जल गंगा संवर्धन की आड़ में हो रहे अवैध उत्खनन के मामले में शासन ने किया 4 सदस्यीय दल गठित
भोपाल जिले में सबसे ज्यादा शिकायतें आने पर लिया गया निर्णय
भोपाल : जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में जल गंगा संवर्धन अभियान की आड़ में कथित अवैध उत्खनन की शिकायतों के बाद अब राज्य स्तर पर जांच शुरू हो गई है। भौमिकी एवं खनिकर्म संचालनालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए चार सदस्यीय जांच दल का गठन किया है, जो भोपाल जिले के विभिन्न क्षेत्रों में हो रहे उत्खनन कार्यों की पड़ताल करेगा। मामले की जांच के लिए गठित दल में उप संचालक संचालनालय भोपाल विवेक नेमा को प्रभारी बनाया गया है। उनके साथ उप संचालक सोहन बघेल, सहायक खनिज अधिकारी अशोक सिंगारे तथा जिला कार्यालय विदिशा के खनि निरीक्षक राजीव कदम को शामिल किया गया है।
जानकारी के अनुसार कोलार रोड, अचारपुरा, नीलबड़ तथा अन्य ग्रामीण इलाकों में जल संरक्षण और जलाशयों के गहरीकरण के नाम पर बड़े पैमाने पर मिट्टी और कोपरा निकालकर बेचे जाने की शिकायतें सामने आई थीं।
आरोप है कि कुछ स्थानों पर अभियान की आड़ में लाखों रुपए मूल्य की मिट्टी और खनिज सामग्री का अवैध दोहन किया गया। इस मामले में भोपाल जिले से सबसे ज्यादा मामले सामने आने पर शासन ने यह कदम उठाया और इसे लेकर शासन स्तर पर चार सदस्यीय जांच दल गठन कर मामले की जांच शुरू करवाई गई है। इस मामले में खनिज विभाग और जिला पंचायत विभाग के कुछ अधिकारियों पर भी समय रहते कार्रवाई नहीं करने के आरोप लगाए गए थे। हालांकि, जांच दल बनने के बाद इस मामले में तेजी से काम किया जा रहा है।
इधर, अचारपुरा के डोबरा रोड स्थित कुठार क्षेत्र की चंदेरी झील के आसपास अवैध उत्खनन की शिकायत पर एडीएम सुमित पांडे ने जिला खनिज अधिकारी से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। शिकायत में दावा किया गया है कि चंदेरी झील से प्रतिदिन करीब 60 ट्रक कोपरा निकाला जा रहा है और इसे लगभग 8 रुपए प्रति फीट की दर से बेचा जा रहा है। जांच दल उत्खनन स्थलों का निरीक्षण कर यह पता लगाएगा कि कार्य निर्धारित नियमों और स्वीकृतियों के अनुरूप किया गया या नहीं। जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जाएगी। मामले को लेकर ग्रामीणों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों की नजर अब जांच के निष्कर्षों पर टिकी हुई है।





