
रजिस्ट्री के रास्ते ग्रामीण ‘जन-जन’ के मन में बसने का ‘मोहन-मंत्र’…
कौशल किशोर चतुर्वेदी
मध्यप्रदेश गांवों में बसता है। ऐसे में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ग्रामीण क्षेत्र में रह रही 70 फीसदी आबादी का दिल जीतने का फैसला किया है। शिवराज सरकार में ग्रामीणों को संपत्ति पर अधिकार प्रदान करने के लिए जो अधिकार पत्र वितरित किए गए थे, उनको बैंक ने बैंकिंग के लिए उपयुक्त नहीं माना था। इसलिए मकानों और ग्रामीणों के प्लॉट आदि पर स्वामित्व प्रदान करने के लिए दिए गए अधिकार पत्र अपने उद्देश्य की पूर्ति नहीं कर पा रहे थे। संपत्ति पर ग्रामीणों को ऋण नहीं मिल पा रहा था और इसके चलते वह व्यवसाय या अन्य उपयोग के लिए बैंक का फायदा नहीं ले पा रहे थे। ग्रामीणों की इस को परेशानी को देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने 2 जून 2026 को कैबिनेट में बड़ा फैसला किया है। सरकार अब ग्रामीण संपत्तियों की रजिस्ट्री कराएगी। इससे ग्रामीणों को उनकी संपत्ति पर बैंक से लोन मिलना शुरू हो जाएगा। यह फैसला लेकर मानसून से पहले ही ग्रामीण आबादी के लिए मोहन ने खुशियों की बारिश कर दी है।
कैबिनेट ने स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना-2026 की स्वीकृति दी है। कैबिनेट ने निर्णय लिया कि प्रदेश में स्वामित्व योजना में जिन भू-खण्डधारियों के अधिकार अभिलेख निर्मित किए गए हैं, उन्हें आसानी से ऋण उपलब्ध कराने के लिए इन निर्मित अधिकार अभिलेखों का पंजीयन कराया जाए। इसके लिए डीड ऑफ कन्वेयेंस का निष्पादन एवं पंजीयन किया जाएगा, ताकि नागरिक आवश्यकतानुसार गृह निर्माण, व्यवसाय एवं कृषि संक्रियाओं आदि के लिए ऋण प्राप्त कर अपनी आजीविका एवं आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ कर सकें। इस योजना के क्रियान्वयन के लिए विशेष अभियान के तहत कार्यवाही पूर्ण की जाएगी। अब तक कुल 68.11 लाख अधिकार अभिलेखों का निर्माण किया गया है। इसमें 48.32 लाख निजी संम्पत्तियां शामिल हैं। मोहन का ग्रामीणों को तोहफा यह है कि अधिकार अभिलेखों के पंजीयन के लिए नागरिकों से स्टाम्प ड्यूटी अथवा पंजीयन शुल्क नहीं लिया जाएगा। संपूर्ण व्यय राशि 3800 करोड़ रुपये का वहन राज्य शासन करेगा।
गौरतलब है कि मध्यप्रदेश पहला राज्य होगा जहां ग्रामीण क्षेत्रों की आबादी के नागरिकों के भू-खण्ड संबंधी अधिकार सुरक्षित कर उनकी आर्थिक उन्नति के मार्ग को प्रशस्त किया जा रहा है। स्वामिव योजना में मध्यप्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों की आबादी में निवासरत नागरिकों को उनका वैधानिक अधिकार प्रदान करने के लिए अधिकार अभिलेखों का निर्माण ड्रोन तकनीक का उपयोग करते हुए किया गया है। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करने, प्रक्रिया निर्धारण, समय-समय पर समीक्षा के लिए आयुक्त भू-संसाधन प्रबंधन की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया जायेगा। इस समिति में महानिरीक्षक पंजीयन एवं अधीक्षक मुद्रांक, आयुक्त कोष एवं लेखा, आयुक्त-संचालक पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग तथा प्रबंध संचालक एमपीएसईडीसी, सदस्य होंगे एवं आवश्यकतानुसार विषय विशेषज्ञों को संयोजित किया जा सकेगा। योजना के प्रचार-प्रसार, मुद्रण व्यय एवं जन-जागरुकता गतिविधियों के संचालन के लिए राज्य स्तर पर 10 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। योजना का विस्तृत परिपत्र एवं समय-समय पर आवश्यकतानुसार स्पष्टीकरण आदि जारी करने के लिए राजस्व विभाग को अधिकृत किया गया है।
इस पूरी प्रक्रिया को संभव बनाने के लिए मंत्रि-परिषद ने “मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 (संशोधन) अध्यादेश, 2026” के प्रारूप को स्वीकृति प्रदान की है। स्वीकृति अनुसार राज्यपाल से संविधान के अनुच्छेद 213 के खण्ड (1) के अधीन अध्यादेश प्रख्यापित किया जाएगा।
मंत्रि-परिषद ने मध्यप्रदेश उपकर अधिनियम, 1981 की धारा 9(1) में संशोधन के लिए “मध्यप्रदेश उपकर (संशोधन) अध्यादेश, 2026” के प्रारूप का अनुमोदन किया है। अध्यादेश को भारत के संविधान के अनुच्छेद 213 के खंड (1) अंतर्गत प्रख्यापन कराये जाने की कार्यवाही के लिए वित्त विभाग को अधिकृत किया गया है। वर्तमान में राजस्व विभाग द्वारा संचालित स्वामित्व योजना के अंतर्गत, अधिकार अभिलेखों का पंजीयन कराये जाने तथा ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति स्वामित्व अभिलेखों का व्यापक स्तर पर पंजीयन किये जाने के दृष्टिगत वित्तीय एवं प्रशासनिक आवश्यकताओं के अनुरूप अधिनियम को अद्यतन किये जाने एवं शासकीय राजस्व के हितों का संरक्षण किया जा सकेगा।
तो सीएम डॉ. मोहन यादव ने ग्रामीण आबादी को बड़ी राहत दी है। सरकार
48.32 लाख निजी संपत्तियों की रजिस्ट्री कराएगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के इस एक फैसले से 48 लाख से ज्यादा संपत्तियों से जुड़ी 5 करोड़ से अधिक आबादी सीधे तौर पर लाभान्वित होगी। ऐसे में यह फैसला मोहन को जन-जन के मन में बसा देगा। अगर शिवराज सरकार में लाडली बहना जैसा महत्वपूर्ण फैसला लिया गया था तो मोहन सरकार में ग्रामीण संपत्ति की रजिस्ट्री उपहार स्वरूप ग्रामीणों को भेंट करने का मोहन का फैसला चुनावी दृष्टि से लाडली बहना के समकक्ष खड़ा दिखने वाला है। और अंततः विधानसभा चुनाव 2028 से पहले रजिस्ट्री के रास्ते ग्रामीण ‘जन-जन’ के मन में बसने का यह ‘मोहन-मंत्र’ कारगर साबित होने वाला है…।
लेखक के बारे में –
कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।
वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।





