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उन्होंने दावा करते हुए कहा था कि उनके कार्यकाल में शिक्षकों का वेतन नियमित रूप से भुगतान किया गया और सभी बिल, वाउचर, कैश बुक सहित वित्तीय दस्तावेज 11 दिसंबर 2025 को वर्तमान ब्लॉक शिक्षा अधिकारी को सौंप दिए गए थे, जिसकी रसीद उनके पास मौजूद हैं.
पूर्व बीईओ ने बताया कि उनका कार्यकाल अक्टूबर 2022 से सितंबर 2025 तक रहा. इस दौरान कक्ष प्रभारी योगेंद्र कश्यप को मौखिक और लिखित दोनों रूपों में आवश्यक निर्देश दिए गए, लेकिन बार-बार कहने के बावजूद उन्होंने दस्तावेजों का संधारण ठीक से नहीं किया. इसी लापरवाही के कारण कई वित्तीय अभिलेख अधूरे रह गए. कक्ष प्रभारी को नोटिस भी जारी किया गया था, लेकिन उसे गंभीरता से नहीं लिया गया.
संजय जायसवाल का दावा किया था कि उनके कार्यकाल में किसी भी प्रकार का गबन नहीं हुआ है और उनके पास हर लेन-देन से जुड़े साक्ष्य मौजूद हैं. स्थानांतरण के समय उन्होंने पूरे मामले की जानकारी तत्कालीन ब्लॉक शिक्षा अधिकारी को भी दे दी थी. वहीं जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) एफ.आर. वर्मा ने ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर जांच में ऑडिट में कुछ कमियां की बात कही थी.