बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में हमलावर टाइगर की मौत का रहस्य बरकरार..!

मध्य प्रदेश के वन्य प्राणी के इतिहास में पहली बार टाइगर की मौत का दूसरी बार पोस्ट मार्टम!

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बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में हमलावर टाइगर की मौत का रहस्य बरकरार..!

गणेश पांडे की विशेष रिपोर्ट

भोपाल। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में एक हमलावर टाइगर की मौत का रहस्य चौथे दिन भी बरकरार है। जबकि मृत टाइगर के शव का पोस्टमार्टम राज्य वन्यजीव संस्थान जबलपुर में कराया गया। पोस्टमार्टम की रिपोर्ट आने के बाद ही टाइगर की मौत पर रहस्य खुलेगा। हां, 44-45 डिग्री के तापमान में टाइगर के गर्दन को ट्रेंकुलाइज करना, मुख्य वन्य प्राणी अभिरक्षक से पार्क प्रबंधन के निर्णयों पर सवाल जरूर खड़ा करता है।

एक और यक्ष सवाल कि जब वन्य प्राणी के शीर्ष प्रबंधन यह मान रहा है कि ट्रेंकुलाइज से पहले ही टाइगर की मौत हो गई थी तब यह जानने के लिए वह जिन्दा है या नहीं, ट्रेंकुलाइज करना जरुरी था? टाइगर की वस्तु स्थिति जानने के लिए और कोई दूसरा विकल्प नहीं था?

ये प्रमुख सवाल है, जिसका उत्तर खोजना और दोषियों पर कार्यवाही से वन्य प्राणी प्रबंधन को नई दिशा मिलेगी। अभी तक तो यही दिखाई दे रहा है कि हमलावर टाइगर की मौत में लापरवाही का नतीजा है।

इस संबंध में सेवानिवृत पीसीसीएफ वन्य प्राणी जेएस चौहान कहते है कि टाइगर के गर्दन को ट्रेंकुलाइज करना नासमझी है। चौहान का कहना है कि अव्वल तो टाइगर के पिछले हिस्से को ट्रेंकुलाइज किया जाता है। यदि यह संभव नहीं हो तो फिर सोल्डर को निशाना बनाना चाहिए था। मीडिया में जारी फोटो में साफ दिखाई दे रहा कि टाइगर के गर्दन को ट्रेंकुलाइज किया गया। वे यह भी कहते हैं कि टाइगर जिन्दा या नहीं, इसके लिए ट्रेंकुलाइज बेवकूफी है। यह जानने के लिए और भी विकल्प हो सकते थे।

इसी प्रकार बांधवगढ़ में सबसे सफल फील्ड डायरेक्टर रहे मृदुल पाठक भी यही कहते है कि इतनी भीषण गर्मी की दोपहरी में ट्रेंकुलाइज करने का निर्णय नहीं लिया जाना था। वे बताते है कि आमतौर पर टाइगर हो या फिर अन्य वन्य प्राणी को ट्रेंकुलाइज शाम के समय या ठंड के मौसम में किया जाता है। पाठक भी यही कहते है कि गर्दन पर ट्रेंकुलाइज नहीं किया जाना है। लगता है कि ट्रेंकुलाइज करने के बाद एंटी डोज़ नहीं दिया गया। वे बताते हैं कि ट्रेंकुलाइज करने के बाद 15-20 मिनट के भीतर एंटी डोज़ देना होता है।

*अब पीएम रिपोर्ट का इंतजार*

मप्र के वन्य प्राणी के इतिहास में पहली बार टाइगर की मौत का दूसरी बार पोस्ट मार्टम कराया गया। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में 24 मई 2026 को एक बाघ की मृत्यु के पश्चात NTCA PROTOCOL के अनुसार उसका पोस्ट मार्टम परीक्षण बांधवगढ़ में हुआ उसके बाद 25 मई को तीन पशुचिकित्सकों के द्वारा राज्य वन्यजीव संस्थान (SWFH) जबलपुर में पुनः शव परीक्षण किया गया। तीनों पशुचिकित्सकों के अतिरिक्त क्षेत्र संचालक बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व, संचालक, SWFH जबलपुर तथा आमंत्रित सदस्य प्रोफेसर, पैथोलॉजी विभाग, NDVSU जबलपुर तथा सहायक प्राध्यापक SWFH जबलपुर उपस्थित रहे। शव परीक्षण के पूर्व समस्त समिति सदस्यों द्वारा रेस्क्यू की परिस्थितियों एवं कार्यवाही पर जानकारी प्राप्त की तथा समिति सदस्यों को बांधवगढ़ में हुए शव परीक्षण के फोटो एवं वीडियो उपलब्ध कराए गए। मृत्यु का वास्तविक कारण पोस्ट मार्टम परीक्षण रिपोर्ट तथा सैंपल्स के प्रयोगशाला जांच आने के बाद ही ज्ञात हो सकेंगे।

*बांधवगढ़ का यह भी ट्रेक रिकार्ड रहा…!* 

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व का ट्रेक रिकॉर्ड भी अजब-गजब है। जब -जब टाइगर की मौत हुई और उस पर लापरवाही या लीपा-पोती हुई तब-तब मुख्य वन्य प्राणी से लेकर फील्ड डायरेक्टर तक बदल दिए गए। पूर्व में पीसीसीएफ वन्य प्राणी पद रवि श्रीवास्तव को एक टाइगर की मौत के चलते हटना पड़ा। इसके पहले सीता नामक फीमेल टाइगर की मौत पर पीके मिश्रा को एपीसीसीएफ वन्य प्राणी पद से हटाया गया था। पिछले वर्षों में कोदो-कुटकी खाने से हाथियों की मौत पर पीसीसीएफ वन्य प्राणी वीएन अम्बाड़े को हटाया गया और अवकाश पर रहने के बाद भी तत्कालीन फील्ड डायरेक्टर गौरव चौधरी को निलंबित कर दिया गया था।