Eye Donation : रतलाम में नेत्रम संस्था के प्रयासों से 1 घंटे में 2 नेत्रदान, मृतक के परिजनों की सहमति से जगमगाएंगी 4 जिंदगियां!

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Eye Donation : रतलाम में नेत्रम संस्था के प्रयासों से 1 घंटे में 2 नेत्रदान, मृतक के परिजनों की सहमति से जगमगाएंगी 4 जिंदगियां!

Ratlam : जब संवेदनाएं जीवित होती हैं, तब समाज में बदलाव की रोशनी स्वतः फैलती है। नेत्रम संस्था के प्रयासों से महज 1 घंटे के भीतर 2 नेत्रदान संपन्न होना न केवल एक उपलब्धि है, बल्कि यह पूरे समाज के लिए प्रेरणा, जागरूकता और मानवता का जीवंत संदेश भी है। इस पुनीत कार्य से 5 नेत्रहीन व्यक्तियों के जीवन में उजाला आने का मार्ग प्रशस्त हुआ है। मृतक परिवार में गहरे दुःख के क्षणों के बावजूद भी परिजनों द्वारा लिया गया नेत्रदान का निर्णय यह दर्शाता है कि सच्ची श्रद्धांजलि वही है, जो किसी और के जीवन को संवार दे।

पहला नेत्रदान प्रतापनगर निवासी श्रीमती बिटौला बाई भदौरिया के निधन के पश्चात उनके परिजनों- सुपुत्र दिनेश सिंह, पुत्रवधू रीता, पौत्री शिवांगी, शालिनी भदौरिया की सहमति से संपन्न हुआ। इस प्रेरणादायक निर्णय के लिए सुशील मीनू माथुर एवं शैलेन्द्र सिंह भदौरिया ने परिवार को जागरूक एवं प्रेरित किया।

 

 

इसी तरह दूसरा नेत्रदान काटजू नगर निवासी महेशचंद्र लड्डा के निधन के पश्चात उनके परिजनों सुपुत्र निखिल लड्डा एवं परिवार की सहमति से संपन्न हुआ। इस पुण्य कार्य के लिए शीतल भंसाली ने परिवार को प्रेरित कर समाज के सामने एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया। नेत्रम संस्था के सदस्य एवं भारतीय रेडक्रास सोसायटी के डायरेक्टर हेमंत मूणत ने बताया कि सहमति प्राप्त होते ही बड़नगर गीता भवन न्यास बड़नगर के नेत्रदान प्रभारी डॉ. जीएल ददरवाल को तुरंत सूचित किया गया। उनके मार्गदर्शन में बंसं राठौड़ ने समय पर पहुंचकर अत्यंत सम्मान, संवेदनशीलता और समर्पण के साथ नेत्र संरक्षण की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूर्ण किया गया।

इस सेवा कार्य में ओमप्रकाश अग्रवाल, नवनीत मेहता, शीतल भंसाली, प्रशांत व्यास, शलभ अग्रवाल, सुशील मीनू माथुर, भगवान ढलवानी, शिवम माथुर, रितेश छाजेड़, सुरेन्द्र मूंदड़ा, महेन्द्र मूंदड़ा, अर्चित डागा, शैलेन्द्र सिंह भदौरिया, अंकित, धन सिंह राठौर एवं माया सोलंकी सहित अनेक समाजसेवी मौजूद रहें, जिन्होंने इस अभियान को सफल बनाने में अपना योगदान दिया। अंत में नेत्रम संस्था एवं गीता भवन न्यास बड़नगर द्वारा परिजनों को प्रशस्तिपत्र भेंटकर उनके इस महान निर्णय को सम्मानित किया गया!