Film Review: ‘द ग्रेट ग्रैंड सुपरहीरो’ परफेक्ट नहीं, प्यारी-मासूम फिल्म 

43

Film Review: ‘द ग्रेट ग्रैंड सुपरहीरो’ परफेक्ट नहीं, प्यारी-मासूम फिल्म 

डॉ. प्रकाश हिन्दुस्तानी

‘द ग्रेट ग्रैंड सुपरहीरो : एलियंस का आगमन’ बच्चों की यह फिल्म परफेक्ट नहीं है, लेकिन बहुत प्यारी है। दादा और पोते का दिल छू लेने वाला रिश्ता, दोस्ती, बच्चों की कल्पना और भरपूर हंसी-मजाक इस फिल्म को रोचक बनाए रखता है।

 

इसमें एलियंस की कोई हाई-टेक उड़ान नहीं है, लेकिन मासूमियत और स्वाभाविकता का खूबसूरत कॉम्बो जरूर है। फिल्म में पर्यावरण की चिंता भी है और देसी फील भी भरपूर है। कई दृश्यों की इमोशनल गहराई दिल को छू लेती है।

 

जैकी श्रॉफ, भाग्यश्री, प्रतीक स्मिता पाटिल, दुर्गेश कुमार, सहर्ष कुमार शुक्ला और कुमार सौरभ ने बच्चों के साथ शानदार काम किया है। गाने कुमार विश्वास और आरुषि कौशल ने लिखे हैं। फिल्म के लेखक और निर्देशक मनोज सैनी हैं।

 

करीब 11 साल का एक चालाक और शरारती लड़का नए स्कूल में दोस्त बनाने और अपना इम्प्रेशन जमाने के लिए झूठ पर झूठ बोलता है — “मेरे दादाजी सुपरहीरो हैं और एलियंस से भी निपट चुके हैं!”

 

कोई दोस्त तो आँख बंद करके मान जाता है, लेकिन दूसरा करमचंद बनकर सच्चाई पकड़ने पर तुल जाता है।

 

दूसरी तरफ बेचारे दादाजी शुगर के पेशेंट हैं, छिपकली से डरने वाले और कमर दर्द से परेशान बुजुर्ग। पोते ने इतनी ब्रांडिंग और मार्केटिंग कर दी कि उन्हें कुछ न कुछ करना ही पड़ता है…

फिल्म बच्चों की कल्पना, दादा-पोते के प्यारे रिश्ते, दोस्ती और पर्यावरण के संदेश को मिलाकर एक सुंदर देसी फैंटेसी बना देती है। VFX बेहद सादे हैं, कहानी कुछ जगहों पर कमजोर भी लगती है, लेकिन फिर भी फिल्म परफेक्ट नहीं लगती — प्यारी जरूर लगती है।

देखने लायक फिल्म।