उज्जैन में कचरा कैफे : सूखे कचरे के मूल्य के बदले में चाय-नाश्ता

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 उज्जैन में कचरा कैफे : सूखे कचरे के मूल्य के बदले में चाय-नाश्ता

    निगमायुक्त की पहल, पांच स्थानों के लिए टेंडर, संचालन स्व सहायता समूह को

🔺कीर्ति राणा

उज्जैन। ऑनलाइन खरीदी में जो सामान सीधे घर मंगवा रहे हैं, उस कचरे को कचरा समझ कर डस्टबिन के हवाले करने से पहले संभल जाइये। ये कचरा चाय-नाश्ते का इंतजाम भी कर सकता है।

आम नागरिक सूखे कचरे के निपटान को लेकर और अधिक सजग हों इस दिशा में उज्जैन निगमायुक्त अभिलाष मिश्रा की यह पहल शहर को अलग पहचान भी दिलाने में सहयोगी हो सकती है। नगर निगम ने फिलहाल शहर के पांच स्थानों पर इस तरह की व्यवस्था निजी हाथों में सौंपने के लिए टेंडर जारी किए हैं, इसी महीने की अंतिम तारीख तक इन टेंडर को मंजूर कर दिया जाएगा।

निगमायुक्त अभिलाष मिश्रा ने चर्चा में कहा शहर में कॉलेज स्टूडेंट सहित युवाओं का एक बड़ा वर्ग है जो चाय-नाश्ता-भोजन से लेकर रोजमर्रा की जरूरतों का सामान ऑनलाइन मंगवाने में ही अधिक विश्वास करता है। इस युवा वर्ग की परेशानी इस कचरे का निस्तारण भी रहती है।
इस कचरा कैफे का नवाचार खासकर इसी वर्ग के लिये है। निगम के कचरा वाहन तो घर-घर से गीला-सूखा कचरा एकत्र करते ही हैं। आमजन सूखे कचरे को कचरा कैफे पर देकर कचरे की कीमत अनुसार चाय-नाश्ते की सुविधा प्राप्त कर सकते हैं। इन कचरा कैफे का संचालन स्व सहायता समूह के माध्यम से किया जाएगा।
कैसे काम करेगा कचरा कैफे
कचरा कैफे वाले इस नवातार के लिये संबंधित निजी एजेंसी व्यवस्था संभालेगी, स्व सहायता समूह द्वारा संचालित कचरा कैफे को प्राप्त होने वाले सूखे कचरे की अनुमानित कीमत आदि का निर्धारण भी कचरा कैफे संचालक द्वारा तय की जाएगी। कैफे को कचरा देने वाले संबंधित ग्राहक को कचरे के निर्धारित मूल्य मुताबिक उपलब्ध सामग्री में से चाय-नाश्ता-कोल्डड्रिंक आदि उपलब्ध कराई जाएगी। फिलहाल कचरा कैफे संचालन के लिये चार धाम मंदिर, सैफी बिल्डिंग, नानाखेड़ा आदि का चयन किया गया है।
सक्सेस हो सकता है कचरा कैफे
उज्जैन देश का एक बड़ा धार्मिक-पर्यटन शहर होने से हर दिन लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही लगी रहती है। बाहर से आने वाले इन श्रद्धालुओं में अधिकांश चार पहिया वाहनों से आते है। ज्यादातर के साथ नाश्ते आदि की सामग्री के पैकेट, प्लास्टिक कटोरियां, मिठाई पैकेट आदि रहते हैं। इस सूखे कचरे को ठिकाने लगाना इनके लिये बड़ी समस्या रहती है। कचरे कैफे वाली व्यवस्था इन्हें भी तनावमुक्त करने वाली साबित होगी।
निगमायुक्त मिश्रा का कहना है शुरुआत में पांच कचरा कैफे के लिये टेंडर आमंत्रित किए हैं। यह प्रयोग सफल रहने पर उज्जैन के सभी धार्मिक स्थलों पर कचरा कैफे शुरु करेंगे। साथ ही सभी धार्मिक केंद्रों पर इस आशय के सूचना बोर्ड भी लगाए जाएंगे कि आप सूखा कचरा कार्ड बोर्ड, प्लास्टिक आदि देकर बदले में कचरा कैफे से उतने ही मूल्य का चाय-नाश्ता प्राप्त कर सकते हैं। कचरे के मूल्य का निर्धारण कचरा कैफे संचालक स्व सहायता समूह द्वारा तय किया जाएगा। इससे उन होटल संचालकों को भी फायदा ही होना है जिन्हें ग्राहकों की असावधानी के चलते नगर निगम की कार्रवाई-दंड आदि का सामना करना पड़ता है।

चित्र ai