
इंदौर लेखिका संघ के सम्मान समारोह में डॉ विकास दवे ने सुनाए वियतनाम यात्रा के रोचक किस्से
वियतनाम की होटलों में मुफ्त में नहीं मिलता पानी
उनसे हमें सीखना चाहिए अपनी भाषा से प्रेम करना
🔺कीर्ति राणा
मप्र साहित्य अकादमी के निदेशक डॉ विकास दवे यदि कहें कि वियतनाम के आम लोगों में अपनी वियतनामी भाषा के प्रति जो लगाव है वैसा भारत में भी होना चाहिए तो उनकी बात पर विश्वास इसलिये भी करना पड़ेगा कि वियतनाम से वे हाल ही में दो सम्मान से अलंकृत होकर लौटे हैं।
डॉ दवे ने वियतनाम से जुड़े अपने रोचक अनुभव सुनाते हुए कहा मैं तो मद्यपान करता नहीं लेकिन वहां कि सात सितारा होटल में मुझे यह देख कर ताज्जुब हुआ कि वहां फ्रिज में रखी रहने वाली ऐसी बोतलें तो निशुल्क थीं लेकिन पानी की बोतल बड़ी महंगी थी।

हमें एयरपोर्ट से होटल तक ले जाने के साथ ही शहर घुमाने के लिये जो ड्रायवर और दुभाषिया साथ था उनका पूरे रास्ते यह आग्रह रहता था कि आप पानी लीजिये, जबकि मैं पानी की बोतल साथ लेकर गया था। उनके बार बार आग्रह करने के बाद मैंने पानी के लिये हां कहा तो वह कार रोक कर समीप के स्टोर से पानी की बोतल खरीद कर लाया, शायद यह अतिथि सत्कार का तरीका ही था। वहां मैंने देखा हर जगह पानी की बोतल पर महंगा शुल्क था जबकि होटलों के बार में अंग्रेजी शराब निशुल्क थी। वहां कि होटलों में अपने यहां जैसा पानी मुफ्त में नहीं दिया जाता ग्राहकों को।

हमारे ड्रायवर से बात करने में मुझे परेशानी हो रही थी क्योंकि मैं हिंदी और वो वियतनामी में बात कर रहा था। उसने मेरा मोबाइल लिया और गूगल में कन्वर्टर वाला एप डाउनलोड कर दिया अब मैं उसकी और वो मेरी भाषा आसानी से समझ रहे थे। उसे इस बात पर ताज्जुब भी हो रहा था कि भारत से यहां आने वाले ज्यादातर लोग अपनी मातृभाषा की अपेक्षा अंग्रेजी में बात करना शान क्यों समझते हैं। वियतनाम घूमते हुए मैंने नोट किया कि वहां साइनबोर्ड से लेकर विज्ञापन बोर्ड तक से अंग्रेजी गायब है। उन्हें अपनी वियतनामी भाषा पर गर्व है यह समझ आया। अपनी भाषा के प्रति वहां के निवासियों में अत्यधिक श्रद्धा का भाव है। चार रात-तीन दिन में मैंने हर कदम पर इस भाषा प्रेम को देखा।
भौगोलिक दृष्टि से देखें तो वियतनाम का नक्शा केरल जैसा है। छोटा सा देश है, उस देश ने भी हमारी तरह अंग्रेजों से संघर्ष किया, सफलता पाई। उस देश ने गुलामी की भाषा अंग्रेजी को सिर पर नहीं बैठा कर रखा है। हमारे ड्रायवर को अंग्रेजी आती थी लेकिन वह बोलता नहीं था। उसने हम लोगों से बातचीत के लिए गूगल से वियतनामी टू हिंदी कन्वर्टर शुरु कर दिया।

साथ में डेनी नामक जो दुभाषिया साथ था, वो इस बात पर आश्चर्य चकित था कि लोग हिंदी बोलते-समझते हैं तो हिंदी की अपेक्षा अंग्रेजी में बात क्यों करते हैं। वह अपने देश के राष्ट्रपति से ज्यादा मोडी-मोडी करता रहता था। मैंने अपने देश के विपक्ष के एक बड़े युवा नेता का नाम पूछा तो बोला हू इज दिस।
गौरतलब है साहित्य अकादमी मध्यप्रदेश के निदेशक डॉ विकास दवे को वियतनाम में बंकिम चंद्र चटर्जी साहित्य सम्मान 2026 एवं कला के क्षेत्र में सहयोग और प्रोत्साहन देने के लिए स्थापित आचार्य भरत मुनि सम्मान 2026 प्रदान किया गया है। हिंदुस्तान आर्ट्स एंड म्यूजिकल सोसायटी द्वारा संस्कृति मंत्रालय, विदेश विभाग, भारत सरकार और वियतनाम स्थित भारतीय दूतावास के सहयोग से वियतनाम में हाल ही में एक महत्वपूर्ण आयोजन में यह सम्मान प्रदान किये गये। उन्हें मिले इन्हीं सम्मान पर इंदौर लेखिका संघ की अध्यक्ष डॉ स्वाति तिवारी ने उनका सम्मान समारोह अभिनव कला समाज के सभागृह में आयोजित किया था।
उनके इस सम्मान समारोह के अन्य अतिथि वक्ताओं में मंत्री तुलसी सिलावट, देअविवि पत्रकारिता विभागाध्यक्ष डॉ सोनाली नरगुंदे, मभा हिंदी साहित्य समिति के प्रधानमंत्री अरविंद जवलेकर, स्टेट प्रेस क्लब अध्यक्ष प्रवीण खारीवाल भी शामिल थे। डॉ सोनाली बेहद अच्छा और विषय मुताबिक बोलीं.





