Bhopal Municipal Corporation Budget: इस बार ‘ग्रीन’ बांड के आने के आसार नहीं…

37

Bhopal Municipal Corporation Budget: इस बार ‘ग्रीन’ बांड के आने के आसार नहीं…

भोपाल। नगर निगम ने राजस्व बढ़ाने और ‘स्मार्ट सिटी’ की परिभाषा को नया रंग देने के लिए ‘ग्रीन बांड’ का सहारा लेने की जो तैयारी शुरू की थी,उसके इस बार के बजट में आने के आसार कम नजर आ रहे हैं क्योंकि इसके लिये उसका आर्थिक ढांचा तैयार नहीं है।इससे पहले इंदौर की तर्ज पर भोपाल में भी ग्रीन बांड जारी करने की योजना बनायी थी। इंदौर ने पिछले साल 300 करोड़ रूपये ग्रीन बांड के जरिए जुटाये थे। लेकिन भोपाल में इसकी स्थिति उलट है। एक्सपर्ट का कहना है कि क्या यह शहर के लिए फायदेमंद साबित नहीं होगा और इससे निगम का कर्ज को और बढ़ जाएगा। इसी कारण गत दिनों बजट के लिये हुई एमआईसी की बैठक में विचार विमर्श नहीं किया गया।

 ग्रीन बांड की आड़ में चुनौतियां

क्रेडिबिलिटी का संकट: ग्रीन बांड लाने के लिए नगर निगम की रेटिंग अच्छी होनी चाहिए। यदि शहर का राजस्व पहले ही कम है और उस पर पुराना कर्ज है, तो क्या बांड सफल होंगे?। उदाहरण के लिए, मध्य प्रदेश के निगमों के लिए ग्रीन बांड प्रोत्साहन हासिल करना चुनौतीपूर्ण माना गया है।

कर्ज का बोझ

ग्रीन बांड एक तरह का ‘ऋण’ है, जो निवेशकों से लिया जाता है। यदि इस पैसे से बुनियादी ढांचे की जगह केवल दिखावटी काम (जैसे पार्कों का सौंदर्यीकरण) हुए, तो इसे चुकाने के लिए नगर निगम जनता पर टैक्स (जैसे प्रॉपर्टी टैक्स) का बोझ बढ़ा सकता है। इससे पहले भी निगम इन पर काफी पैसे खर्च कर चुका है लेकिन परिणाम कुछ खास सामने नहीं आए हैं।