खरगोन में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 80 वर्षीय रिटायर्ड प्रोफेसर से ठगी करने वाले अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का पर्दाफाश,2 आरोपी गिरफ्तार

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खरगोन में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 80 वर्षीय रिटायर्ड प्रोफेसर से ठगी करने वाले अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का पर्दाफाश,2 आरोपी गिरफ्तार

खरगोन: मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी करने वाले एक संगठित अंतरराज्यीय साइबर फ्रॉड गिरोह का पर्दाफाश किया है। गिरोह ने एनआईए, सीबीआई और ईडी जैसी केंद्रीय जांच एजेंसियों का डर दिखाकर 80 वर्षीय सेवानिवृत्त पॉलीटेक्निक कॉलेज प्राचार्य से 10 लाख रुपये की ठगी की थी। मामले में राजस्थान के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है।

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) शकुंतला रुहल ने शनिवार को मीडिया को बताया कि पीड़ित शशिकांत कुलकर्णी (सनावद पॉलीटेक्निक कॉलेज के सेवानिवृत्त प्रोफेसर) ने 15 जनवरी को सनावद थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि 9 जनवरी को उन्हें एक अज्ञात नंबर से व्हाट्सएप कॉल आया, जिसमें कॉल करने वाले ने खुद को एनआईए अधिकारी बताया।

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एएसपी के अनुसार, आरोपी ने झूठा दावा किया कि जम्मू-कश्मीर में एक आतंकी पकड़ा गया है और उसकी जांच में कुलकर्णी की पत्नी के बैंक खाते से करीब 7 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेन-देन का पता चला है, जिसमें से 10 प्रतिशत कमीशन उन्हें मिला है। इसके बाद आरोपियों ने कुलकर्णी और उनकी पत्नी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी होने की बात कही और फर्जी वारंट व्हाट्सएप पर भेज दिए।

उन्होंने बताया कि तीन दिनों तक 24 घंटे व्हाट्सएप कॉल के जरिए निगरानी में रखकर पीड़ित को डराया गया और यह कहकर 10 लाख रुपये आरटीजीएस के जरिए ट्रांसफर करवा लिए गए कि रकम जमा करने पर गिरफ्तारी वारंट रोक दिए जाएंगे। ठगी का एहसास होने पर कुलकर्णी ने पुलिस से संपर्क किया।

मामले में बीएनएस और आईटी एक्ट की संबंधित धाराओं में केस दर्ज कर सनावद थाना प्रभारी रामेश्वर ठाकुर के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई। साइबर सेल की तकनीकी मदद से पैसों की कड़ी का पता लगाया गया, जो बेंगलुरु के बैंक खातों से होते हुए राजस्थान के लोगों तक पहुंची।

तकनीकी विश्लेषण के बाद पुलिस ने उदयपुर से राजस्थान के फलोदी जिले के रहने वाले वीरेंद्र जावा (19) और रामस्वरूप विश्नोई (21) को गिरफ्तार किया। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि उनके साथी अरविंद और संजय धमकी भरे कॉल करते थे, जबकि वीरेंद्र और रामस्वरूप म्यूल बैंक अकाउंट्स का संचालन कर नकदी निकालते थे।

पुलिस के अनुसार, वीरेंद्र ने बेंगलुरु की एक फेडरल बैंक शाखा से 10 लाख रुपये निकाले थे, जिसमें से 3.5 लाख रुपये दोनों आरोपियों में बांटे गए, जबकि शेष रकम अरविंद और संजय ले गए।

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 3.01 लाख रुपये नकद, 17 बैंक व एटीएम कार्ड, 10 चेकबुक, पांच पासबुक, दो मोबाइल फोन और चार सिम कार्ड जब्त किए हैं। पूछताछ में गिरोह ने तमिलनाडु में भी इसी तरह की ठगी कर एक अन्य पीड़ित आरएस सत्यनारायण से 17 लाख रुपये वसूलने की बात कबूल की है।