इंदौर में हाई-प्रोफाइल हनीट्रैप कांड का पर्दाफाश: शराब कारोबारी को फंसाकर मांगे एक करोड़, महिला तस्कर, प्रॉपर्टी कारोबारी और हेड कॉन्स्टेबल समेत कई हिरासत में

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इंदौर में हाई-प्रोफाइल हनीट्रैप कांड का पर्दाफाश: शराब कारोबारी को फंसाकर मांगे एक करोड़, महिला तस्कर, प्रॉपर्टी कारोबारी और हेड कॉन्स्टेबल समेत कई हिरासत में

के के झा की विशेष रिपोर्ट

इंदौर। देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में एक बार फिर हाई-प्रोफाइल हनीट्रैप कांड ने सनसनी फैला दी है। इस बार निशाने पर रहे शहर के एक शराब कारोबारी, जिन्हें कथित तौर पर जाल में फंसाकर निजी फोटो और वीडियो वायरल करने की धमकी दी गई तथा एक करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी गई। मामले में क्राइम ब्रांच ने महिला शराब तस्कर, उसके बेटे, एक प्रॉपर्टी कारोबारी और पुलिस विभाग के एक हेड कॉन्स्टेबल समेत कई लोगों को हिरासत में लिया है। इस पूरे नेटवर्क की मास्टरमाइंड 2019 के चर्चित हनीट्रैप केस में सजा काट चुकी श्वेता विजय जैन को बताया जा रहा है।
पुलिस के अनुसार बाणगंगा क्षेत्र निवासी 45 वर्षीय शराब कारोबारी हितेंद्र सिंह चौहान ने क्राइम ब्रांच में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि द्वारकापुरी निवासी अलका दीक्षित से उनकी पुरानी जान-पहचान थी। अलका पर पहले से अवैध शराब तस्करी सहित कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। आरोप है कि इसी परिचय का फायदा उठाकर कारोबारी को हनीट्रैप में फंसाया गया और बाद में निजी फोटो-वीडियो वायरल करने की धमकी देकर एक करोड़ रुपये की मांग की गई।
डीसीपी (क्राइम) राजेश त्रिपाठी ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद पुलिस कमिश्नर के निर्देश पर क्राइम ब्रांच ने गुप्त रणनीति तैयार की। 17 मई की देर रात वरिष्ठ अधिकारियों की आपात बैठक में “मिशन सीक्रेट” लॉन्च किया गया। इसके तहत 40 चुनिंदा जवानों की 7 टीमें बनाकर द्वारकापुरी और पीथमपुर में एक साथ छापेमारी की गई।
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने अलका दीक्षित, उसके बेटे जयदीप और प्रॉपर्टी कारोबारी लाखन चौधरी को अलग-अलग स्थानों से हिरासत में लिया। जांच में पुलिस विभाग के हेड कॉन्स्टेबल विनोद शर्मा की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई, जिसके बाद उसे भी हिरासत में ले लिया गया। इसके बाद भोपाल से इस पूरे गिरोह की कथित मास्टरमाइंड श्वेता विजय जैन को पकड़कर इंदौर लाया गया।
क्राइम ब्रांच अब इस हनीट्रैप नेटवर्क के अन्य संभावित सदस्यों, उनके आर्थिक लेन-देन और पुराने मामलों की भी जांच कर रही है। पुलिस का मानना है कि यह गिरोह लंबे समय से प्रभावशाली लोगों को निशाना बनाकर ब्लैकमेलिंग का खेल चला रहा था।