन का चलना और हिमालय के हिलने को किस बात का संकेत माना जाए ?

महामंत्री बोले अब। महाराज मौसम का कोई ठिकाना रहा नही अब। पवन मौज मे आ गए होंगे। ग्लोबल वार्मिग वजह हो सकती है हिमालय के हिलने की।वैसे भी कुर्सी और धरती कब हिल जाए विधाता भी नही जानते।

इन्द्र ने राहत की साँस ली। मुस्कराए। महामंत्री से मुखातिब हुए।मुझे लगता है कि इस मामले में ज्यादा दम है नही। हमारे वरिष्ठ सुरक्षा सलाहकार पर्याप्त वृद्ध हो चुके है। वे सूचनाएं हम तक पहुँचाने के पहले उनकी पर्याप्त जांच पड़ताल नही करते ,और उन्हें एक्सटेंशन देना भी व्यर्थ ही रहा है। खैर जाने दीजिए , इन्द्री की बोतलों का प्रबंध कीजिए और मेनका को नृत्य गान के लिए खबर करवाइए।

सुधी और धैर्यवान पाठकों की जानकारी के लिए। स्वर्ग में स्थिति अब गंभीर पर नियंत्रण मे है। चिंता जैसी कोई बात नही है। रही बात मृत्यु लोक में नमक का हवाला देकर इस्तीफ़ा देने वाले सरकारी नौकर की। उनके बारे मे अगली खबर आने पर आपको फौरन सूचित किया जाएगा।