
रविवारीय गपशप: No Tobacco Day: दृढ़ इच्छा शक्ति से छोड़ी जा सकती है तंबाकू की आदत
आनंद शर्मा
क्या आप बता सकते हैं कि किस व्यवसायी या दुकानदार की याददाश्त सबसे तेज होती है ? मेरे अनुभव में पान की दुकान वाले भैया की याददाश्त का कोई मुकाबला नहीं होता । आने वाले विभिन्न ग्राहकों में कौन कैसा पान खाता है , ये उसे जुबानी याद होता है । कौन ग्राहक पतली सुपारी , कौन बिना सुपारी , कौन बिना पिपरमेंट और कौन कैसी और कितनी मात्रा में कौन सी तंबाकू खाता है ये उसके दिमाग के खाने में बखूबी फिट रहता है । मुझे सिगरेट पीने का शौक कॉलेज के जमाने में हुआ , लेकिन गजानन टॉकीज़ चौराहे पर सिगरेट के साथ गिद्दू भाई की दुकान से तम्बाकू के साथ पान खाने की आदत भी लग गई । गिद्दू पानवाले के यहाँ शाम और सुबह मिलने का अड्डा सा था , हर दिन सारे दोस्त एक एक कर वहीं इकट्ठा होते और फिर आगे का प्लान बनता । गिद्दू पानवाले की दोस्ती कमाल की थी , मैं साल भर उसकी दुकान से पान खाता और ट्यूशन के पैसे मिलने पर हिसाब चुकता करता । बीच बीच में कालेज और प्रतियोगी परीक्षाओं की फीस भी गिद्दू भाई की उधारी से ही चलती । नौकरी लगी तो सिगरेट और पान खाने में पैसों की तंगी का झंझट खत्म हो गया तो पान और सिगरेट दोनों की आदत और पक्की होती गई । नौकरी में जगह जगह तबादले होते रहे और कालांतर में सिगरेट तो ग्वालियर आकर छूट गई , जिसका दिलचस्प किस्सा मैं पहले बयाँ कर चुका हूँ , पर पान खाने की आदत इंदौर आने तक बनी रही । जब ग्वालियर से इंदौर पोस्टिंग हुई तो मेरे बड़े भाई सदृश मित्र अरुण तिवारी जी ने कहा , “बढ़िया है , अब पार्श्वनाथ का पान खा सकोगे”। रीगल टॉकीज़ के सामने पार्श्वनाथ के नाम से पान की तीन दुकानें हैं , उनमें से ही एक दुकान में पहुँच। जब बाबा की चटनी , और किमाम के साथ पान का बीड़ा बनवाया तो लगा अरे वाह ये तो गजब पान है । पान खाने की जो आदत लगी तो दिनोंदिन बढ़ती ही गई । पान में सचमुच एक तड़का सा था , सो सुबह कलेक्ट्रेट जाने पर पान के पैकेट बन जाते , और शाम को लौटते भी रीगल से पान बँधवा लेते । होते होते , जिले में पदस्थ और साथी भी वैसा ही पान खाने लगे , एक समय तो ऐसा हुआ कि नगर निगम कमिश्नर योगेन्द्र शर्मा , आईडीए के सीईओ चंद्रमौली , और यहाँ तक की कलेक्टर राघवेंद्र सिंह भी वैसा ही पान खाने लगे । मज़ेदार बात यह थी कि इन सभी के ड्राइवर पान की दुकान पर जाते और कहते आनंद शर्मा जी वाले पान लगा दो । यानी पसंद एक ब्रांड बन चुकी थी ।
इन्दौर से ट्रांसफ़र हुआ तो श्रीमती जी ने ज़िद की कि अब तो पार्श्वनाथ का पान मिलेगा नहीं इसलिए इसके माध्यम से शरीर में जा रही तंबाकू बंद करो और पान खाने की आदत छोड़ो । मैंने हाँ तो कर दी पर पान खाने की आदत छूटी नहीं , और दोस्त तो ऐसे मेहरबान कि पार्श्वनाथ की पान की दुकान से पान के पैकेट बँधवा कर बस से विदिशा तक पहुँचवा देते । जब मैं राजगढ़ कलेक्टर हुआ तब भी ये सिलसिला चल रहा था । जब कभी मैं इंदौर परिवार से मिलने आता तो पार्श्वनाथ की पान दुकान से इकट्ठे पान बँधवा लेता , और ड्राइवर को ये हिदायत होती कि रात को जहाँ वो रुकता है , वहीं चुपचाप घर में पता चले बिना पान का डिब्बा रख ले और दूसरे दिन अलसुबह पान वाहन में रख कर हम राजगढ़ की ओर चल पड़ते । मुझे ये पता नहीं था कि मेरे वाहन का ड्राइवर राजू रात को पान सुरक्षित रखने के लिहाज से पड़ोस के क्वार्टर में रह रहे परिवार के फ्रिज में पान रख देता है । एक दिन जब गाड़ी राजगढ़ की ओर आधे रास्ते तक आ गई तो मैंने राजू से पूछा “ पान कहाँ हैं ?” राजू को याद आया कि पान तो वह इंदौर में पड़ोसी के यहाँ ही भूल आया है । उसने माफ़ी माँगी पर अब क्या हो सकता था ? मैंने कहा कोई बात नहीं चलते रहो और हम राजगढ़ पहुँच गए । उधर दूसरे दिन सुबह संबंधित ने फ्रिज में रखे पान देखे तो वो समझ गया कि साहब का ड्राइवर इसे उठाना भूल गया है । उसने सहज भाव से पान की गड्डी निकाली और मेरे फ्लैट में आकर श्रीमती जी को दे दी और मेरी ये पोल खुल गई कि मैं पान छोड़ चुका हूँ , बस क्या था इस बार जब वापस आया तो ऐसे ऐसे तंज कसे गये कि मैंने निश्चय किया अब लुकाछिपी छोड़ सच में पान खाना छोड़ना ही होगा और फिर दृढ़ संकल्प कर मैंने पान खाने की आदत छोड़ ही दी ।
आज वर्ल्ड नो टोबेको डे है , इसलिये यदि आप भी तंबाकू की आदत छोड़ना चाहते हैं , तो संकल्प लेकर इसकी शुरुआत कर सकते हैं । यह सच है कि जो लोग तम्बाकू का सेवन करते हैं , वे जानते हैं कि इस लत को छोड़ना सरल नहीं है पर यदि दृढ़ इच्छाशक्ति से मन में ठान लें तो इसे छोड़ा जा सकता है । दोस्तों मैंने भी अपनी दृढ़ इच्छा शक्ति से सिगरेट और पान तंबाकू दोनों की आदत छोड़ी है तो सचमुच यदि आप मन में ठान लो तो तम्बाकू से किनारा कर सकते हो ।





