
पत्नी से अवैध संबंध की जानकारी होने पर हत्या के करने वाले आरोपी राजेश मईड़ा को आजीवन कारावास साक्ष्य के अभाव में 2 आरोपी दोषमुक्त!
Ratlam : अष्टम अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, निर्मल मंडोरिया ने हत्या के एक प्रकरण में 1 आरोपी राजेश मईड़ा को आजीवन कारावास तथा साक्ष्य के अभाव में हत्या के 2 दोषियों को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। अतिरिक्त लोक अभियोजक संजीव सिंह चौहान ने बताया कि सत्र प्रकरण क्रमांक 72/2022 में पारित निर्णय अनुसार राजेश (27) पिता बेहरिंग मईड़ा, निवासी ग्राम डोडियार, थाना मानगढ़, जिला रतलाम को मृतक वालचन्द्र डोडियार की हत्या का दोषी पाते हुए भारतीय दण्ड संहिता की धारा 302 के अंतर्गत आजीवन कारावास एवं ₹5 हजार रुपए अर्थदंड से दण्डित किया। उन्होंने बताया कि 29 नवम्बर 2021 को सूचनाकर्ता प्रकाश द्वारा पुलिस को सूचना दी गई थी की खेड़ीकला रोड़, खाखरे का माल, धोलावाड़ डेम के ऊपर ग्राम उमर में एक व्यक्ति पाइप लाइन के पास सड़क के किनारे मृत हालत में पड़ा हैं और उसके ऊपर हीरो कंपनी की मोटरसाइकिल MP 43 DY 7067 पड़ी हैं। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची थी जहां मृतक के शव का मुंह व शरीर का आधा भाग अनाज भरने वाली प्लास्टिक की थैली में भरा हुआ था। शव का निरीक्षण करने पर पाया गया था कि मृतक के गले को किसी धारदार हथियार के काटा गया था मृतक की आयु लगभग 25-26 वर्ष थी तथा उसके बाएं पंजे और गुप्तांग पर चोटें लगी हुई थी। मृतक की हत्या किसी अन्य स्थान पर कर लाश छुपाने के लिए मौके पर फेंका गया था।
पुलिस द्वारा शव का पोस्टमार्टम करवाया गया और थाना रावटी 302, 201 IPC का प्रकरण दर्ज किया जाकर विवेचना प्रारंभ की गई। विवेचना के दौरान 1 दिसम्बर 2021 को आरोपी राजेश पिता बेहरिंग को गिरफ्तार किया गया। उसने बताया की उसकी पत्नी का मृतक बालचंद्र से प्रेम प्रसंग था। मृतक बालचंद आरोपी राजेश की पत्नी से मिलने भूरीघाटी आया था जिन्हें आरोपी ने खेत में मिलते हुए देख लिया था। तब आरोपी की पत्नी वहां से भाग गई थी इसके बाद राजेश ने दराते से गला काटकर बालचंद की हत्या कर दी थी। आरोपी राजेश ने शव को बोरी में भरकर आरोपी विकास की मदद से धोलावाड़ जंगल उमर में सड़क के किनारे मृतक को मोटरसाइकल सहित फेक दी थी। उसके बाद आरोपी मुकेश, राजेश और विकास को अपनी मोटरसाइकिल से ले गया था। पुलिस ने आरोपी राकेश से घटना में प्रयुक्त हथियार और खून आलूदा कपड़े जप्त किए गए थे। जप्तशुदा हथियार और कपड़ों का डीएनए परीक्षण करवाया गया था। इसके बाद अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।
प्रकरण का विचारण अष्टम अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश के न्यायालय में किया गया। अभियोजन द्वारा अपने साक्ष्यों के साक्ष्य, वैज्ञानिक जांच रिपोर्ट तथा अपने तर्क न्यायालय में प्रस्तुत किए गए। विचारण के दौरान अभियोजन द्वारा प्रस्तुत मौखिक एवं दस्तावेजी साक्ष्यों, परिस्थितिजन्य साक्ष्यों तथा विवेचना में संकलित साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने अभियुक्त राजेश मईड़ा को हत्या का दोषी पाते हुए धारा 302 भादंसं के अंतर्गत आजीवन कारावास एवं ₹5 हजार रुपए अर्थदंड से दंडित किया। वहीं सह-अभियुक्त विकास मईड़ा एवं मुकेश मईड़ा के विरुद्ध पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध न होने के कारण उन्हें संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त किया गया!





