स्टाफ के अनुपस्थित रहने पर महिला ने अस्पताल के बाहर ही नवजात को जन्म दिया, मेडिकल ऑफिसर सहित 3 के खिलाफ कार्रवाई

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स्टाफ के अनुपस्थित रहने पर महिला ने अस्पताल के बाहर ही नवजात को जन्म दिया, मेडिकल ऑफिसर सहित 3 के खिलाफ कार्रवाई

 

खरगोन : मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के झिरन्या विकासखण्ड के शिवना प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) में बुधवार सुबह स्टाफ के अभाव में एक प्रेग्नेंट महिला ने अस्पताल के बाहर ही एक बालिका शिशु को जन्म दे दिया। घटना को लेकर सीएमएचओ खरगोन ने मेडिकल ऑफिसर और दो अन्य स्टाफ के विरुद्ध कार्रवाई की है।

 

सीएमएचओ खरगोन दौलत सिंह चौहान ने बताया की शिवना स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के सामने आज तड़के डिलीवरी के मामले में खरगोन से एक पांच सदस्यीय टीम भेज कर जांच कराई गयी । उन्होंने बताया कि ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर ने संबंधित लोगों को शो काज नोटिस दिए थे।

उन्होंने बताया कि जांच के बाद मेडिकल ऑफिसर डॉ साक्षी सोनी का 10 दिन एएनएम अन्नपूर्णा चौहान का 15 दिन और जीएनएम रजनी का 15 दिन के वेतन काटने के निर्देश दिए गये हैं।

झिरन्या के ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉक्टर दीपक शस्त्रे ने बताया कि घटना का पता चलते ही वे शिवना पहुंचे और उन्होंने मेडिकल ऑफिसर और दो फीमेल नर्स को शो काज नोटिस दिए हैं। उन्होंने बताया कि एएनएम अन्नपूर्णा चौहान अर्न लीव सैंक्शन हुए बगैर ही 15 दिन पहले अवकाश पर चली गई थी इसके चलते दूसरी नर्स पर वर्कलोड आ गया था।

 

उन्होंने बताया कि मंगलवार को दूसरी नर्स को अवकाश दिया गया था। इसी बीच रात को एक केस आया जिसे नजदीकी पीएचसी केंद्र गुराडिया में भेजा गया जहां प्रसव हुआ।

 

उन्होंने कहा कि बुधवार तड़के एक महिला टेढ़ निवासी 19 वर्षीय बाइसू बाई को यहां लाया गया लेकिन दुर्भाग्य जनक रूप से उसे अस्पताल के बाहर ही डिलीवरी करना पड़ी। उसे 2.9 kg वजन का बालिका शिशु हुआ है। उन्होंने बताया कि जच्चा बच्चा दोनों स्वस्थ हैं। हालांकि ऐहतियात तौर पर दोनों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

 

बाइसू बाई के पति रवींद्र भूरिया ने बताया कि करीब 5 बजे प्रसव पीड़ा से कराहती पत्नि को केंद्र में लाये, लेकिन एक घंटे तक भी कोई स्टाफ मौजूद नहीं मिला। सुबह 6 बजे तक डॉक्टर, नर्स या अन्य स्वास्थ्यकर्मी के न पहुंचने के कारण महिला को स्वास्थ्य केंद्र के बाहर ही नवजात को जन्म देना पड़ा।

परिजनों के अनुसार, उन्होंने स्टाफ को बुलाने और संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन फोन रिसीव नहीं हुआ। हालात ऐसे बने कि खुले परिसर में ही डिलेवरी करानी पड़ी। डिलेवरी के एक घण्टे बाद तक भी अस्पताल स्टाफ नहीं पहुंचा था।