
Parliament House: संसद की कार्यवाही को प्रत्यक्ष रूप से देखना, प्रीति चौहान का यादगार अनुभव रहा
प्रीति चौहान
अगर आप भी संसद में जाकर लोकसभी कार्यवाही देखना चाहते हैं तो आप ऐसा कर सकते हैं. इसके लिए आपको किसी एक सांसद की मदद से पास बनवाना होता है और उससे आप कार्यवाही देखने जा सकते हैं.या सांसद के साथ जा सकते हैं ,मुझे यह शुभ अवसर हमारे इंदौर के लोकप्रिय सांसद शंकर लालवानी जी के साथ संसद की कार्यवाही को प्रत्यक्ष रूप से देखने का अवसर मिला। यह अनुभव मेरे जीवन के सबसे यादगार पलों में से एक बन गया।

संसद में प्रवेश करुँगी कभी यह मैंने कभी कल्पना भी नहीं की थी ,यह भी सच है कि कल्पना भले ही ना की थी पर मन एन कहीं यह इच्छा सुप्त थी कि संसद में जाकर लोकसभा की कार्यवाही को लाइव देखें.पता चला संसद में जाने का एक तय प्रोसेस है जिसके जरिए, आप कार्रवाई देखने के लिए पास बनवा सकते हैं और कार्यवाही देख सकते हैं.यह अवसर मुझे उपलब्ध हुआ और मैं यह यादगार अनुभव अब आप सभी से शेयर कर रही हूँ.

जब मैं सदन के अंदर प्रवेश कर रही थी, तो वहाँ का वातावरण मेरे लिए बिल्कुल नया और अद्भुत था।नई इमारत त्रिभुजाकार है और पुरानी इमारत के बगल में स्थित है. भवन के तीनों भाग भारत के राष्ट्रीय प्रतीकों , बरगद के वृक्ष , मोर और कमल पर आधारित हैं .दीवारों और छत पर बनी मोर की आकृतियाँ, उनकी सुंदर सजावट और बेंचों पर उकेरी गई मोर-थीम—सब कुछ बहुत आकर्षक और भव्य लग रहा था।

यह नया संसद भवन है , जो सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना का हिस्सा है, 64,500 वर्ग मीटर में निर्मित यह त्रिकोणीय, चार मंजिला इमारत लोकसभा (888 सीटें – मोर थीम) और राज्यसभा (384 सीटें – कमल थीम) के साथ उन्नत तकनीक से सुसज्जित है। इसका उद्घाटन 28 मई 2023 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया गया था।
- इसका डिजाइन अहमदाबाद की एचसीपी डिजाइन प्लानिंग एंड मैनेजमेंट ने तैयार किया है और टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड द्वारा इसका निर्माण किया गया।
- संयुक्त सत्र के दौरान लोकसभा कक्ष में 1,280 से अधिक सदस्य बैठ सकते हैं।
- इसमें तीन मुख्य द्वार हैं – ज्ञान द्वार, शक्ति द्वार, और कर्म द्वार। इसके अलावा, अश्व द्वार, गज द्वार, गरुड़ द्वार आदि के माध्यम से भारतीय संस्कृति को दर्शाया गया है।
- लोकसभा को राष्ट्रीय पक्षी मोर और राज्यसभा को राष्ट्रीय फूल कमल की थीम पर सजाया गया है।
इस विशाल परिसर में प्रवेश के बाद सदन में प्रवेश किया .इसमें लोकसभा और राज्यसभा है जो भारत की द्विसदनीय संसद में क्रमशः निचले और ऊपरी सदन हैं.सदन के भीतर मेरी नजरें सभी जनप्रतिनिधियों को देख रही थीं, लेकिन मन ही मन मैं प्रधानमंत्री मोदी जी को देखने की प्रतीक्षा कर रही थी। जैसे ही वे सदन में प्रवेश करते हैं, मेरा मन खुशी से भर उठता है। जब वे सदन को संबोधित करते हैं, उनकी भाषा, उनकी अभिव्यक्ति और उनका व्यक्तित्व मुझे बहुत प्रभावित करता है। उस क्षण मुझे महसूस होता है कि देश ने सच में एक योग्य और प्रभावशाली नेता को चुना है।
कार्यवाही के अंत में ‘वंदे मातरम्’ के साथ वह सत्र समाप्त होता है, और फिर मोदी जी के बाहर जाने के बाद हम भी सदन से बाहर निकलते हैं। इसके बाद शंकर लालवानी जी हमें आगे ले जाते हैं और संसद भवन की विभिन्न गैलरियों का भ्रमण कराते हैं।
संसद को देखते हुए मुझे ‘समुद्र मंथन’ की छवि याद आती है। जैसे समुद्र मंथन से अमृत निकला था, वैसे ही इस लोकतंत्र के मंदिर में विचारों का मंथन होता है और उससे देश के हित में अनेक योजनाएँ और निर्णय निकलते हैं।
सांसद जी ने अपने व्यस्त समय में भी हमें हर एक बात बहुत धैर्य और स्पष्टता से समझाई। इसके बाद वे हमें पुरानी संसद की ओर ले गए, जहाँ संसद पर हुए हमले के निशान आज भी मौजूद हैं। उन निशानों को देखकर मन व्याकुल हो उठा।पुराना संसद भवन , जिसे आधिकारिक तौर पर संविधान सदन के नाम से जाना जाता है, 26 जनवरी 1950 से 18 सितंबर 2023 तक भारत की संसद का मुख्यालय था। लगभग 73 वर्षों तक भारत की द्विसदनीय संसद है .
फिर हम उस ऐतिहासिक कक्ष में पहुँचे, जहाँ पहली बार हमारा संविधान लागू हुआ था। जी हाँवह ऐतिहासिक कक्ष जहाँ भारतीय संविधान सभा की बैठकें हुईं और जहाँ पहली बार हमारा संविधान अपनाया गया, वह सेंट्रल हॉल है, जो अब ‘संविधान सदन’ के नाम से जाना जाता है।
उस स्थान की गरिमा और महत्व को महसूस करते हुए ऐसा लगा मानो मैं उस ऐतिहासिक पल को स्वयं जी रही हूँ।
यह पूरा अनुभव मेरे लिए न केवल प्रेरणादायक रहा, बल्कि जीवनभर याद रहने वाला एक अनमोल स्मरण भी बन गया।
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