Important decision of Allahabad High Court: वाहन बिक चुका हो लेकिन आरसी पुराने नाम पर हो तो मुआवजे का दायित्व उसी पर

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Important decision of Allahabad High Court: वाहन बिक चुका हो लेकिन आरसी पुराने नाम पर हो तो मुआवजे का दायित्व उसी पर

Prayagraj: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मोटर दुर्घटना मुआवजे से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि यदि किसी वाहन की बिक्री हो चुकी हो, लेकिन परिवहन विभाग के रिकॉर्ड में उस वाहन का पंजीकरण अब भी पुराने मालिक के नाम पर दर्ज है, तो दुर्घटना की स्थिति में कानूनी रूप से वही पंजीकृत मालिक मुआवजा देने के लिए जिम्मेदार माना जाएगा। अदालत ने कहा कि निजी बिक्री समझौता या मौखिक दावे पंजीकरण रिकॉर्ड पर भारी नहीं हो सकते।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला एक सड़क दुर्घटना से जुड़ा था, जिसमें वाहन चालक की मृत्यु हो गई थी। मृतक के परिजनों ने कर्मचारी मुआवजा अधिनियम के तहत मुआवजे का दावा दायर किया था। मुआवजा आयुक्त ने मामले की सुनवाई के बाद पीड़ित परिवार के पक्ष में मुआवजा निर्धारित किया। इसके बाद बीमा कंपनी और वाहन से जुड़े पक्षकारों ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी।

बीमा कंपनी की दलील

बीमा कंपनी का तर्क था कि दुर्घटना से पहले ही वाहन बेच दिया गया था, इसलिए पुराने मालिक और चालक के बीच मालिक-कर्मचारी का संबंध समाप्त हो चुका था। कंपनी ने यह भी कहा कि जब वाहन स्वामित्व में नहीं था, तो मुआवजे का दायित्व उस पर नहीं डाला जा सकता।

हाईकोर्ट की स्पष्ट टिप्पणी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि मोटर वाहन अधिनियम के तहत वाहन का मालिक वही माना जाता है जिसका नाम परिवहन विभाग के पंजीकरण रिकॉर्ड में दर्ज है। जब तक आरसी में नामांतरण नहीं होता, तब तक कानूनी जिम्मेदारी पुराने पंजीकृत मालिक पर ही बनी रहती है। अदालत ने यह भी कहा कि दुर्घटना पीड़ितों को वास्तविक स्वामित्व की जटिलताओं में उलझाना न्यायसंगत नहीं है।

पंजीकरण रिकॉर्ड को बताया निर्णायक

कोर्ट ने साफ कहा कि वाहन की बिक्री केवल आपसी समझौते से पूरी नहीं होती। बिक्री के बाद आरटीओ रिकॉर्ड में नामांतरण कराना अनिवार्य है। यदि यह प्रक्रिया पूरी नहीं की जाती और इस बीच कोई दुर्घटना हो जाती है, तो मुआवजे की जिम्मेदारी से बचा नहीं जा सकता।

बीमा और चालक के संबंध पर अदालत का रुख

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि वाहन चालक, बीमा पॉलिसी के अंतर्गत कवर माना जाएगा। चालक के लिए अलग से प्रीमियम न लेने की दलील को अदालत ने स्वीकार नहीं किया और कहा कि बीमा दायित्व से इस आधार पर इंकार नहीं किया जा सकता।

अपील खारिज, मुआवजा बरकरार

हाईकोर्ट ने बीमा कंपनी की अपील खारिज करते हुए मुआवजा आयुक्त के आदेश को बरकरार रखा। अदालत ने निर्देश दिया कि निर्धारित मुआवजा और ब्याज की राशि पीड़ित परिवार को दी जाए।

फैसले का व्यापक असर

यह फैसला उन सभी वाहन मालिकों के लिए चेतावनी है जो वाहन बेचने के बाद आरसी ट्रांसफर को हल्के में लेते हैं। कोर्ट के इस निर्णय से यह सिद्ध हो गया है कि आरसी में नाम दर्ज होना ही कानूनी स्वामित्व का निर्णायक आधार है, और उसी के अनुसार दुर्घटना मुआवजे की जिम्मेदारी तय होगी।