
आगर मालवा पुलिस की ड्रग्स केस में कार्रवाई से भोपाल तक मचा हड़कंप, दोनों राज्यों के आला अफसरों के बीच चल रही बातचीत
भोपाल : आगर मालवा पुलिस की एमडीएमए ड्रग्स केस में फर्जी कार्रवाई को लेकर भोपाल तक हड़कंप मच गया है। राजस्थान पुलिस द्वारा आगर मालवा पुलिस के खिलाफ प्रकरण दर्ज करने के बाद अब दोनों राज्यों के आला अफसर बातचीत कर हल निकालने में जुट गए हैं। इस मामले में आगर कोतवाली थाना प्रभारी शशि उपाध्याय और बड़ौदा थाना प्रभारी रूप सिंह राजपूत सहित राखी गुर्जर, अजय जाट, राहुल विश्वकर्मा, शुभम सहित 90 लोगों पर डग पुलिस ने प्रकरण दर्ज किया है।
अब इस मामले में अब राजस्थान के चौमहला न्यायालय के फैसले को चुनौती देने के लिए अपील करने की तैयारी की जा रही है। इस एफआईआर से एक बार फिर मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा एनडीपीएस एक्ट के तहत की गई पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठ खड़े हुए हैं।
आगर पुलिस की कार्रवाई
28 जनवरी को राजस्थान के झालावाड़ जिले के डग थाना अंतर्गत,घाटाखेड़ी गांव में आगर कोतवाली पुलिस ने कार्रवाई की थी। इस कार्रवाई में आगर कोतवाली पुलिस ने बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ एवं ड्रग्स निर्माण सामग्री बरामद करने का दावा किया था।
पुलिस का दावा था कि सुसनेर निवासी आरोपी फैजान की सूचना के आधार पर कार्रवाई की गई थी। इस कार्रवाई को आरोपी के पिता हमीद खान ने झूठा बताते हुए चौमहला न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत किया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि मध्य प्रदेश पुलिस ने स्थानीय पुलिस को बिना विधिवत सूचना दिए उनके घर पहुंची, परिजनों के साथ दुर्व्यवहार किया और बाद में उनके पुत्रों को झूठे प्रकरण में फंसा दिया। आगर पुलिस ने छापे, गिरफ्तारी और जब्ती की कार्यवाही महज 30 मिनट में ही पूरी कर ली थी।
झालावाड़ पुलिस ने की थी जांच
इस मामले में न्यायालय के आदेश पर झालावाड़ पुलिस ने भी जांच की थी। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक भागचंद्र मीणा ने यह जांच की थी। जांच रिपोर्ट में ऐसे तथ्य सामने आए, जिसमें मध्य प्रदेश पुलिस की कार्रवाई की वैधता और पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए। इसके बाद ही डग थाना पुलिस ने आगर मालवा पुलिस के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया। खास बात यह है कि आगर मालवा की पुलिस ने यहां पर तलाशी और गिरफ्तारी की वीडियोग्राफी भी नहीं की थी।




