षड्यंत्र कर 46,600 वर्ग फीट जमीन निजी नाम से करायी, EOW ने जीशान अली के साथ ही तत्कालीन उप अंकेक्षक, सहकारिता और कई लोगों पर दर्ज किया आपराधिक मामला

124
EOW Action

षड्यंत्र कर 46,600 वर्ग फीट जमीन निजी नाम से करायी, EOW ने जीशान अली के साथ ही तत्कालीन उप अंकेक्षक, सहकारिता और कई लोगों पर दर्ज किया आपराधिक मामला

भोपाल : आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) भोपाल ने शैक्षणिक भूमि के अवैध हस्तांतरण के मामले में जीशान अली सहित कई लोगों पर आपराधिक मामला दर्ज किया है। इस मामले में षड्यंत्र कर सहकारी समितियों के जरिए 46,600 वर्ग फीट जमीन निजी नाम से कराने की बात सामने आई है।

इस संबंध में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) को प्राप्त एक शिकायत के आधार पर ग्राम नरेला शंकरी स्थित शैक्षणिक प्रयोजन हेतु आरक्षित भूमि के अवैध हस्तांतरण से संबंधित मामले की जांच की गई। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि सहकारी समितियों और उनसे जुड़ी संस्थाओं के माध्यम से शैक्षणिक उपयोग के लिए आरक्षित भूमि को योजनाबद्ध तरीके से निजी नाम पर दर्ज कराया गया है।

जांच में प्राप्त तथ्यों के आधार पर यह पाया गया कि ग्राम नरेला शंकरी स्थित खसरा क्रमांक 243 के अंश भाग की लगभग 0.4330 हेक्टेयर (लगभग 46,600 वर्गफीट) भूमि, जो कि संबंधित सहकारी संस्था के स्वीकृत अभिन्यास (नक्शा) के अनुसार शैक्षणिक प्रयोजन के लिए आरक्षित थी, का अवैध रूप से हस्तांतरण किया गया। जांच में पाए गए तथ्यों के आधार पर जीशान अली, स्व. श्रीमती निकहत शमीम, श्रीमती नाजनीन अली तथा आर.के. कातुलकर (तत्कालीन उप अंकेक्षक, सहकारिता विभाग) सहित अन्य व्यक्तियों के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना प्रारंभ की गई है।

*जांच में क्रमवार यह तथ्य पाये गए हैं:*

• ग्राम नरेला शंकरी स्थित खसरा क्रमांक 243 की लगभग 46,600 वर्गफीट भूमि स्वीकृत नक्शे के अनुसार शैक्षणिक प्रयोजन के लिए आरक्षित थी।

• जांच में यह पाया गया कि उक्त भूमि का आवंटन पहले प्राईम एजुकेशन सोसायटी को किया गया, जिसकी अध्यक्ष उस समय स्व. निकहत शमीम, जो कि जीशान अली की माता थीं, थीं।

• इसके पश्चात उक्त भूमि को प्राईम एजुकेशन सोसायटी से वाटिका गृह निर्माण सहकारी समिति को विक्रय कर दिया गया। जांच में पाया गया कि यह सहकारी समिति आरोपी जीशान अली द्वारा स्थापित एवं नियंत्रित संस्था थी।

• जांच में यह भी सामने आया कि उक्त भूमि को सहकारी संस्था के नाम दर्ज कराने के बजाय राजस्व अभिलेखों में जीशान अली के व्यक्तिगत नाम पर दर्ज कराया गया।

• जांच के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि वाटिका गृह निर्माण सहकारी समिति के पंजीयन के समय जीशान अली द्वारा असत्य शपथपत्र प्रस्तुत किया गया, जिसमें यह उल्लेख किया गया था कि वह किसी अन्य सहकारी समिति का सदस्य नहीं है, जबकि वह पहले से ही नरेला शंकरी गृह निर्माण सहकारी समिति का सदस्य था।जांच में यह पाया गया कि: जीशान अली पहले से दो अन्य सहकारी समितियों का सदस्य था एवं उसकी पत्नी नाजनीन अली भी एक अन्य समिति की सदस्य थी

• जांच में यह भी पाया गया कि संस्था के वास्तविक नियंत्रण को छिपाने के उद्देश्य से जीशान अली द्वारा अपनी कंपनी रॉयल रेसिडेंसी में कार्यरत व्यक्तियों ए.के. तिवारी तथा रामपाल धौसले को क्रमशः संस्था का अध्यक्ष बनवाया गया।

. जांच के दौरान यह भी सामने आया कि सहकारी समिति का केवल औपचारिक उपयोग किया गया। वाटिका गृह निर्माण सहकारी समिति का कोई वास्तविक व्यावसायिक कार्य नहीं हुआ। एवं समिति के ऑडिट रिकॉर्ड भी उपलब्ध नहीं थे। समिति का उपयोग केवल भूमि को निजी स्वामित्व में लेने के माध्यम के रूप में किया गया।

• बाद में सहकारिता विभाग के तत्कालीन उप अंकक्षक आर.के. कातुलकर के साथ मिलकर निर्वाचन कराया गया और रामपाल धौसले को निर्विरोध अध्यक्ष घोषित किया गया।

• जांच में यह भी पाया गया कि संस्था के मूल अभिलेख उपलब्ध न होने के संबंध में सहकारिता विभाग को भ्रामक जानकारी दी गई कि उक्त दस्तावेज पूर्व अध्यक्ष ए.के. तिवारी द्वारा उपलब्ध नहीं कराए गए हैं, जबकि जांच में पाया गया कि ए.के. तिवारी को संस्था के मूल दस्तावेज कभी प्राप्त ही नहीं हुए थे।

• जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि सहकारिता विभाग के तत्कालीन उप अंकक्षक आर.के. कातुलकर द्वारा इस मामले में अवैध कार्यों में सहयोग किए जाने के एवज में जीशान अली द्वारा रॉयल रेसिडेंसी परियोजना में उनके परिजन के नाम पर एक आवासीय भूखंड आवंटित कर उस पर भवन निर्माण कराया गया।

• आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ द्वारा की जा रही जांच के दौरान यह भी पाया गया कि आरोपी जीशान अली एवं उसकी पत्नी नाजनीन अली द्वारा जांच को प्रभावित करने का प्रयास किया गया। जांच के दौरान ए.के. तिवारी को भेजे गए नोटिस के बाद उन्हें अपने पक्ष में जवाब प्रस्तुत करने के लिए व्हाट्सएप के माध्यम से लिखित उत्तर का प्रारूप भेजा गया तथा बैंक खाते से धनराशि भी भेजी गई।

उपरोक्त तथ्यों के आधार पर आरोपी ,जीशान अली पिता शमीमुद्दीन , स्व. श्रीमती निकहत शमीम ,श्रीमती नाजनीन अली पत्नी जीशान अली ,आर.के. कातुलकर पुत्र श्री चिंडू कातुलकर (तत्कालीन उप अंकक्षक, सहकारिता विभाग) ,ए.के. तिवारी ,रामपाल धौसले ,तथा अन्य व्यक्तियों के विरुद्ध ,भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 61(2), 318(4), 338, 336(3), 340(2) तथा ,भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 13(1)(d) सहपठित धारा 13(2) के अंतर्गत प्रकरण पंजीबद्ध विवेचना प्रारंभ की गई है।