
A Heart-Touching Incident: वो अलविदा कहने नहीं आया था…वो यह यक़ीन करने आया था कि—
दक्षिण अफ्रीका के क्रूगर नेशनल पार्क में अनुभवी रेंजर सिफो नकोसी अकेले पेट्रोलिंग के दौरान हार्ट अटैक का शिकार हो गए। उनकी गाड़ी खाली मिली, जिसके बाद सर्च टीम उन्हें ढूंढने निकली।
लेकिन पार्क के दूर लगे ट्रेल कैमरों में जो मंज़र कैद हुआ, उसने हर देखने वाले का दिल पिघला दिया।
एक बूढ़ा नर हाथी जिसे रेंजर्स “मनुमज़ाने” कहते थे, जिसका ज़ुलू भाषा में मतलब है “जनाब” सिफो की लाश के पास खड़ा मिला। पूरे तीन दिन और तीन रात वह वहां से हिला तक नहीं।
वो अपनी सूंड से बड़े प्यार से सिफो को छूता, पास आने वाले लकड़बग्घों और गीदड़ों को भगा देता, और कभी शाखाओं व पत्तों से उनके जिस्म को ढक देता… जैसे किसी अपने की हिफाज़त कर रहा हो।
तीसरी रात भी हाथी वहीं था… ग़म में डूबा हुआ, धीरे-धीरे झूमता हुआ अपने बिछड़े दोस्त के पास खड़ा।
जब रेस्क्यू टीम गाड़ियों के साथ पहुंची, तब जाकर मनुमज़ाने पीछे हटा। वो खामोशी से देखता रहा, जब सिफो को वहां से ले जाया गया।
बाद में पार्क अधिकारियों ने बताया कि कई साल पहले सिफो ने इसी हाथी को बचाया था, जब शिकारियों ने उसकी मां को मार दिया था। हाथी वो एहसान कभी नहीं भूला।
फुटेज देखने वाले एक साथी ने धीमे से कहा:
“वो अलविदा कहने नहीं आया था… वो यह यक़ीन करने आया था कि कोई उसके भाई की बेअदबी न करे।”
आज भी मनुमज़ाने अक्सर उसी जगह पर आता है। रेंजर्स वहां दोनों की याद में ताज़ा पानी और फल रख देते हैं।
“वो अलविदा कहने नहीं आया था… वो यह यक़ीन करने आया था कि कोई उसके भाई की बेअदबी न करे।”
बस ये एक जुमला ही इंसान को अंदर तक तोड़ देने के लिए काफी है।
क्योंकि कहीं जंगल की ख़ामोशी में, एक हाथी ने एहसान, वफ़ादारी और रिश्तों की क़द्र शायद बहुत से इंसानों से बेहतर समझ ली।
इस धरती पर कुछ इंसान ऐसे भी हैं, जो अपने ही लोगों के साथ वैसा सलूक नहीं करते, जैसा इस शानदार हाथी ने अपने भाई के जिस्म के साथ किया — उस भाई के साथ, जिसने शिकारीयों द्वारा उसकी माँ के मारे जाने के बाद उसकी जान बचाई थी।
इस दुनिया में कुछ इंसान, ज़िंदगी और इंसानियत की उतनी इज़्ज़त नहीं करते, जितनी यह महान अफ्रीकी हाथी करता है।
हम सबको, हाँ हम में से हर एक को, अपने कर्मों पर शर्म महसूस करनी चाहिए
मधुलिका सनातनी की फेस बुक वाल से
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