
पुलिस प्रशिक्षण नीति को मिली मंजूरी, नए दौर की चुनौतियों से निपटने पुलिसकर्मी होंगे तैयार
भोपाल: मध्य प्रदेश पुलिस ने अपनी पहली व्यापक पुलिस प्रशिक्षण नीति को मंजूरी देकर पुलिसिंग के ढांचे में बदलाव की शुरूआत कर दी है। पुलिस महानिदेशक द्वारा स्वीकृत इस नीति का उद्देश्य बदलते समय के अनुरूप पुलिस बल को तकनीकी रूप से सक्षम, पेशेवर और जवाबदेह बनाया जाएगा।
अब तक प्रदेश में पुलिस प्रशिक्षण काफी हद तक स्वतंत्रता पूर्व के मॉडल और ब्रिटिश पुलिस मैनुअल पर आधारित रहा है, जिसमें समय-समय पर सीमित संशोधन किए गए। राज्य की अपनी स्वतंत्र प्रशिक्षण नीति का अभाव लंबे समय से महसूस किया जा रहा था। नई नीति इस कमी को दूर करते हुए अब पुलिस आधुनिक चुनौतियों के अनुरूप प्रशिक्षण का नया तरीखा अपनाएगी।
नीति में साइबर अपराध से निपटने पर विशेष जोर दिया गया है। इसके तहत पुलिसकर्मियों को सीसीटीएनएस, आईसीजेएस और इन्वेस्टिगेशन ट्रैकिंग सिस्टम जैसे राष्ट्रीय पोर्टलों के उपयोग का प्रशिक्षण दिया जाएगा। साथ ही, आरक्षक, उप-निरीक्षक और जांच अधिकारियों के लिए भूमिका-आधारित तकनीकी के अलग-अलग मॉड्यूल तैयार किए गए हैं। आरक्षकों को साइबर हाइजीन और प्रारंभिक प्रतिक्रिया, जबकि जांच अधिकारियों को डिजिटल साक्ष्य संकलन, मेटाडेटा विश्लेषण और डिजिटल चेन आफ कस्टडी की विशेषज्ञता दी जाएगी।
प्रशिक्षण को और प्रभावी बनाने के लिए तकनीकी विश्वविद्यालयों और लॉ संस्थानों के साथ साझेदारी कर साइबर कानून, डिजिटल फोरेंसिक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित पुलिसिंग के प्रमाणन कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे। इसके अलावा स्मार्ट क्लासरूम, मोबाइल लर्निंग और वर्चुअल रियलिटी आधारित सिमुलेशन को भी प्रशिक्षण में शामिल किया जाएगा।
शारीरिक दक्षता और मानसिक संतुलन को मजबूत करने के लिए मार्शल आर्ट्स को भी प्रशिक्षण का हिस्सा बनाया गया है। इसमें लाठी, क्राव मागा और मल्लखंब जैसी तकनीकों के जरिए आत्मरक्षा, भीड़ नियंत्रण और क्लोज-क्वार्टर कॉम्बैट में जवानों को ट्रैंड किया जाएगा।





