MP पुलिस में है भरपूर अफसर फिर भी IPS अधिकारियों को दिया जा रहा अतिरिक्त प्रभार 

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MP पुलिस में है भरपूर अफसर फिर भी IPS अधिकारियों को दिया जा रहा अतिरिक्त प्रभार 

भोपाल: प्रदेश पुलिस में IPS अधिकारियों की भरपूर संख्या होने के बावजूद कई महत्वपूर्ण पद अब भी अतिरिक्त प्रभार के भरोसे चल रहे हैं। गृह विभाग द्वारा जारी ताजा आदेश में पांच पुलिस अधिकारियों को उनके वर्तमान दायित्वों के साथ-साथ अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई है। इससे एक बार फिर पुलिस प्रशासन में पदस्थापना और अधिकारियों के उपयोग को लेकर सवाल खडे हो गए हैं।

दरअसल प्रदेश में डीआईजी और एसपी रेंक के 150 के लगभग अफसर हैं, लेकिन इनमें से बड़ी संख्या में अफसरों को पुलिस मुख्यालय में पदस्थ कर रखा है।

सोमवार को जारी आदेश अनुसार भिंड, सागर, मंडला और दतिया के पुलिस अधीक्षकों को संबंधित जिलों में स्थित विशेष सशस्त्र बल (एसएएफ) वाहिनियों का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। वहीं ग्वालियर रेंज के डीआईजी को एसएएफ ग्वालियर का अतिरिक्त दायित्व दिया गया है। इससे पूर्व जबलपुर डीआईजी के पास भी यहां की एसएएफ का अतिरिक्त प्रभार है। जबकि एक डीआईजी को कमांडेंट के पद पर रखा गया है।

प्रदेश में वर्तमान में एसपी एवं कमांडेंट रैंक के करीब 96 अधिकारी उपलब्ध हैं, जबकि डीआईजी रैंक के 47 अधिकारी हैं। इनमें से प्रदेश में 17 डीआईजी रेंज, 55 जिले, 8 डीसीपी और 3 रेल एसपी के रूप में पदस्थ हैं। यानि इन दोनों पदों पर मिलाकर 83 अफसर ही फील्ड में रखे गए हैं। बाकी अफसर बटालियन और पुलिस मुख्यालय में पदस्थ हैं। इसके चलते ही इतनी बड़ी संख्या में वरिष्ठ अधिकारियों की उपलब्धता के बावजूद कई महत्वपूर्ण पदों पर पूर्णकालिक नियुक्ति नहीं की जा रही है।

प्रदेश पुलिस के महत्वपूर्ण बल एसएएफ में कई कमांडेंट और डीआईजी एवं आईजी के पद अतिरिक्त प्रभार के रूप में फील्ड अफसरों को सौंपे गए हैं। ग्वालियर रेंज के आईजी को ग्वालियर रेंज एसएएफ का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। इसी तरह जबलपुर डीआईजी को यहां के एसएएफ डीआईजी का अतिरिक्त प्रभारी भी दिया गया है। सोमवार को ग्वालियर डीआईजी को ग्वालियर एसएएफ का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। जबकि एक बटालियन के कमांडेंट को डीआईजी बने हुए दो महीने होने जा रहे हैं, लेकिन उन्हें अब तक कमांडेंट ही बना कर रखा है।

*पुलिस मुख्यालय में जमा होते अफसर*

फील्ड में अफसरों को अतिरिक्त प्रभार दिए जाने का सबसे बड़ा कारण यह है कि पुलिस मुख्यालय में अफसर बड़ी संख्या में पदस्थ हैं। डीआईजी और एसपी-कमांडेंट रेंक के कई अफसर यहां पर पदस्थ हैं। कई अफसर लंबे अरसे से यहां पर पदस्थ हैं, उन्हें फील्ड में नहीं भेजा जा रहा है।