सिजेरियन ऑपरेशन में लापरवाही: प्रसूता के पेट में नैपकिन छूटने के मामले में डॉक्टर और नर्सिंग ऑफिसर निलंबित

81
Suspend

सिजेरियन ऑपरेशन में लापरवाही: प्रसूता के पेट में नैपकिन छूटने के मामले में डॉक्टर और नर्सिंग ऑफिसर निलंबित

 

खरगोन : मध्य प्रदेश के खरगोन जिला अस्पताल में सिजेरियन ऑपरेशन के दौरान गंभीर लापरवाही का मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने कड़ा कदम उठाते हुए संबंधित डॉक्टर और नर्सिंग ऑफिसर को निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई जांच रिपोर्ट में दोनों की लापरवाही प्रमाणित होने के बाद की गई।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी दौलत सिंह चौहान ने बताया कि लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के आयुक्त के निर्देश पर जिला अस्पताल में पदस्थ स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. मोहित गुप्ता को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। वहीं, क्षेत्रीय संचालक स्वास्थ्य सेवाएं, इंदौर संभाग द्वारा नर्सिंग ऑफिसर दिव्या वर्मा को भी निलंबित किया गया है।

जानकारी के अनुसार, यह मामला मार्च माह का है। भीकनगांव तहसील के ग्राम सेल्दा निवासी 30 वर्षीय मनीषा घोरमाड़े को 16 मार्च को प्रसव पीड़ा होने पर पहले भीकनगांव के शासकीय अस्पताल ले जाया गया, जहां से उसे खरगोन जिला अस्पताल रेफर किया गया। 17 मार्च को जिला अस्पताल में उसका सिजेरियन ऑपरेशन किया गया, जिसमें उसने एक बालिका को जन्म दिया।

ऑपरेशन के बाद 21 मार्च को महिला को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई, लेकिन घर लौटने के बाद भी उसे लगातार पेट दर्द की शिकायत बनी रही। हालत में सुधार नहीं होने पर परिजन उसे इंदौर ले गए, जहां पहले शासकीय अस्पताल में जांच कराई गई। इसके बाद एक निजी अस्पताल में विस्तृत जांच के दौरान महिला के पेट में सर्जिकल नैपकिन होने का पता चला।

31 मार्च को महिला का दोबारा ऑपरेशन किया गया, जिसमें उसके पेट से नैपकिन निकाला गया। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि महिला ने इस बीच कोई अन्य ऑपरेशन नहीं कराया था, जिससे यह पुष्टि हुई कि नैपकिन पहले हुए सिजेरियन ऑपरेशन के दौरान ही पेट में छूट गया था।

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला कलेक्टर भव्या मित्तल ने जांच के आदेश दिए थे। गठित जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में डॉ. मोहित गुप्ता और नर्सिंग ऑफिसर दिव्या वर्मा की लापरवाही को स्पष्ट रूप से जिम्मेदार ठहराया। इसके आधार पर उच्चाधिकारियों को कार्रवाई की अनुशंसा भेजी गई, जिसके बाद निलंबन की कार्रवाई की गई।

इस घटना ने सरकारी अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा और सर्जिकल प्रोटोकॉल के पालन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऑपरेशन के दौरान उपयोग की जाने वाली सामग्री की गिनती सुनिश्चित करना अनिवार्य प्रक्रिया है। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे।