Juda’s Strike: अस्पताल में इलाज के लिए मरीजों का करना पड़ा लंबा इंतजार, इमजरजेंसी में कई ऑपरेशन टालने पड़े

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Juda’s Strike: अस्पताल में इलाज के लिए मरीजों का करना पड़ा लंबा इंतजार, इमजरजेंसी में कई ऑपरेशन टालने पड़े

भोपाल। लंबित स्टाइपेंड संशोधन को लेकर एक बार फिर से जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर चले गए। आज सुबह डॉक्टरों ने जीएमसी परिसर में एकत्रित होकर नारे-बाजी की। जूडा की हड़ताल से मरीजों की परेशानियां बढ़ गई। ओपीडी में मरीजों के लिए इलाज के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा, बाहर मरीजों की खासी कतारें लगी रहीं । यहां तक की कई आपरेशन तक टालने पड़े। हांलाकि केवल आपातकालीन सेवाएं जारी रहीं।

जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (जूडा) के अनुसार, सीपीआई आधारित स्टाइपेंड संशोधन शासन के आदेश के अनुसार एक अप्रैल 2025 से लागू होना था। यह अब तक लागू नहीं किया है। कई बार निवेदन के बावजूद इस दिशा में कोई ठोस निर्णय नहीं लिया है। इससे डॉक्टरों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

*0 गंभीर मरीजों के लेकर परिजन भटकते रहे*

– जूडा की हड़ताल का सबसे ज्यादा असर गंभीर मरीजों पर पड़ा। उनके परिजन इलाज के लिए यहां से वहां भटकते रहे। खासकर दूसरे शहर से आने वाले मरीज व उनके परिजन परेशान दिखाई दिए। करीबन 100 से अधिक मरीजों को दूसरे अस्पताल इलाज के लिए जाना पड़ा।

*0 करीबन 8 हजार डॉक्टर्स शामिल*

-करीब 8 हजार रेजिडेंट डॉक्टर, सीनियर रेजिडेंट और इंटर्न इस हड़ताल में शामिल हैं। विशेषज्ञों की माने तो यह सभी किसी मेडिकल कॉलेज की रीढ़ माने जाते हैं। जो ना केवल मेडिकल कॉलेजों का 70 प्रतिशत भार उठाते हैं बल्कि मरीजों के इलाज से लेकर उनकी मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी तक निभाते हैं। प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों ने सरकार से जल्द निर्णय लेने की मांग की है।

*0 आदेश के बावजूद संशोधन नहीं*

जूडा उपाध्यक्ष शुभांशु शर्मा ने बताया कि मध्य प्रदेश शासन के 7 जून 2021 के आदेश अनुसार, सीपीआई आधारित स्टाइपेंड संशोधन एक अप्रैल 2025 से लागू होना था। इसके बावजूद अब तक न तो संशोधित स्टाइपेंड लागू किया गया है और न ही अप्रैल 2025 से देय एरियर का भुगतान किया है। डॉक्टरों का कहना है कि इस संबंध में कई बार शासन और संबंधित विभागों को अवगत कराया गया, लेकिन अभी तक समस्या का समाधान नहीं हुआ है।

*0 तेज होगा आंदोलन*

जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन का कहना है कि उनका आंदोलन केवल शासन के पहले से जारी आदेश के क्रियान्वयन और लंबित एरियर के भुगतान की मांग को लेकर है। यदि सरकार जल्द निर्णय लेती है तो आंदोलन समाप्त कर दिया जाएगा, लेकिन मांगों की अनदेखी होने पर विरोध को आगे और तेज किया जा सकता है।