
Golden Book of World Records & India Book of Records में दर्ज विश्व की पहली कॉफी टेबल बुक ‘पुष्प गंगा’
छप्पर फाड़कर उपलब्धि कैसे बरसती है, यह आज मैं स्वयं अनुभव कर रहा हूँ।टैरेस पर खिले मेरे फूलों के वे चित्र, जिन्हें मैं अनेक वर्षों से नित्य बागवानी समूहों में सहज भाव से साझा करता रहा, कभी किसी लक्ष्य या योजना का हिस्सा नहीं थे; वे तो केवल प्रकृति के प्रति प्रेम की अभिव्यक्ति एवं स्वान्तः सुखाय थे।कभी सोचा नहीं था कि वही चित्र एक दिन मेरी कॉफी टेबल बुक “पुष्प गंगा” के मुख्य आधार बनेंगे और यह पुस्तक—
* टैरेस गार्डनिंग पर विश्व की पहली कॉफी टेबल बुक के रूप में Golden Book of World Records
* तथा एक व्यक्ति द्वारा चित्रों सहित अधिकतम फूलों के वर्णन के लिए India Book of Records
—दोनों में आधिकारिक रूप से दर्ज होगी।


गोल्डन बुक और इंडिया बुक द्वारा प्राप्त ये मान्यताएँ, पुस्तक के 101 फूलों के हर माथे पर एक-एक तिलक हैं।
ग्यारह-बारह वर्ष पहले तक मैं स्वयं दूसरों के खूबसूरत फूलों की पोस्ट देखकर आनंदित होता था और उन्हें साझा करता रहता था। लगभग दस वर्ष पूर्व एक जन्मदिन की शुभकामना में एक मोहतरमा के तुलसी पौधे का सुंदर चित्र पोस्ट कर बैठा। भूल का अहसास होते ही मैंने क्षमायाचना भी कर ली, किंतु उसके बावजूद मिले कटु शब्दों ने मन को आहत किया। वहीं से मेरे भीतर एक गहरा संकल्प जन्मा … कि ऐसी भूल फिर कभी नहीं करूँगा…

और यह भी कि यदि मेरे फूलों के चित्र मेरी अनुमति के बिना भी कोई उपयोग में ले, तो मुझे आपत्ति नहीं होगी।
बल्कि प्रसन्नता होगी कि मेरी बगिया का कोई फूल किसी और की खुशी का कारण बना।

इसी सोच का परिणाम यह हुआ कि मेरे टैरेस पर खिले अनेक फूलों के चित्र देश-विदेश के लोगों द्वारा साझा किए गए और उन्हें अपार स्नेह मिला। इस निरंतर पसंदगी ने न केवल चित्रों की सुंदरता पर विश्वास बढ़ाया, बल्कि स्वयं के भीतर भी एक आत्मविश्वास को जन्म दिया, और यही आत्मविश्वास “पुष्प गंगा” के सृजन का सबसे मजबूत आधार बना।
Golden Book of World Records और India Book of Records में “पुष्प गंगा” का दर्ज होना किसी व्यक्तिगत गौरव से अधिक एक स्मरण है … कि जब भाव निर्मल हों और उद्देश्य निःस्वार्थ हो, तो साधारण लगने वाले प्रयास भी अपने समय पर छप्पर फाड़कर बरसते हैं।
आज “पुष्प गंगा” केवल मेरी नहीं,
प्रकृति से प्रेम करने वाले हर मन की है।
महेश बंसल, इंदौर





