चौंका रहा बंगाल…

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चौंका रहा बंगाल…

कौशल किशोर चतुर्वेदी

अप्रैल महीने में भले ही भारत के पांच राज्यों में चुनाव होने वाले हों लेकिन दुनिया की निगाह पश्चिम बंगाल पर टिकी हुई है। और चुनाव की तारीखों की घोषणा के बाद एक बार फिर पश्चिम बंगाल ने सबको चौंका कर रख दिया है। यह सभी की सोच के परे ही है कि पश्चिम बंगाल में केवल दो चरणों में पूरा चुनाव संपन्न हो जाएगा। पश्चिम बंगाल में दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को मतदान होगा। भारत निर्वाचन आयोग ने जैसे ही पश्चिम बंगाल में चुनाव दो चरणों में होने की घोषणा की, वैसे ही चुनावी पंडितों ने वहां पर चुनावी परिणाम चौंकाने वाले होने जैसी स्थिति पर विचार करना शुरू कर दिया है। खुद ममता को भी यह भरोसा नहीं होगा कि दो चरणों के शाही चुनाव पर उनकी जीत हार का फैसला होने वाला है। यह सभी को पता है कि पश्चिम बंगाल में चार मई को आने वाले चुनाव परिणाम ममता बनर्जी या अमित शाह को चौंकाए बिना नहीं रहेंगे। पर इस संवेदनशील राज्य में दो चरणों में चुनावों का फैसला भारत निर्वाचन आयोग ने किस रणनीति के तहत लिया है, यह बहुत आश्चर्य में जरूर डाल रहा है। जिस राज्य में 8 चरणों में चुनाव संपन्न हुआ हो उसमें अगला चुनाव दो चरण में हो रहा है, बस केवल यही बात सबको बहुत कुछ सोचने पर मजबूर कर रही है।

चुनाव आयोग ने चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के विधानसभा चुनावों की घोषणा कर दी है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने 15 मई 2026 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी के विधानसभा चुनावों की तारीख़ों के बारे में बताया। पश्चिम बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे और 4 मई को परिणाम आएंगे। हालाँकि, राज्य में चुनावी प्रक्रिया असल में बहुत पहले ही शुरू हो गई थी। पिछले दो महीनों में, चुनाव आयोग ने मतदाता सूची का एक विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) किया। इसके चलते राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया था। भारत के सुप्रीम कोर्ट का ध्यान भी पश्चिम बंगाल ने अपनी ओर खींचा था।

राज्य के 294 निर्वाचन क्षेत्रों में इस बार चरणों की संख्या कम करने के फ़ैसले ने राजनीतिक पर्यवेक्षकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने दो चरणों में मतदान कराने को लेकर कहा है कि आयोग ने लंबी चर्चा की और ये पाया कि वोटिंग के चरणों की संख्या कम की जाए ताकि ये सबके लिए सुविधानजनक रहे। यह सुविधाजनक शब्द ही सभी को संशय में डाल रहा है। आखिर सुविधाजनक किसके लिए…भाजपा के लिए

तृणमूल कांग्रेस के लिए या अन्य के लिए।

राज्य में एसआईआर के बाद अंतिम मतदाता सूची से क़रीब 63 लाख 66 हजार वोटरों के नाम हटा दिए गए हैं।

जबकि लगभग 60.6 लाख वोटरों के नाम अभी भी जांच के दायरे में हैं।

जिन लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए या फैसले के इंतजार वाली लिस्ट में हैं, उनके पास अभी भी चुनावी समीक्षा प्रक्रिया के जरिए अपना नाम दोबारा जुड़वाने का मौका है। पर एसआईआर ने पूरे पश्चिम बंगाल को पहले ही चिंता में डाल कर रखा है। और अब उस पर दो चरणों का चुनाव शायद ममता का ब्लड प्रेशर बढ़ाने के लिए काफी है।

 

सवाल यही है कि राज्य में सत्ताधारी पार्टी ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस, एक बार फिर ममता बनर्जी के नेतृत्व में चुनाव लड़ रही है। ममता बनर्जी साल 2011 से राज्य की मुख्यमंत्री हैं।

अगर ममता बनर्जी अपनी पार्टी को फिर से जीत दिलाती हैं, तो वह पश्चिम बंगाल की पहली ऐसी मुख्यमंत्री बन सकती हैं, जिसने लगातार चार बार विधानसभा चुनाव जीतकर इतिहास बनाया हो। ऐसी जीत उन्हें देश के राजनीतिक इतिहास में सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाली महिला नेताओं में से एक बना देगी। लेकिन शायद अब ममता को भी यह भरोसा नहीं होगा कि उनके लिए इतिहास बनाना संभव है… यह चुनाव उनके जीवन का सर्वाधिक चुनौती भरा चुनाव बन गया है। क्योंकि आजादी के बाद यह पहला मौका है जब पश्चिम बंगाल में कुल वोटरों की संख्या पिछले चुनावों के मुकाबले कम हुई है और ममता बनर्जी की जीत हार में यह कमी बड़ा संकट पैदा कर सकती है। कुल मिलाकर, पश्चिम बंगाल में सब कुछ चौंकाने वाला है… प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुनाव प्रचार में ममता सरकार को क्रूर साबित कर रहे हैं तो यह वक्त भी ममता के प्रति क्रूरता भरा लग रहा है।

 

 

 

 

लेखक के बारे में –

कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।

वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश‌ संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।