
विजय शाह को क्यों बचा रही है सरकार ?
राकेश अचल की विशेष रिपोर्ट
मध्य प्रदेश सरकार मंत्री विजय शाह को लेकर शीर्ष अदालत की आलोचना तो सह रही है लेकिन अदालत के बार-बार कहने के बावजूद विजय शाह के खिलाफ मुकदमा चलाने की इजाजत नहीं दे रही. शाह पर सेना की कर्नल सोफिया के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने का आरोप हे.
कर्नल सोफिया कुरैशी के खिलाफ मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री कुंवर विजय शाह की एक टिप्पणी पर सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर सुनवाई करते हुए मध्य प्रदेश सरकार को फटकार लगाई है। शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार के उस फैसले में देरी पर आपत्ति जताई, जिसमें उसे अपने मंत्री कुंवर विजय शाह पर मुकदमा चलाने की मंजूरी देनी थी.
आपको बता दें कि इस प्रकरण में मप्र हाईकोर्ट ने एक एस आई टी गठित करने के निर्देश दिए थे.एस आई टी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इस मामले की जांच की थी और कुंवर विजय शाह पर मुकदमा चलाने के लिए सरकार से मंजूरी मांगी थी। मामला बीते साल ‘ का है. उस समय ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान मीडिया को जानकारी देने वाली कर्नल सोफिया कुरैशी के बारे कुंवर विजय शाह ने आपत्तिजनक टिप्पणी की थी।।
भारत के मुख्य न्यायाधीश सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने कहा कि एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम ने कुंवर विजय शाह पर मुकदमा चलाने की मंजूरी के लिए जो अनुरोध किया था, उस पर फैसला दो हफ्ते पहले ही आ जाना चाहिए था। अब सीजेआई सूर्यकांत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अब बस हमारे आदेश का पालन करें। बहुत हो चुका.
शीर्ष अदालत ने कहा कि मंत्री विजय शाह की ओर से पूरे मामले में सबसे पहले तो माफी मांगी जानी चाहिए थी। लेकिन ऐसा तभी हुआ जब हमने इस मामले का संज्ञान लिया। इस मामले को चार हफ्ते बाद फिर से सुना जाएगा.
सुप्रीम कोर्ट ने ये टिप्पणी तब की है जब सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि मध्य प्रदेश के मंत्री पर मुकदमा चलाने की मंजूरी पर फैसला अभी भी लंबित है। तुषार मेहता ने यह भी कहा कि शाह की टिप्पणियों का शायद गलत मतलब निकाला गया हो।
सॉलिसिटर जनरल मेहता ने कहा कि कुंवर विजय शाह ने जो कहा वह दुर्भाग्यपूर्ण था। संभवतः वह महिला अधिकारी की तारीफ करना चाहते थे, लेकिन वह अपनी बात ठीक से कह नहीं पाए। सीजेआई सूर्यकांत, एसजी तुषार मेहता के इस तर्क से सहमत नहीं हुए। सीजेआई ने कहा कि एक राजनेता के तौर पर, वह जानते हैं कि किसी महिला अधिकारी की तारीफ कैसे की जाती है।
जस्टिस बागची ने कहा कि एस आई टी की स्टेटस रिपोर्ट के अनुसार, शाह को ऐसी टिप्पणियां करने की आदत थी। शीर्ष कोर्ट ने आगे कहा कि राज्य को सभी परिस्थितियों पर विचार करके फैसला लेना चाहिए।
आप यदि भूल गए हों तो बता दूं कि कर्नल सोफिया कुरैशी उन सैन्य अधिकारियों में से एक थीं जिन्होंने बीते साल पाकिस्तान के खिलाफ भारत की सीमा पार कार्रवाई ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बारे में मीडिया को जानकारी दी थी.यह ऑपरेशन 22 अप्रैल को हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद चलाया गया था, जिसमें 26 भारतीय नागरिक मारे गए थे।
उसी दौरान एमपी के मंत्री कुंवर विजय शाह ने कहा था कि जिन्होंने हमारी बेटियों को विधवा बनाया, हमने उन्हें सबक सिखाने के लिए उन्हीं की एक बहन को भेजा। इस टिप्पणी को व्यापक रूप से कर्नल सोफिया कुरैशी और उनके धर्म से जोड़कर देखा गया.विजय शाह ने यह विवादित टिप्पणी अंबेडकर नगर (महू) के रायकुंडा गांव में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान की थी।
शाह की टिप्पणी की व्यापक आलोचना हुई और उन्हें पद से हटाने की मांगें उठीं। इसके बाद, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए मामला शुरू किया।शाह विवादों में घिरे रहने के लिए चर्चित हैं लेकिन हर बार माफी माफी मांगकर बच जाया करते हैं. लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ.
अब देखना है कि इस महीने में मप्र सरकार शाह को लेकर क्य फैसला लेती है.





