
दलित महिला की नियुक्ति पर तीन महीने से आंगनवाड़ी बंद , 60 बच्चों का भविष्य अधर में
Rajnagar: ओडिशा के केंद्रपाड़ा जिले के राजनगर ब्लॉक अंतर्गत घड़ियामाला ग्राम पंचायत के नुआगांव में स्थित एक आंगनवाड़ी केंद्र जातिगत विवाद की वजह से करीब तीन महीने से बंद पड़ा है। केंद्र में दलित समुदाय की एक युवती को कुक-कम-हेल्पर के रूप में नियुक्त किए जाने के बाद गांव के कई अभिभावकों ने अपने बच्चों को वहां भेजना बंद कर दिया। परिणामस्वरूप लगभग 60 बच्चे पोषण आहार और प्रारंभिक शिक्षा से वंचित हो गए हैं।
● नियुक्ति के बाद शुरू हुआ विरोध
करीब चार महीने पहले प्रशासन ने ग्रेजुएट युवती शर्मिष्ठा सेठी को आंगनवाड़ी हेल्पर के पद पर नियुक्त किया था। नियुक्ति के तुरंत बाद गांव की एक स्थानीय समिति ने इसका विरोध शुरू कर दिया। समिति में शामिल अधिकांश लोग ऊंची जाति से जुड़े बताए जा रहे हैं। विरोध के तौर पर अभिभावकों ने बच्चों को आंगनवाड़ी भेजना बंद कर दिया, जिससे केंद्र की गतिविधियां ठप हो गईं।
● बच्चों और माताओं पर सीधा असर
आंगनवाड़ी केंद्र केवल बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा ही नहीं देता, बल्कि पोषण आहार, टीकाकरण और गर्भवती तथा स्तनपान कराने वाली महिलाओं को भी आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराता है। केंद्र बंद होने से इन सभी सेवाओं पर असर पड़ा है। ग्रामीण क्षेत्र में यह केंद्र बच्चों के स्वास्थ्य और विकास की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
● प्रशासन की समझाइश, समाधान अब भी दूर
जिला स्तर के अधिकारियों ने गांव पहुंचकर अभिभावकों और स्थानीय समिति से बातचीत की है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नियुक्ति प्रक्रिया नियमों के तहत की गई है और किसी भी प्रकार का जातिगत भेदभाव स्वीकार्य नहीं है। बावजूद इसके, स्थिति सामान्य होने में अब तक सफलता नहीं मिल सकी है।
● सामाजिक न्याय और संवैधानिक मूल्यों पर सवाल
यह घटना एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में जातिगत पूर्वाग्रहों की मौजूदगी को उजागर करती है। संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है और सार्वजनिक संस्थानों में भेदभाव की कोई गुंजाइश नहीं है। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में सामाजिक बाधाएं खड़ी होंगी तो सबसे अधिक नुकसान उन बच्चों को होगा जिनके लिए ये योजनाएं बनाई गई हैं।
● समाधान की राह क्या
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल प्रशासनिक आदेश पर्याप्त नहीं होंगे। सामाजिक संवाद, जनजागरूकता और कानून के सख्त अनुपालन की आवश्यकता है। यदि समय रहते समाधान नहीं निकला तो इससे न केवल बच्चों का शैक्षणिक और पोषण स्तर प्रभावित होगा, बल्कि सामाजिक सौहार्द भी कमजोर पड़ेगा।
फिलहाल पूरा मामला प्रशासन के संज्ञान में है और उम्मीद की जा रही है कि बातचीत और आवश्यक कानूनी कदमों के जरिए जल्द ही आंगनवाड़ी केंद्र को दोबारा शुरू कराया जाएगा, ताकि बच्चों का भविष्य और अधिकार सुरक्षित रह सकें।





