
विशेष संपादकीय
क्रूज बना काल: अलर्ट के बाद भी बरगी डैम में क्यों उतारा क्रूज…? 9 मौतों का जिम्मेदार कौन!
स्वाति तिवारी
तेरे दामन में सितारे हैं तो होंगे ऐ फ़लक
मुझ को अपनी माँ की मैली ओढ़नी अच्छी लगी
बीस साल पुराना था वह कैटामारन क्रूज ? सुरक्षा मानकों को किया नजरअंदाज? लाइफ जैकेट ने लाइफ क्यूँ नहीं बचाई ? बरगी में मौत के जिम्मदार कौन? बहुत सारे सवाल दिमाग का भुरता बना रहे हैं , पर सबसे बड़ा सवाल यह कि इन प्रश्नों का जवाब कौन देगा। और सबसे बड़ा सवाल- इस बात का जवाब कौन देगा कि तूफान और बारिश के अलर्ट के बावजूद भी आखिर सरकारी क्रूज को चलाने की हिमाकत किसने की और ऐसी क्या आवश्यकता थी? क्या सरकार को इतने धन की आवश्यकता थी कि एक दिन अगर क्रूज नहीं चलता तो कोई बड़ा नुकसान हो जाता? ये प्रश्न पूछे आखिर किससे पूछे ?
हर किसी के जेहन यही बात आ रही है कि यह अनहोनी घटना कैसे हो गई? क्या योजना में खामी थी या उसके क्रियान्वयन में आखिर लापरवाही किसकी?जबलपुर बरगी बांध क्रूज हादसे में मासूम को सीने से चिपकाए माँ बेटे का शव तैरता मिला है जो आत्मा को अंदर तक हिला देने वाला दृश्य है, कि किस तरह मां अपने बेटे को सीने से चिपकाए हुए है।बदले मौसम का कहर और मां की ममता की ये तस्वीर, हर दिल को झकझोर रही है। इस तस्वीर में सिर्फ़ शव नहीं, ममता की वो पराकाष्ठा है जो मौत से भी नहीं डरी और अपने बच्चे को खुद से अलग नहीं होने दिया. यह केवल एक तस्वीर नहीं, बल्कि माँ के निस्वार्थ प्रेम, त्याग और अटूट ममता का जीवंत प्रमाण है.ये तस्वीर सरकारी व्यवस्थों पर भरोसे को दिखाती है कि लाइफ जैकेट पहनी माँ बच्चे को भी उसी में फंसा लेती है उसके पास लाइफ जैकेट है वह अपने बच्चे को भी बचा लेगी . यह तस्वीर माँ और बच्चे का आखरी आलिंगन है जो स्थाई हो गया है ,यह वह तस्वीर है जो कहती है बच्चा माँ से लिपट कर खुद को सुरक्षित महसूस करता है ,यह वो तस्वीर है जिसमें बच्चे के और माँ के चहरे पर जो भाव है उसके लिए तो मेरे शब्दकोष में मुझे कोई शब्द ही नहीं मिल रहे.यह तस्वीर दुनिया की हर माँ को जार जार रुला रही है . लेकिन तस्वीर एक दिन धूंधली हो जायगी ,हम सबक नहीं लेंगे ,हम हादसों से सबक लेते ही कहाँ है ,दुर्घटना के खाते में डाल फिर लापरवाह हो जाते है .सूत्रों के मुताबिक हादसे के वक्त क्रूज में करीब 40 लोग सवार थे।टिकट रिकॉर्ड में 29 वयस्कों का ही उल्लेख है क्योंकि बच्चों के टिकट नहीं लिए जाते थे। जिससे सवार लोगों की वास्तविक संख्या अब तक स्पष्ट नहीं हो पाई है।

आज जो दृश्य सोशल मीडिया पर दिख रहे हैं वे एक बार फिर दिमाग में भी 45 डिग्री की आग उगल रहे हैं। माँ बच्चे छुट्टियों का आनंद लेने गए थे . क्रूज जब डूबने लगा तो इस माँ ने बेटे को लाइफ जैकेट के अंदर लिपटा लिया ताकि वो डूबने न पाए. कितनी भोली होगी वह माँ सरकारी खरीदी के लाइफ जैकेट पर भरोसा करके अपने छोटे बच्चे को भी उसी में लपेट बैठी ,और दोनों ही ऐसे लिपटे लिपटे मौत की जैकेट में बंधे चले गए ? ये तस्वीरें खुद सवाल कर रही हैं हम सब से कि सरकारी लापरवाही का जिम्मेदार कौन ? मैया नर्मदा आपसे भी सवाल है माओं को गोद में लिए बच्चों के साथ कैसे हर लिया आपने ?आपकी छाती पर जो क्रूज सरकार चला रही थी वो तो कैटामारन क्रूज था ?

कैटामारन क्रूज दो समानांतर पतवारों (hulls) वाली एक स्थिर और शानदार नाव है, जो बेहतर स्थिरता, विशाल डेक स्पेस और आरामदायक यात्रा प्रदान करती है.क्या इतनी आराम दायक कि तूफ़ान का मौसम विभाग का अलर्ट भी उसके लिए कोई मायने नहीं रखता ?आधुनिक कैटामारन में सकारात्मक उत्प्लावन (positive buoyancy) तकनीक होती है, जिससे यह पलटने पर भी डूबती नहीं है और पानी की सतह पर ही बनी रहती है, जिससे सुरक्षा बढ़ जाती है। इसके अलावा, इसका उथला ड्राफ्ट इसे तटीय और कम गहरे पानी वाले क्षेत्रों में भी सुरक्षित संचालन योग्य बनाता है। अधिकतर कैटामारन में दो इंजन होते हैं, जिससे किसी एक इंजन के खराब होने पर भी सुरक्षित संचालन संभव रहता है.बावजूद इसके यह डूबा कैसे ?और अगर डूबा है तो यह कैटामारन क्रूज था भी या नही /
बताया जा रहा है कि हादसा उस समय हुआ जब नर्मदा नदी पर बरगी डैम में पर्यटकों से भरा क्रूज़ तेज आंधी और खराब मौसम के कारण पलट गया और कुछ ही मिनटों में पूरी तरह डूब गया। शुरुआती जानकारी के अनुसार, तेज हवाओं के चलते क्रूज़ में पानी भर गया और स्थिति पूरी तरह बेकाबू हो गई। फिर वही सवाल- जब मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी किया था, तब भी क्रूज़ को जिसमें छोटे-छोटे बच्चे भी मौजूद थे, गहरे पानी में क्यों उतारा गया? सुरक्षा मानकों की अनदेखी क्यों की गई की गई? विभाग का यह जिम्मा कौन लेगा ? सभी शव क्या लाइफ जैकेट पहने हुए निकले ?नहीं ,तो फिर लाइफ जैकेट नाव में कम थे ? क्रूज़ संचालन के दौरान सभी यात्रियों को लाइफ जैकेट मुहैया क्यों नहीं कराए गए? किसी भी आपात स्थिति के लिए बैकअप प्लान, छोटी नावें या गोताखोर मौजूद क्यों नहीं थे? इतना बड़ा पर्यटन स्थल होने के बावजूद न तो पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम थे और न ही आपातकालीन बचाव दल तैयार था, क्यों? जब हम जल सपोर्ट का प्रचार करते हैं ,जब हम जल टूरिजम चला रहे हैं करोड़ों रूपये के विभाग हैं यह ! तो ये लापरवाहियां कैसे हो जाती हैं ? आगरा के गौताखोर बुलाने पड़े क्यों ,योजना आपकी थी तो खौताखोर इर वैकल्पिक व्यवस्थाएं भी तो सरकार को ही करना चाहिए थी ना ! लाइफ दे नहीं सकते तो पर्यटन के नाम पर लाइफ लेने वाला कौन ? ये हादसा व्यवस्थाओं के उन छिद्रों को खोल रहा हैं जो बताती हैं की नाव डूबने के जिम्मेदार इन्ही छेदों से एक दिन निकल जायेंगे। लूप होल ही तो होते है जिनसे कानून भी पकड नहीं पता तो ये तो सरकारी लूप होल हैं किसको और कैसे ? जिसके घर के लोग गए ,जिनके बच्चे गए उनके दुःख की कल्पना भी नहीं की जा सकती। लापरवाही का नतीजा कल मौसम बेहद ख़राब रहा, आंधी तूफान ओले गिरे,फिर भी पर्यटक और चालक दोनों ही अनभिज्ञ रहे आखिर ऐसा कैसे हो सकता!
बरगी डेम, जबलपुर की घटना ने यह स्पष्ट कर दिया कि केवल लाइफ जैकेट या औपचारिक सुरक्षा उपाय पर्याप्त नहीं होते.नागरिकों को भी जागरूकता दिखानी चाहिए .रोकना चाहिए आपात स्थिति में .
हवा दुखों की जब आई कभी ख़िज़ाँ की तरह
मुझे छुपा लिया मिट्टी ने मेरी माँ की तरह





