पुरषोत्तम मास महात्म्य विशेष: शुभ महालय: पुरुषोत्तम मास (अधिकमास) 2026

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पुरषोत्तम मास महात्म्य विशेष: शुभ महालय: पुरुषोत्तम मास (अधिकमास) 2026

ज्योतिर्विद पंडित राघवेन्द्र रवीशराय गौड़

प्रस्तुति डॉ घनश्याम बटवाल मंदसौर

रविवार से पवित्र तिथि पर अधिक मास पुरषोत्तम मास का श्रीगणेश हो गया है जो आगामी जून तक रहेगा।
इस बार आठ साल बाद यह पुण्य पवित्र पुरषोत्तम मास शुभ प्रसंग बना है।

इस वर्ष 17 मई से 15 जून तक रहने वाले ‘अधिकमास’ का आध्यात्मिक महत्व और पौराणिक आधार के बारे में ज्योतिर्विद पंडित राघवेंद्ररवीश राय गौड़ ने बताया कि सनातन पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 का अधिक मास (मलमास) 17 मई से प्रारंभ होकर 15 जून, सोमवार को समाप्त होगा। चंद्र-सौर वर्ष के अंतर को संतुलित करने वाला यह विशेष मास ‘पुरुषोत्तम मास’ के नाम से प्रसिद्ध है। इसमें भगवान विष्णु की उपासना अत्यंत फलदायी मानी जाती है, पर मांगलिक कार्यों पर पूर्ण मनाही रहती है।

अधिक मास का वैज्ञानिक आधार

पंचांग चंद्रमा व सूर्य की गति पर आधारित है। सूर्य का सौर वर्ष 365 दिन 6 घंटे का होता है, जबकि चंद्र वर्ष 354 दिन का। इनके 11 दिनों के अंतर को भरने के लिए हर 32-33 माह (लगभग 3 वर्ष) में एक अतिरिक्त चंद्र मास आता है—यही अधिक मास। इस दौरान सूर्य किसी राशि में संक्रमण (संक्रांति) नहीं करता, अतः इसे ‘निष्क्रांति मास’ कहते हैं। प्राचीन ग्रंथ सृष्टि चक्र को संतुलित रखने का इससे प्रमाण देते हैं।

अधिकमासे विशेषेण विष्णुभक्त्या समर्चयेत्।
मलिनं तत्प्रसादेन शुद्धिं याति न संशयः।
(अधिक मास में विष्णु भक्ति से मलिन मास शुद्ध हो जाता है।)

अधिक मास के प्रकार

• संज्ञक अधिक मास: संक्रांति वाला (2026 में नहीं)
• असंज्ञक अधिक मास: बिना संक्रांति, जैसे यह वाला

महाभारत व भागवत पुराण में इसे भगवान विष्णु का निवास माना गया है। ग्रह स्थिति से नवीन प्रारंभ अशुभ, किंतु दान-पूजा से स्थिरता मिलती है।

पुरुषोत्तमं मासं विष्णोरयं विशेषतः स्मरामि नित्यमादौ चान्ते च सततं बुधैः
(श्रीमद् भागवत)
(पुरुषोत्तम मास में विष्णु का विशेष स्मरण करो।)

पुण्यकारी कार्य व पूर्ण दान सूची

यह आत्म-चिंतन का समय है। दान का फल 1,000 गुना बढ़ता है।

कृष्ण पक्ष में दान योग्य वस्तुएँ:

घी से भरा चांदी का दीपक, सोना या कांसे का पात्र, कच्चे चने, खारेक, गुड़, तुवर दाल, लाल चंदन, मीठा रंग, कपूर, केवड़े की धूप , केसर, कस्तूरी, गोरोचन, शंख, गरुड़ घंटी, मोती या मोती की माला, हीरा या पन्ना का नग।

शुक्ल पक्ष में दान योग्य वस्तुएँ:

मालपुआ, खीर से भरा पात्र, दही, सूती वस्त्र, रेशमी वस्त्र, ऊनी वस्त्र, घी, तिल-गुड़, चावल, गेहूं, दूध, कच्ची खिचड़ी, शक्कर, शहद, तांबे का पात्र, चांदी का नंदीगण।

सामान्य उपयोगी दान:

गर्मी के मौसम में मिट्टी के पात्र , जूते-चप्पल, अनाज, धन, कपड़े। शिव मंदिर में चंदन, बिल्व पत्र, दूध, दही, घी, जनेऊ आदि।

विशेष कार्य:

• भगवान विष्णु/सत्यनारायण की पूजा: (नमो भगवते वासुदेवाय) रोज़ एक माला जपें
• मलमास व्रत (फलाहार पर या एक समय अन्न ले कर रहें)
• विष्णु सहस्रनाम, शिव महिम्न आदि स्तोत्र पाठ
• पूर्वजों का आभार, प्रकृति संरक्षण

क्या न करें?

• विवाह, सगाई, मुंडन, गृहप्रवेश जैसे मांगलिक कार्य
• घर, कार, भूमि खरीद
• नया निर्माण या व्यापार शुरू
• उपवास तोड़ना, मांसाहार
उल्लंघन से शास्त्रीय दोष लग सकता है।

आधुनिक प्रासंगिकता

आज के व्यस्त जीवन में अधिक मास मानसिक शांति देता है। वैज्ञानिक दृष्टि से चंद्र-सूर्य चक्र को जोड़ता है, जो कृषि-मौसम पर निर्भर भारतीय संस्कृति के लिए आवश्यक है।
भगवान नारायण की कृपा प्राप्त करने के लिए सामूहिक भजन-कीर्तन आयोजित अवश्य करें।