Humble Tribute : जनसंघ के दीपक को रोशन करने से कमल खिलाने तक बाबूजी डॉ. पांडेय का योगदान आज भी स्मरणीय!

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Humble Tribute : जनसंघ के दीपक को रोशन करने से कमल खिलाने तक बाबूजी डॉ. पांडेय का योगदान आज भी स्मरणीय!

शिरीष सकलेचा की रिपोर्ट!

Ratlam : जनसंघ के दीपक की लौ जलाकर देश और प्रदेश में भाजपा रूपी कमल खिलाने में अहम भूमिका निभाने वाले पूर्व वरिष्ठ सांसद एवं पूर्व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीनारायण पांडेय की पुण्यतिथि पर क्षेत्रभर में उन्हें श्रद्धापूर्वक याद किया गया। “बाबूजी” के नाम से लोकप्रिय डॉ. पांडेय भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके विचार, कार्यशैली और सादगीपूर्ण व्यक्तित्व आज भी राजनीतिक एवं सामाजिक जीवन में प्रेरणा का स्रोत बने हुए हैं।

जावरा की धरती से राष्ट्रीय राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाने वाले बाबूजी ने राजनीति के शिखर पर पहुंचने के बावजूद सादगी और सहजता नहीं छोड़ी। सामाजिक एवं धार्मिक गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता निभाते हुए उन्होंने जनसेवा को ही अपना जीवन उद्देश्य बनाया। उनका सादा जीवन और उच्च विचार आज भी नई पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक माने जाते हैं।

पास के छोटे से गांव सुजापुर से जावरा आए डॉ. लक्ष्मीनारायण पांडेय ने अपनी मेहनत, लगन और दूरदर्शिता के दम पर राष्ट्रीय राजनीति में जावरा का नाम स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज कराया। वर्ष 1962 के आम चुनाव में उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. कैलाशनाथ काटजू को पराजित कर प्रदेश ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी हलचल मचा दी थी। उस दौर में यह जीत ऐतिहासिक मानी गई, क्योंकि डॉ. काटजू की पहचान नेहरू परिवार के करीबी नेताओं में होती थी।

दशकों तक जावरा-मंदसौर-नीमच संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने के बावजूद बाबूजी को कभी अहंकार स्पर्श नहीं कर पाया। वे निरंतर पार्टी और जनता की सेवा में समर्पित भाव से जुटे रहे। आमजन के बीच उनकी छवि एक साफ-सुथरे, सरल और सहज उपलब्ध रहने वाले जननेता की रही।

पार्टी के लिए अविस्मरणीय योगदान

डॉ. लक्ष्मीनारायण पांडेय ने मध्यप्रदेश भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पद का दायित्व भी पूरी निष्ठा और प्रतिबद्धता के साथ निभाया। भाजपा के आधार स्तंभ माने जाने वाले बाबूजी ने विपरीत परिस्थितियों और संसाधनों के अभाव के दौर में गांव-गांव साइकिल से पहुंचकर पार्टी की रीति-नीति जन-जन तक पहुंचाई। उन्होंने संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

आज भाजपा भले ही विशाल वटवृक्ष बन चुकी हो, लेकिन उसकी मजबूत जड़ों में डॉ. लक्ष्मीनारायण पांडेय जैसे समर्पित और कर्मठ नेताओं का योगदान हमेशा याद रखा जाएगा।

सादगी और सज्जनता की मिसाल

स्वर्गीय बाबूजी की पहचान सादगी, सरलता और सज्जनता रही। यही कारण था कि विरोधी दलों के नेता भी उनका सम्मान करते नजर आते थे। छल-कपट और रंजिश की राजनीति से दूर रहकर उन्होंने राजनीति में शुचिता और मर्यादा का उदाहरण प्रस्तुत किया। बिना आडंबर और दिखावे के उन्होंने राजनीति में शीर्ष मुकाम हासिल किया, जो आज भी जनप्रतिनिधियों के लिए प्रेरणा है।

पुण्यतिथि पर क्षेत्र के नागरिकों, पार्टी कार्यकर्ताओं एवं जनप्रतिनिधियों ने बाबूजी को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित