•••लोटी ‘86 : ओम जैन सर कह रहे थे मुझे भी जोड़ लो 56 वाले वॉट्स एप ग्रुप में

•••लोटी ‘86 : ओम जैन सर कह रहे थे मुझे भी जोड़ लो 56 वाले वॉट्स एप ग्रुप में बधाई देने और लेने वाले लोटी स्कूल के सारे दोस्त गड्ड-मड्ड हो गए…!

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•••लोटी ‘86 : ओम जैन सर कह रहे थे मुझे भी जोड़ लो 56 वाले वॉट्स एप ग्रुप में

 

 

कीर्ति राणा

उज्जैन। बचपन में एक ही स्कूल में पढ़ने वाले और एक ही शहर में रहने वाले जब बरसों बाद मिलें तो एक दूसरे में आए बदलाव, व्यापार-धंधे की बातों के साथ ही उस गुजरे हुए जमाने की सुनहरी यादों में खो गए। तब सब आपस में दोस्त ही थे, कुछ बनने का सपना तब आंखों में तैरता तो था लेकिन स्पष्ट लक्ष्य वाली सोच विकसित नहीं हुई थी। यही वजह रही कि सालों बाद जब ये सब दोस्त मिले तो एक दूसरे की तरक्की पर खुश तो थे ही आपस में एक दूसरे का शुक्रिया अदा करने के साथ ही ‘86 वाली बैच के 56 सदस्यों वाले वॉट्स एप ग्रुप में जोड़ने की मनुहार भी करते रहे।
लोटी स्कूल से 1986 में ग्यारहवीं (हायर सेकेंडरी) करने के बाद कई सहपाठी और मित्रगण अपनी-अपनी दुनिया में रच-बस गए । मुद्दतें हो गईं, एक-दूसरे को देखे, भींच कर गले लगे और फिर उन यादगार पलों को जीने जो ठेठ चालीस बरसों का फलसफा पीछे छोड़ आईं हैं। आखिर क्या खास है, उन लम्हों में कि कसक और ज्यादा रोमांचकारी होती जा रही है। इन दोस्तों के एकसाथ मिलने की एक वजह तो थे तब सहपाठी रहे ओम जैन, जिन्हें मोहन यादव के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने हाल ही में मध्य प्रदेश गृह निर्माण मंडल का चेयरमैन बनाया है।
उज्जैन में पहचान बना चुके ये खास लोग एक साथ इकट्ठा हुए तो उसकी वजह विचारधारा, राजनीतिक दल अथवा किसी शासन-विशेष से सम्बद्धता नहीं थी। वस्तुत: ये एक उन ‘सर’ के प्रति रागात्मक लगाव था, जिन्होंने 1980 के दशक में उज्जैन के लोकमान्य तिलक हायर सेकेंडरी (लोटी) स्कूल की अनेक पौध को सींचने का काम किया। ओम जैन सर और हरीश व्यास सर (प्राचार्य, माधव विज्ञान महाविद्यालय, उज्जैन) उस दौर में लोटी कॉलेज से बीएड करने आए थे और प्रायोगिक अध्यापन के समय अपनी छाप छोड़ना शुरू कर चुके थे। प्रकारांतर में ओम जैन सर भी स्कूली शिक्षा विभाग में व्याख्याता नियुक्त हुए और 62 वर्ष के होने से पहले ही शासकीय सेवा से मुक्ति ले ली और उसके बाद से ही चौबीस घंटे वाले सार्वजनिक जीवन को अपना लिया।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता के बतौर उन्होंने अलग पहचान बनाई। भाजपा में भी उनके विजन और वजन को सबने स्वीकारा, हालांकि वो 2023 के विधानसभा चुनाव में टिकट पाने से जरूर चूक गए लेकिन मध्य प्रदेश फार्मेसी काउंसिल के निर्वाचित अध्यक्ष के ओहदे पर काम करने के बावजूद किसी प्रकार का गुरूर अथवा विवाद का साया उन्हें रत्ती भर-भी छू नहीं पाया।
वे उज्जैन में दशहरा मैदान स्थित नेहरू पार्क के ठीक सामने अपने संयुक्त परिवार के साथ रहते हैं । लोटी-86 की मण्डली जब लाव-लश्कर के साथ उनसे मिलने पहुंची, वे शहर के अनेक जाने-पहचाने लोगों से घिरे हुए थे। तापमान 43 डिग्री सेल्सियस से कम न था, मगर उनकी गर्मजोशी देखते-ही बनती थी। सबसे गले मिलना, कुशलक्षेम पूछना और पूरी संजीदगी-से रेस्पोंड करना… ऐसी ही सारी स्थायी विशेषताओं के कारण ‘सर’ सबके मन में बसे हुए हैं। कोई लाग-लपेट, गिला-शिकवा, ऊंच-नीच, झांकी-झमका नहीं ।
हालांकि जो सारे दोस्त इकट्ठा हुए थे वे सब से परिचित ही थे फिर भी हंसी ठिठौली में उन से पूछ लिया, इन 20-25 में से कितने लोगों को आप नाम से पहचान सकते हैं? ओम सर ने तुरंत एक-एक की तरफ मुखातिब होकर नाम और काम से पहचानना आरम्भ कर दिया । ऐसा लगा, वे लगभग सभी से नियमित संपर्क में हैं, लेकिन कैसे और क्यों, खोज का विषय है। मामला बेहतरीन याददाश्त पर नहीं टिकता, बल्कि उनकी सादगी-भरी सक्रियता को पुनर्स्थापित करता है।
उनके निवास पर शुभेच्छुओं का पहुंचना रुक नहीं रहा था, लेकिन वे इन सब को छुट्टी देना नहीं चाहते थे! कहते रहे मिठाई तो खाओ और फिर मनुहार के साथ खुद ही सभी का मुंह मीठा कराने लगे। बोले जाना मत, छांछ आ रही है।
मिठाई-मनुहार आदि होने के बाद जब सभी दोस्त विदा लेने के लिये अग्रसर हुए, सर ने जोर से आवाज लगाई, घेरा बनाया और वो बात कह दी, जिसके मोहवश सारे दोस्त उनका अभिनन्दन करने गए थे ‘मैं आप लोगों से उम्र में बड़ा हूं, आपके एक्सपोज़र से अच्छे से वाकिफ हूं। नए दायित्व का सर्वोत्तम ढंग से निर्वाह करना है। समाज की भलाई और उन्नति के लिए कभी ये मत सोचना कि आप मुझसे कुछ बोलोगे, तो उसको अन्यथा लिया जाएगा । मैंने संघ से सीखा और सेवा भारती में उसे लागू किया ‘सही रास्ते पर और सीधा चलो”…वे जज्बाती हो चले थे. इधर ये सभी साथी तो पहले-से भावावेश में थे…।
जब फर्श बेहद गरम हो चुका था, वे जाते-जाते कथित रूप से कांग्रेस के समर्थक एक अजीज साथी से बोले, “जब मैं सरकारी नौकरी में लग गया, तब-भी इंदौर रोड स्थित तुमारे गांव में 120-120 छात्र-छात्राओं के कैंप लगाये थे, सात-सात दिन के, लोटी स्कूल के साथ मिलकर । 8 मनमौजी छात्र बिना अनुमति कान्ह नदी में नहाने चले गए और तूफान खड़ा कर दिया, लेकिन तुम्हारे प्रयत्नों से सब सेटल हो गया था!
फिर वो उनके निवास के बाहर खड़ी कार में हमारे एक साथी की रुग्ण मां से मिलने पहुंच गए और उन्हें प्रणाम कर ससम्मान बिदा दी! पत्रकार साथी से बोले, तुम बेझिझक समीक्षा करते रहना, सब साथी फिर से अपने-अपने घरों को लौटने को थे कि वे बोले तुम सब लोग इतने दशक बाद भी एक होकर मुझे शुभकामनाएं देने आ गए, लेकिन मैं इस बात को रेखांकित ही नहीं कर पाया । मुझे 56 सदस्यों वाले लोटी-86 वॉट्स एप ग्रुप में जोड़ लो ।

🔹ओम जैन सर के साथ चार दशक
बाद एक साथ थे ये सारे सहपाठी
मध्य प्रदेश गृह निर्माण मंडल के चेयरमैन ओम जैन सर के साथ पंक्तिबद्ध खड़े लोग भी कम जाने-पहचाने नहीं हैं। इनमें कमल सिंह आंजना (अधिवक्ता), राजेंद्र झालानी (व्यवसायी), विशाल सिंह हाड़ा (पत्रकार), मुकेश यादव (उपाध्यक्ष, उज्जैन विकास प्राधिकरण), रवींद्र टंडन (व्यवसायी), प्रदीप तिवारी (जन अभियान परिषद्), संदीप सिंह कुशवाह (ठेकेदार), गोपाल वर्मा (उद्यमी), गिरीश जैन (व्यवसायी), कमल केवलानी (व्यवसायी), नितिन गरुड़ (चार्टर्ड अकाउंटेंट), सुनील खत्री (स्कूल-हॉस्पिटल संचालक), शैलेष कचोले (शासकीय चिकित्सक), अयाज़ कुरैशी (व्यवसायी), उपेन्द्र सिंह झाला (कृषक), निरुक्त भार्गव (पत्रकार), धर्मेन्द्र शर्मा (अधिवक्ता), राजेश वर्मा (उद्यमी) और महेश मरमट (शासकीय चिकित्सक) साथ थे।