प्रसंगवश :बात दो दो कौड़ी की

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प्रसंगवश :बात दो दो कौड़ी की

नीलम सिंह सूर्यवंशी

बात दो दो कौड़ी की,
बात निकली है तो दूर तक जाएगी और कौड़ी-कौड़ी का दाम बताकर कर जाएगी।
आहत है भारत का बच्चा-बच्चा चाहे वो गाँवों रहता हो या महानगर में रहता हो, चाहे वो बच्चा प्राइमरी का विद्यार्थी हो या यू पी एस सी का विद्यार्थी हो, अंजना ओम कश्यप के बयान से मैं भी बहुत आहत हूँ ।
उन्होंने अपने एक बयान में शिक्षकों को दो-दो कौड़ी का बताया है।हमारी पहली शिक्षक हमारी माँ होती हैं, इसी बयान के साथ उन्होंने उस माँ को भी दो कौड़ी का कह दिया है जिसनें हमें जन्म दिया है ।
हम विकसित भारत की बात करते हैं ‘क्या वो बता सकतीं है बिना शिक्षा और बिना शिक्षक के भारत कैसे विकास के पथ पर चलेगा। भारत के विभिन्न अनुसंधान संस्थान हो चाहे एम्स हो आई आई एम हो, वर्ल्ड लेवल के आई आई टी संस्थान हो क्या बिना शिक्षक के संभव है। सर्वपल्ली राधाकृष्णन, बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर, महात्मा गांधी जवाहर लाल नेहरु या अटलबिहारी बाजपेयी जी क्या बिना शिक्षा के ही भारत के सर्वोच्च पदों पर आसीन थे।
दुनिया में कहीं भी चले जाओ हर देश शिक्षा के महत्व को स्वीकार करता है तो क्या वो बिना शिक्षक के संभव हो सकता है ।
हमारी वर्तमान सरकार बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान को बढ़ावा दे रही है ,वहीं ये कैसी बेटी है जो पढ़ लिख कर उन्हीं शिक्षकों को दो कौड़ी का बता रही हैं।
मैं अंजना जी से बहुत विनम्रता से पूछना चाहती हूँ कि जिस पत्रकारिता का वो चिल्ला-चिल्ला कर डंका बजाती हैं,क्या वो बिना शिक्षकों के संभव हो सका है?
क्या अपने आप ही पत्रकारिता के इस स्तर तक पहुँच गई हैं?
शिक्षक वो होता है जो ख़ुद से पहले अपने विद्यार्थियों की सफलता के लिए मेहनत करता है, वो एक राह बताने वाले मार्गदर्शक होता है, वो दो कौड़ी के इंसान को भी सभ्य सुसंस्कारवान इंसान बनाता है।
स्वयं ईश्वर ने भी गुरु को प्रथम और सर्वोत्तम माना है ऐसे में किसी भी गुरु को दो कौड़ी का कहना गुरु का अपमान है। इसलिए कहा गया है-
गुरु गोविंद दोऊ खड़े , काके लागू पाय।
बलिहारी गुरु आपकी, गोविंद दियो बताय ।