
Congress: न दिग्विजय, न जीतू… मीनाक्षी नटराजन की राज्यसभा में उम्मीदवारी लगभग तय
भोपाल: मध्यप्रदेश से राज्यसभा की सीट को लेकर राहुल गांधी कैंप से सीधी जुड़ी नेता पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन की उम्मीदवारी लगभग तय मानी जा रही है। मीनाक्षी नटराजन तेलंगाना की प्रभारी है। उनकी दिल्ली में लॉबिंग तेज हो गई है। वे दिल्ली में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के सपंर्क में हैं। दरअसल शुक्रवार को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सार्वजनिक रूप से राज्यसभा में जाने से इनकार कर दिया है, इससे भी यही संकेत मिलते हैं कि कांग्रेस इस बार एक सीट पर महिला नेताओं को उम्मीदवार बना सकती है। इधर कांग्रेस ने क्रॉस वोटिंग न हो, इसे लेकर अभी से संगठन स्तर पर प्रयास शुरू कर दिए हैंं। जल्द ही कांग्रेस विधायकों की प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी हरीश चौधरी के साथ महत्वपूर्ण बैठक हो सकती है।
इसलिए दावेदारी है मजबूत
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का रुख अब भी स्पष्ट नहीं है। वे दो बार राज्यसभा का कार्यकाल पूरा कर चुके हैं और 2019 और 2024 के दो लोकसभा चुनाव हार चुके हैं। उनकी उम्र भी 70 पार हो चुकी है, ऐसे में उन्हें तीसरी बार राज्यसभा में जाने का मौका देने में राष्ट्रीय नेतृत्व बच सकता है।
सामाजिक समीकरण भी इस चयन में अहम भूमिका निभा सकते हैं, पिछड़ा वर्ग से अशोक सिंह पहले ही राज्यसभा में प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। ऐसे में पार्टी एक ही वर्ग से दो नेताओं को भेजने से बच सकती है। यही कारण है कि जीतू पटवारी, कमलेश्वर पटेल और अरुण यादव के नाम चर्चा में होने के बावजूद उनकी राह आसान नहीं मानी जा रही। आदिवासी वर्ग से प्रतिनिधित्व को लेकर भी पार्टी के सामने विकल्प मौजूद हैं। वरिष्ठ नेता कांतिलाल भूरिया का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। हालांकि उनके बेटे विक्रांत भूरिया पहले ही संगठन में राष्ट्रीय स्तर की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। ऐसे में एक ही परिवार को दो महत्वपूर्ण पद देने पर सवाल खड़े हो सकते हैं। वहीं प्रदेश में कांग्रेस की वर्तमान राजनीतिक स्थिति को देखते हुए यह लगभग तय माना जा रहा है कि पार्टी किसी बाहरी चेहरे पर दांव नहीं लगाएगी।
जल्द ही होगी विधायकों के साथ बैठक
प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी हरीश चौधरी को इस संबंध में जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वे विधायकों को साध कर रखे, ताकि राज्यसभा चुनाव में किसी भी स्थिति में क्रॉस वोटिंग न हो सके। इसके लिए चौधरी अगले एक पखवाड़े में भोपाल आकर विधायकों की बैठक ले सकते हैं। बताया जाता है कि यह बैठक सीधे तौर पर राज्यसभा चुनाव के लिए नहीं बुलाई जाएगी,लेकिन विधायकों को एकजुट रखने के लिए यह बैठक अहम होगी।





