
संघ की प्रदेश समिति करेगी सत्ता और संगठन से समन्वय,प्रदेश प्रचारक-कार्यवाह की होगी अहम भूमिका
भोपाल: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मध्य प्रदेश में अपने संगठनात्मक ढांचे में प्रस्तावित बदलाव के तहत सत्ता और संगठन (भाजपा) से समन्वय की जिम्मेदारी एक नई समिति को दी जाएगी। यह समिति विशेष रूप से राज्य सरकार के साथ संवाद, समन्वय और संपर्क का काम संभालेगी। इसके साथ ही भाजपा से भी समन्वय और संवाद की जिम्मेदारी इस सामिति के पदाधिकारियों के पास ही होगी।
प्रदेश में विधानसभा चुनाव से करीब पौने दो साल पहले यह समिति सक्रिय हो जाएगी। ऐसे में इस समिति का अगले विधानसभा चुनाव में भाजपा की ओर से अहम भूमिका हो सकती है।
संघ के भीतर तय प्रारूप के अनुसार, इस समिति में प्रदेश स्तर पर प्रमुख लोगों को शामिल किया जाएगा। जिनमें प्रदेश प्रचारक और प्रदेश कार्यवाह की भूमिका सबसे मजबूत मानी जा रही है। यही नेतृत्व सरकार के साथ तालमेल बैठाने, सत्ता और भाजपा संगठन के नीतिगत विषयों पर संवाद करने और संगठन की बात प्रभावी तरीके से शासन तक पहुंचाने का काम करेगा। जबकि अब तक प्रांत व्यवस्था को संभाग में बदला जाना है, जो काम प्रांत देखता था, वहीं काम संभाग की कार्यकारिणी करेगी।
संघ की यह व्यवस्था मार्च 2027 से लागू की जाएगी। यानि ठीक एक साल बाद यह व्यवस्था लागू होगी। दरअसल संघ के चुनाव 2024 में हुए थे। जो तीन साल के लिए थे। वर्ष 2027 से संघ और मध्य प्रदेश सरकार के बीच संवाद अधिक संस्थागत और व्यवस्थित रूप में देखने को मिलेगा। अभी तक यह समन्वय अनौपचारिक स्तर पर होता रहा है, लेकिन नई व्यवस्था में इसे स्पष्ट जिम्मेदारियों के साथ औपचारिक स्वरूप दिया जा सकता है।
ऐसा माना जा रहा है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य केवल सत्ता और भाजपा के साथ संवाद को सुचारु बनाना है।





