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प्लॉट पर बन रहे मंदिर निर्माण की अनुमति भी मंडल अध्यक्ष ने ही गांव के युवाओं को दी थी। मगर निर्माणकर्ता युवा यहां मंदिर के साथ कुछ कमरों का निर्माण भी कर रहे थे। जिस पर मंडल अध्यक्ष मनोज पाटीदार ने आपत्ति ली और मौके पर नायब तहसीलदार राधावल्लभ धाकड़ को भी जमीन नपती के लिए बुला लिया। नायब तहसीलदार की उपस्थिति में जब विवाद की स्थिति बनी तो मंडल अध्यक्ष के कहने पर ही नायब तहसीलदार ने महू थाने से पुलिसकर्मियों का बल मंगाया।जब पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे तो मंडल अध्यक्ष ने उनसे कहा कि जब कोई मर जाएगा, तब आओगे क्या … इतनी देर से क्यों आए हो? इस पर पुलिसकर्मियों ने भी जवाब देते हुए मंडल अध्यक्ष से कहा कि यह राजस्व का काम है। इसमें हमें क्यों बुला लिया। बात बढ़ती चली गई और पुलिसकर्मी ने मंडल अध्यक्ष मनोज पाटीदार की कॉलर तक पकड़ ली।
इसके बाद पुलिसकर्मी मनोज पाटीदार को पुलिस वाहन में बैठाकर महू थाने भी ले आए। इसके बाद थाने पर भाजपा नेताओं का जमावड़ा लग गया और कुछ ही देर में मंडल अध्यक्ष को थाने से छुड़ा लिया गया। लेकिन, इस विवाद में उन पुलिसकर्मियों पर शामत आ गई, जो वहां गए थे।